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    बिना डॉक्टर की सलाह दवाइयां खाना पड़ रहा भारी:GSVM की रिसर्च, प्रेगनेंसी में पेनकिलर लेने से बच्चेदानी कमजोर हुई

    2 hours ago

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    अक्सर हम छोटी-मोटी सर्दी, खांसी, बुखार या बदन दर्द होने पर खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं। घर में रखी कोई भी एंटीबायोटिक या दर्दनाशक (पेनकिलर) दवा निगल लेते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, और खासकर प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसा कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। जाने-अनजाने में बिना डॉक्टर की सलाह के खाई गई एक छोटी सी गोली जिंदगी भर का दर्द दे सकती है। कानपुर के जीएसवीएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज के अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा-बच्चा अस्पताल में हुआ एक हालिया शोध इसी तरफ इशारा कर रहा है। डॉक्टरों ने 500 गर्भवती महिलाओं पर लगातार दो साल तक एक स्टडी की। इस रिसर्च के जो नतीजे सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। 50% महिलाओं की बच्चेदानी की परत हुई कमजोर जच्चा-बच्चा अस्पताल की विभागाध्यक्ष प्रो. रेनू गुप्ता के मुताबिक, रिसर्च में शामिल 500 ऐसी गर्भवती महिलाओं की केस हिस्ट्री देखी गई, जिन्होंने सामान्य खांसी, जुकाम, बुखार या पीरियड्स के दर्द में बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक और पेनकिलर दवाएं खा ली थीं। नतीजा यह हुआ कि इनमें से करीब 50 प्रतिशत महिलाओं की बच्चेदानी (यूट्रस) की परत बेहद कमजोर हो गई। परत कमजोर होने की वजह से इन महिलाओं में समय से पहले प्रसव (प्री-मैच्योर डिलीवरी) का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया। 120 से ज्यादा महिलाओं का करना पड़ा सर्जिकल प्रसव लापरवाही का असर यहीं खत्म नहीं हुआ। दवाइयों के साइड इफेक्ट की वजह से करीब 120 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकी और उनका सर्जिकल प्रसव (सिजेरियन) करना पड़ा। इतना ही नहीं, कई मामलों में तो महिलाओं को आगे चलकर बांझपन (Infertility) और फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने जैसी गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। संक्रमण इतना बढ़ा कि निकालनी पड़ी बच्चेदानी इस स्टडी में 7 मामले तो ऐसे सामने आए जहां स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ चुकी थी। बिना सोचे-समझे खाई गई दवाओं के कारण इन महिलाओं की बच्चेदानी में इन्फेक्शन (संक्रमण) इस कदर फैल गया कि डॉक्टरों को सर्जरी करके उनकी बच्चेदानी ही बाहर निकालनी पड़ी।
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