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    Calcutta High Court का आदेश तोड़ना पड़ा भारी! Mamata Banerjee पर FIR, बढ़ी मुश्किल

    3 hours from now

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    कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार, 28 अगस्त को तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने बताया कि हेस्टिंग्स पुलिस स्टेशन में बनर्जी और तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) की बैठक के आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन के लिए FIR दर्ज की गई है। जांच के दौरान उल्लंघन में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। इसे भी पढ़ें: BJP-RSS की विचारधारा में है दलितों के प्रति नफरत, Jairam Ramesh का तीखा हमलाअधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह मामला कोलकाता के कैमक स्ट्रीट पर पार्टी के 'अनधिकृत' (बिना इजाज़त लगाए गए) बिलबोर्ड को हटाने की कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों के साथ मारपीट करने और उनके काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज किया गया। यह FIR शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई।कोलकाता नगर निगम (KMC) की एक टीम पुलिस के साथ मिलकर गुरुवार को 9, कैमक स्ट्रीट पर लगे एक अनधिकृत होर्डिंग को हटाने पहुंची थी। नगर निकाय ने पुलिस से उस होर्डिंग को हटाने में मदद मांगी थी, जिस पर TMC का साइन या लोगो लगा था। हालांकि, टीम के पहुंचने पर बनर्जी, ओ'ब्रायन, बैसनोर चट्टोपाध्याय और अन्य सहित कई TMC नेताओं ने एक 'गैर-कानूनी भीड़' (unlawful assembly) बनाई और पुलिसकर्मियों तथा KMC अधिकारियों के साथ हाथापाई की, जिससे वे अपना काम नहीं कर पाए। पुलिस ने बताया कि TMC नेताओं के खिलाफ शेक्सपियर सरणी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 191(2), 191(3), 190, 121(1), 74, 3(5) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। इसे भी पढ़ें: BJP अध्यक्ष Nitin Nabin ने की बैठक, 7 राज्यों के चुनाव की तैयारी पर चर्चाTMC ने नगर निकाय और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे "राजनीतिक प्रतिशोध" (political vendetta) करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि सुवेंदु अधिकारी TMC से 'डरे हुए' हैं। अभिषेक ने X पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल में संवैधानिक शासन का लगातार क्षरण हो रहा है और राज्य तेज़ी से 'पुलिस स्टेट' (पुलिस के नियंत्रण वाले राज्य) में बदल रहा है। जब राज्य की शक्ति बिना किसी संवैधानिक रोक-टोक के काम करती है, तो न्यायपालिका ही बचाव की आखिरी उम्मीद होती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मौलिक अधिकारों के हनन के समय न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होता है, तो दांव पर सिर्फ़ व्यक्तियों की आज़ादी नहीं होती, बल्कि लोकतंत्र का अस्तित्व ही दांव पर लग जाता है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 
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