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    बरेली नमाज विवाद में हाईकोर्ट सख्त, DM-SSP तलब:घर मालिक को 24 घंटे सुरक्षा का आदेश, 23 मार्च को आएगा फैसला

    22 hours ago

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    बरेली में अपने घर में नमाज पढ़ने पर पुलिस की ओर से रोक लगाने पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिले के शीर्ष अधिकारियों से जवाब तलब किया। दोनों अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए ? अब अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने रिट याचिका संख्या 5646/2026 (तारिक खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) की सुनवाई करते हुए बरेली के डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी 23 मार्च को उपस्थित नहीं हुए, तो उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया जा सकता है। पहले यह 3 तस्वीर देखिए… मोहम्मदगंज गांव के एक मकान में लोग जुमा की नमाज अदा करते हैं। इसका वीडियो सामने आया तो पुलिस ने रोक लगाते हुए नमाज पढ़ने वालों का चालान कर दिया। गांव के कुछ घरों में इस्लामिक झंडे भी लगे हुए हैं। घर में जुमा की नमाज होने से नाराज होकर अपने घर के बाहर मकान बिकाऊ है का स्लोगन लिख दिया। इन्हें घर में नमाज पढ़ने पर ऐतराज है। कोर्ट में मकान मालिक बोला, बुलडोजर चलवाने की धमकी मिली दो महीने पहले 16 जनवरी को जिस मकान में नमाज पढ़ी गई थी, उस मकान के मालिक हसीन खान ने सुनवाई के दौरान खुली अदालत में बयान दर्ज कराया। हसीन खान ने आरोप लगाते हुए कहा, उस दिन मैं अपने घर में परिवार के साथ नमाज पढ़ रहा था, तभी पुलिस मुझे उठाकर ले गई और चालान कर दिया। बाद में आरिफ प्रधान और मुख्तयार ने मुझे धमकाया कि अगर कोर्ट में उनके मुताबिक नहीं बोला तो घर पर बुलडोजर चलवा दिया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि पुलिस वालों ने उन्हें गांव के बाहर घेरकर एक लिखित कागज पर अंगूठा लगवा लिया, जिसे वह पढ़ नहीं सके क्योंकि वह अनपढ़ हैं। अदालत ने पूछा, नमाज के लिए ली गई थी अनुमति? अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी से सीधा सवाल किया कि क्या 16 जनवरी को हसीन खान की निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने के लिए कोई अनुमति मांगी गई थी? कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब 23 मार्च 2026 को दोपहर 2:00 बजे अंतिम आदेश के लिए तारीख तय की है। 24 घंटे साए की तरह साथ रहेंगे दो गनमैन, सुरक्षा में चूक पर राज्य जिम्मेदार हसीन खान ने अपनी और परिवार की जान को खतरा बताया। इस पर हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से उन्हें 24/7 सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि दो सशस्त्र गार्ड हमेशा हसीन खान के साथ रहेंगे। पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि यदि हसीन खान या उनकी संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचता है, तो प्रथम दृष्टया इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार माना जाएगा। इस आदेश की प्रति तत्काल एडवोकेट जनरल कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सुरक्षा आज से ही सुनिश्चित की जा सके। बरेली पुलिस ने 16 जनवरी को बिना अनुमति के मकान में नमाज पढ़ने के आरोप में पुलिस ने 12 लोगों का चालान किया था। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… गांव में मस्जिद नहीं, घराें में जुमा की नमाज मोहम्मदगंज गांव की आबादी करीब 1200 है। यहां 65 फीसदी हिंदू और 35 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है। गांव में कोई मस्जिद नहीं है। पहले लोग जुमा की नमाज के लिए आसपास के गांव जाया करते थे। फिर गांव में ही एक घर में नमाज अदा करनी शुरू कर दी। हर शुक्रवार को जुमा की नमाज एक एक घर में पढ़ने लगे। जिस घर में नमाज होती है, वह गांव के ही हसीन नाम के व्यक्ति का है। हसीन दूसरे घर में रहते हैं। जिस मकान में नमाज होती है, वह अलग है। इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ है। यहां काफी समय से शुक्रवार को जुमा की नमाज होती है। गांव के लोग इकट्‌ठा होकर नजाम पढ़ते हैं। इसकी शिकायत हुई तो पुलिस ने नमाज पर रोक लगा दी। नमाज पढ़ने वालों का चालान कर दिया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोग हाईकोर्ट चले गए। जानिए पिछली बार क्या हुआ था… पहली बार एक महीने पहले 16 जनवरी को यह मामला सामने आया था। मोहम्मदपुर के इसी घर में जुमा की नमाज अदा करने का वीडियो सामने आया था। नमाज के दौरान किसी ने वह वीडियो बनाकर पुलिस तक पहुंचा दिया। अगले दिन पुलिस ने वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर 12 लोगों का चालान किया। कुछ दिन तक उस घर में नमाज नहीं हुई, अब पिछले शुक्रवार 13 फरवरी को उसी घर में फिर से नमाज हुई। किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।नजाम पढ़े जाने से गांव के हिंदू समुदाय में नाराजगी है। दो दिन पहले गांव की हिंदू महिलाओं ने घर में नमाज पढ़ने का विरोध किया। हिंदू आबादी का ऐतराज, नई परंपरा का विरोध हिंदू आबादी ने इस पर ऐतराज जताया। उनकी शिकायत है कि घर में नमाज पढ़ने की नई परंपरा डाली गई है। पहले ऐसा नहीं होता था। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो कोई मस्जिद है और न ही मंदिर। ऐसे में घरों को इबादतगाह में बदलना एक नई परंपरा की शुरुआत है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। इसी से नाराज होकर हिंदू आबादी ने विरोध में गांव से पलायन करने का ऐलान कर दिया। इसके लिए बाकायदा अपने-अपने घरों के बाहर चॉक से मकान बिकाऊ है लिख डाला। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस वहां पहुंची। दोनों के पक्ष के लोगों को समझाया गया। गांव के कई और मकानों के बाहर भी बिकाऊ लिखकर विरोध जताया गया है। मुस्लिम पक्ष का तर्क, ‘इबादत करना गुनाह नहीं' इस पूरे मामले पर मुस्लिम समुदाय के लोगों का तर्क बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि गांव में इबादत के लिए कोई सार्वजनिक स्थान या मस्जिद नहीं है। ऐसे में अपने निजी घरों में खुदा की इबादत करना कोई अपराध नहीं है। मुस्लिम पक्ष के अनुसार, हिंदू समुदाय बेवजह छोटी बातों को तूल दे रहा है और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। फायरिंग के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह निराधार और साजिश बताया है। गांव के प्रधान मोहम्मद आरिफ ने कहा कि मस्जिद है, इसीलिए घर में नमाज पढ़ी जाती है। इस पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए। ग्राम प्रधान मोहम्मद आरिफ ने बताया कि गांव में नमाज होती है, पता नहीं विरोध क्यों है। हाईकोर्ट आदेश का मुख्य अंश ---------- यह खबर भी पढ़ें… बरेली में पुलिस ने नमाज रोकी...अदालत ने फटकार लगाई:बरेली के DM-SSP को अवमानना नोटिस, घर पर नमाज पढ़ने वालों पर कार्रवाई हुई थी बरेली में घर में नमाज पढ़ने पर रोक लगाने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए ? जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने साफ कहा कि किसी के निजी परिसर में धार्मिक गतिविधि को रोकना कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। पूरी खबर पढ़ें
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