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    BJP ने सपा से दो गुना ज्यादा फॉर्म-6 भरवाए:सियासी दलों ने सिर्फ 1% दावे-आपत्तियां की; 51 लाख वोटर्स ने खुद किया आवेदन

    8 hours ago

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    विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के तहत अब तक करीब सवा लाख मतदाताओं के नाम काटने के लिए आपत्तियां भारत निर्वाचन आयोग के पास आई हैं। वहीं, नाम जुड़वाने के लिए अब तक 51 लाख लोगों ने आवेदन किया है। समाजवादी पार्टी, भाजपा और चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर नाम कटवाने के लिए साजिश रचने का लगातार आरोप लगा रही। ऐसे में सवाल उठना वाजिब है कि अब तक भाजपा ने कितने लोगों के नाम जुड़वाने और कटवाने के लिए आवेदन किया? सपा और अन्य राजनीतिक दलों ने कितने आवेदन किए? सपा के आरोपों में कितना दम है? आयोग का क्या कहना है? पढ़िए ये खास खबर… चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां लेने के लिए समय एक महीने बढ़ाया। पहले यह 6 फरवरी तक था, जिसे बढ़कर 6 मार्च किया जा चुका है। आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक आए ज्यादातर आवेदन आम मतदाताओं ने खुद बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के पास जमा किए हैं। चाहे नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 हो या नाम हटाने के लिए फॉर्म-7, राजनीतिक दलों की भागीदारी एक फीसदी से भी कम रही है। आयोग के पास अब तक कुल 51 लाख 43 हजार 362 लोगों ने फॉर्म 6 जमा किए हैं। इसमें राजनीतिक दलों के जमा किए गए फॉर्म- 6 की संख्या सिर्फ 40,284 है। इसमें भी सपा और भाजपा ने मिलाकर सबसे ज्यादा 36 हजार 950 फॉर्म जमा किए हैं। इसी तरह एक लाख 18 हजार 688 मतदाताओं को लेकर आपत्तियां आई हैं। इसमें राजनीतिक दलों की ओर से मात्र 1790 आपत्तियां आईं। भाजपा की ओर से सबसे ज्यादा 1729 आपत्तियां हैं। सपा की ओर से 47 मतदाताओं के विरुद्ध आपत्तियां की गईं। दावे और आपत्तियों के लिए समय सीमा 6 मार्च तक है। 27 मार्च तक सुनवाई पूरी होगी और 10 अप्रैल को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। समय अवधि बढ़ाने के बाद आवेदन में आई तेजी निर्वाचन आयोग के आंकड़े बताते हैं कि दावे और आपत्तियों की समय सीमा एक महीने बढ़ाए जाने के बाद आवेदन की संख्या में तेजी आई है। 6 फरवरी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि 6 जनवरी से 4 फरवरी तक के 30 दिनों में करीब 37 लाख 80 हजार लोगों ने नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरा था। जबकि 82 हजार से ज्यादा लोगों ने नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किया था। इस दौरान रोजाना औसतन 1 लाख 26 हजार फॉर्म-6 और करीब 2756 फॉर्म-7 भरे जा रहे थे। लेकिन जब 6 फरवरी को आवेदन की आखिरी तारीख एक महीने बढ़ाई गई, तब रफ्तार और तेज हो गई। सपा का आरोप- भाजपा नाम कटवा रही समाजवादी पार्टी का आरोप है कि भाजपा और आयोग मिलकर बड़े पैमाने पर लोगों के वोट काटना चाहते हैं। इसके लिए फर्जी तरीके से फॉर्म-7 भरवाए जा रहे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ये आरोप लगा चुके हैं कि बड़े पैमाने पर भाजपा कार्यकर्ता फर्जी तरीके से मतदाताओं के फर्जी हस्ताक्षर कर लोगों के नाम काटने के लिए फॉर्म-7 भर रहे। ये फॉर्म कंप्यूटर से भरे हैं। अखिलेश यादव ने 16 फरवरी को भी कहा कि सपा के कार्यकर्ता, विधायकों के परिवार के नाम फॉर्म-7 के जरिए कटवाने की कोशिश की जा रही। उन्होंने मांग की है कि जो फॉर्म अज्ञात में भरे गए हैं, उनकी जांच कराई जाए। उन लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएं, जिनके नाम काटने के लिए फॉर्म-7 भरे गए और जिन्होंने नाम काटने के लिए आपत्तियां दीं। अखिलेश यादव ने कहा है कि पार्टी के विधायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिलेंगे। SIR में हो रही गड़बड़ी की शिकायत करेंगे। जो शंकाएं हैं, उनको लेकर आयोग से सवाल पूछेंगे। इसके बाद मामले को विधानसभा में भी उठाया जाएगा। आयोग ने खारिज किया राजनीतिक दखल का आरोप मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा कहते हैं- फॉर्म-7 किसी व्यक्ति का नाम हटाने या किसी के दावे पर आपत्ति करने के लिए भरा जाता है। आपत्तिकर्ता को फॉर्म-7 भरते समय अपना नाम, वोटर आईडी कार्ड नंबर, जिस व्यक्ति के खिलाफ आपत्ति की जा रही, उसका नाम और आपत्ति का कारण बताना होता है। फॉर्म-7 को बड़ी संख्या में (बल्क में) स्वीकार नहीं किया जाता। राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट फॉर्म-7 एक दिन में अधिकतम 10 जमा कर सकते हैं। साथ ही उन्हें अंडरटेकिंग भी देनी होती है। फॉर्म-7 मिलने पर ईआरओ आपत्तिकर्ता और जिस व्यक्ति के खिलाफ आपत्ति की गई है, दोनों को नोटिस भेजता है। नोटिस मिलने के बाद सुनवाई होती है। इसमें साक्ष्य पेश किए जाते हैं। फिर ईआरओ नियमानुसार निर्णय लेता है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में चौधरी की नई टीम में फंसा जातीय पेंच, होली के बाद होगा ऐलान भारतीय जनता पार्टी की यूपी इकाई में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल अब होली के बाद ही होगा। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम को लेकर पहले दौर का मंथन पूरा हो चुका है। लेकिन, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर पेंच फंसा है। ऐसे में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दूसरे दौर की बैठकों के बाद ही अंतिम मुहर लगेगी। पढ़ें पूरी खबर
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