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    बस की बॉडी 1 मीटर बढ़ाई थी:रोड टैक्स भी बाकी था, एक्सीडेंट के तुरंत बाद मालिक ने जमा किया टैक्स

    7 hours ago

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    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर पलटी डबल डेकर बस मामले में मंगलवार को हुई विस्तृत तकनीकी जांच ने कई गंभीर अनियमितताओं को उजागर कर दिया है। आरटीओ प्रवर्तन की रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज किया गया है कि दुर्घटना के पीछे प्राथमिक वजह चालक की गलती रही। हालांकि, जांच यहीं तक सीमित नहीं रही। बस की संरचना, सीटों की बनावट, लंबाई-चौड़ाई और सुरक्षा इंतजामों में बड़े पैमाने पर नियमों से खिलवाड़ की पुष्टि हुई है। इमरजेंसी विंडो के सामने सीट जांच में पाया गया कि बस के मूल डिजाइन में बदलाव कर इमरजेंसी विंडो के पास अतिरिक्त सीट लगा दी गई थी। यह बदलाव न केवल परिवहन मानकों का उल्लंघन है, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। आपातकालीन निकास के रास्ते को अवरुद्ध करना सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की श्रेणी में आता है। इससे स्पष्ट है कि बस का आंतरिक ढांचा व्यावसायिक लाभ के लिए बदला गया। 12 मीटर की बस को बढ़ाकर किया 12.9 मीटर तकनीकी टीम की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि बस की बाहरी संरचना में छेड़छाड़ कर उसकी लंबाई 12 मीटर से बढ़ाकर 12.9 मीटर कर दी गई थी। वाहन के आयामों में इस प्रकार का बदलाव बिना विधिक अनुमति के नहीं किया जा सकता। लंबाई बढ़ाने से वाहन का संतुलन और ब्रेकिंग क्षमता प्रभावित होती है, जो तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना का जोखिम बढ़ाती है। स्लीपर सीटों का आकार घटाकर बढ़ाई गई संख्या जांच में यह भी पुष्टि हुई कि बस में स्लीपर सीटों के मानक आकार में कटौती की गई थी। नियम के अनुसार, डबल स्लीपर सीट की चौड़ाई 1.2 मीटर होनी चाहिए, जिसे घटाकर 1 मीटर कर दिया गया। लंबाई 1.8 मीटर निर्धारित है, जिसे घटाकर 1.720 मीटर कर दिया गया।सीटों का आकार कम कर अधिक स्लीपर सीटें फिट की गईं। पहले ही सामने आ चुका है कि 16 स्लीपर सीटों की अनुमति वाली बस में 43 स्लीपर सीटें बना दी गई थीं। इससे यात्रियों की सुरक्षा, आराम और आपातकालीन मूवमेंट, तीनों प्रभावित हुए। हादसे की सूचना मिलते ही भरा गया रोड टैक्स आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडे ने बताया कि , बस पलटने की सूचना मिलते ही मालिक ने जल्दबाजी में बकाया रोड टैक्स जमा कराया। बस पर पहले से 67 चालान लंबित थे, जिनका भुगतान नहीं किया गया था। यह सवाल अब जांच का हिस्सा है कि इतने चालान और अनियमितताओं के बावजूद बस लगातार विभिन्न जिलों से होकर कैसे गुजरती रही और किसी स्तर पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लगी। एक ड्राइवर के भरोसे 1360 किमी का सफर नियमों के मुताबिक लंबी दूरी की बसों में दो ड्राइवर होना अनिवार्य है, लेकिन यह बस पंजाब से बिहार तक लगभग 1360 किलोमीटर की दूरी केवल एक चालक के भरोसे तय कर रही थी। मानकों के अनुसार 4.5 घंटे की ड्राइविंग के बाद 45 मिनट का ब्रेक और 14 घंटे की ड्यूटी में कम से कम तीन घंटे का विश्राम जरूरी है। प्रारंभिक जांच में इन मानकों का पालन नहीं पाया गया। थकान की स्थिति में वाहन संचालन भी हादसे की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। कागज पूरे, जमीनी सच्चाई अलग बस के फिटनेस, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध थे। कागजों के आधार पर बस पूरी तरह फिट थी, लेकिन वास्तविकता में ढांचे में बदलाव, सीटों में छेड़छाड़, ओवरलोडिंग और सुरक्षा नियमों की अनदेखी साफ दिखी। यह मामला केवल एक हादसे का नहीं, बल्कि परिवहन निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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