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    BHU में एक्सीडेंट में छात्र की मौत पर हंगामा:ट्रामा सेंटर के डॉक्टर्स पर लापरवाही का आरोप, स्टूडेंट बोले-यहां मांगा जा रहा है पैसा

    3 hours ago

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    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वीसी हाउस के सामने छात्रों ने प्रदर्शन के बाद हंगामा किया। यह प्रदर्शन शनिवार रात बीएचयू में एक्सीडेंट के बाद ट्रामा सेंटर में छात्र की मौत होने के विरोध में है। छात्रों का आरोप है कि ट्रामा सेंटर में डॉक्टर्स की लापरवाही की वजह से छात्र की जान चली गई। यदि समय पर डॉक्टर ट्रीटमेंट शुरू करते तो बिहार के औरंगाबाद निवासी छात्र सूरज प्रताप (22) आज जिंदा होता। सूरज एमसी एग्रीकल्चर के सेकेंड ईयर का छात्र था। फिलहाल मौके पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम छात्रों को समझा रही है। जबकि छात्र परिजनों को मुआवजे और ट्रामा सेंटर के डॉक्टर्स पर कार्रवाई को लेकर अड़े हुए हैं। देखें तस्वीरें… देर रात बीएचयू कैंपस में हुआ था एक्सीडेंट प्रदर्शन कर रहे छात्र आशीष सिंह ने बताया - औरंगाबाद, बिहार निवासी सूरज प्रताप (उम्र 22 वर्ष), जो एमएससी एग्रीकल्चर सेकंड ईयर के छात्र थे। शनिवार देर रात लगभग साढ़े बारह बजे अपने दो दोस्तों के साथ अवेंजर बाइक से बाल गंगाधर तिलक हास्टल से निकले थे। जैसे ही वे जेसी बोस हास्टल के पास पहुंचे, वहां पर्याप्त लाइट की व्यवस्था न होने के कारण उनकी बाइक बैरिकेडिंग से टकरा गई। एक्सीडेंट में सूरज प्रताप को सीने और पेट में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं थी। ट्रामा सेंटर में लापरवाही के बाद हुई मौत छात्र आशीष ने बताया- घायल छात्र को तत्काल एम्बुलेंस से ट्रामा सेंटर ले गए। वहां वो स्ट्रेचर पर तड़प रहे थे लेकिन हमसे प्रोसेस पूरा करने को कहा गया। जबकि हमने अपना स्टूडेंट परिचय पत्र भी दिखाया पर हमें इंतजार करवाया गया। थोड़ी देर बाद उन्हें दर्द का इंजेक्शन लगाया गया पर उन्हें आराम नहीं मिला। जब हम इंजेक्शन लगवाकर आये तो डॉक्टर ने कहा कि इनकी हालत बहुत क्रिटिकल है। ऐसे में उन्हें सीपीआर दिया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सिटी स्कैन का पैसा लिया गया छात्र बोले- स्टूडेंट होने के बावजूद हमसे ट्रामा सेंटर में सिटी स्कैन का पैसा मांगा गया। इसके बाद हमने सिटी स्कैन कराया गया। हमारा मानना है कि ट्रामा सेंटर के डॉक्टर अगर त्वरित इलाज देते तो हमारा दोस्त बच सकता था। लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है। छात्र कर रहे हैं ये मांग धरना दे रहे छात्रों की मांग है कि- ट्रामा सेंटर में किसी भी घायल छात्र या व्यक्ति को बिना देरी के तत्काल इलाज दिया जाए। कागजी औपचारिकताओं के कारण इलाज में देरी न हो। इसके अलावा मृतक छात्र के परिवार को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि उनके परिवार को भविष्य में किसी प्रकार की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
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