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    चिल्ड्रन विंग निर्माण में देरी पर हाईकोर्ट ने दी चेतावनी:हलफनामे में गलत बयानी पर प्रबंध निदेशक पर हुई कार्रवाई

    13 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के चिल्ड्रन विंग के निर्माण कार्य में देरी को लेकर उत्तर प्रदेश स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रवैये पर गहरी नाराज़गी जताई। कोर्ट ने चेतावनी के लहजे में कहा कि सख्त कार्रवाई होगी। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने कहा कि निगम इस काम को गंभीरता से नहीं ले रहा और केवल मामले को लटका रहा है। याचिका पर हलफनामा डॉ. अरविंद गुप्ता की याचिका की सुनवाई के दौरान निगम के प्रबंध निदेशक की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें दावा किया गया कि काम प्रगति पर है। लेकिन कोर्ट ने पाया कि हलफनामे में प्रबंध निदेशक अपने पिछली सुनवाई के बयान से पलट गए हैं। बताया गया कि 15 अगस्त 2026 तक जो दो लिफ्ट लगाई जानी थीं, वे अब तक नहीं लगीं। मौके पर मौजूद कार्यकारी अभियंता ने कहा कि यह काम ओटिस कंपनी को करना है और इसमें करीब 15 दिन और लगेंगे। न्याय मित्र अधिवक्ता ईशान देव गिरि ने भूतल, प्रथम व द्वितीय तल पर चल रहे निर्माण कार्य की रंगीन तस्वीरें कोर्ट के सामने पेश कीं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि आज दाखिल हलफनामा ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। अधिशासी अभियंता ने कोर्ट से बातचीत में स्वीकार किया कि छत का काम एक-दो दिन में पूरा हो जाएगा और अभी तक केवल इन्वेंट्री मेडिकल कॉलेज को सौंपी गई है। हलफनामा झूठा तो कार्रवाइ तय कोर्ट ने अगली तारीख पर इन तस्वीरों के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हलफनामे में झूठा बयान पाया गया तो प्रबंध निदेशक व मौजूद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुरेश सिंह ने पुलिस आयुक्त, प्रयागराज का पत्र और पूल्ड हाउसिंग आवंटन से जुड़े दस्तावेज़ पेश किए। बताया गया कि डीसीपी यमुना पार को नया आवास आवंटित हो चुका है और वे जल्द शिफ्ट होंगे, जबकि डीसीपी गंगा पार के आवंटित आवास में मरम्मत का काम चल रहा है। बाकी आवासों पर जिला प्रशासन से कोई निर्देश न मिलने की बात कही गई। कोर्ट ने पाया कि स्वास्थ्य विभाग को आवंटित भूमि पर सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए अवैध कब्जे को खाली कराने का पूर्व आदेश अब तक लागू नहीं हुआ है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अपने ही आदेश की अवमानना का ज़िम्मेदार बताया। अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे होगी। कोर्ट ने कहा डीएम मौजूद रहे कोर्ट ने पुलिस आयुक्त व जिलाधिकारी, प्रयागराज को स्वयं उपस्थित रहने और व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी को अगली तारीख तक कब्जाधारी सरकारी आवासों को गाली कराकर मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को सौंपने का आदेश दिया। नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव को परियोजना की डीपीआर की निगरानी कर अगली तारीख तक प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया। जानिये क्या है पूरा मामला स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय के विस्तार की दिशा में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। अस्पताल के लिए लीज पर दी गई जमीन पर बने 22 से अधिक सरकारी आवासों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनमें से 19 आवासों में रह रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। प्रशासनिक, पुलिस, शिक्षा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवंटित इन बंगलों को खाली कराकर अस्पताल विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भी सूची तैयार कर रहा है, जिनका तबादला प्रयागराज से बाहर हो चुका है लेकिन उन्होंने अभी तक सरकारी आवास खाली नहीं किए हैं। 15 अगस्त तक खाली किए जाने थे आवास सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह ने बताया कि न्यायालय द्वारा निर्देशित किया गया जा चुका है कि सभी सरकारी आवंटी 15 अगस्त तक उक्त परिसर खाली कर निजी आवासों में चले जाएंगे। जिलाधिकारी, प्रयागराज द्वारा रिक्ति होने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सरकारी आवास आवंटित किए जाएंगे। दो चरणों की नापजोख में 31 हजार वर्गमीटर से अधिक जमीन चिन्हित एसआरएन अस्पताल की जमीन पर बने बंगलों की दो चरणों में नापजोख कराई गई। पहले चरण में 18,700 वर्गमीटर और दूसरे चरण में 31,314 वर्गमीटर जमीन चिन्हित की गई। इस क्षेत्र में कुल 22 बंगले शामिल हैं, जिन्हें अस्पताल विस्तार योजना के लिए खाली कराया जाना है। हाईकोर्ट की निगरानी में चल रहा अस्पताल विस्तार एसआरएन अस्पताल को एम्स की तर्ज पर विकसित करने की योजना पर हाईकोर्ट लगातार निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में कोर्ट ने अस्पताल परिसर की लीज भूमि पर बने सरकारी आवासों को खाली कराने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने डॉ. अरविंद गुप्ता व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को अधिकारियों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने और अस्पताल विस्तार कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया था। पांच अधिकारियों को आवास आवंटित, 48 घंटे में कब्जा देने का आदेश पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को छह सप्ताह का समय दिया था। हालांकि विस्तृत हलफनामा दाखिल न होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने बताया कि पांच अधिकारियों को नए आवास आवंटित किए जा चुके हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर नए आवासों का कब्जा दिया जाए, ताकि अस्पताल विस्तार का कार्य तत्काल शुरू हो सके। साथ ही डीएम प्रयागराज को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। चिल्ड्रेन विंग में लिफ्ट का काम नहीं रुकेगा सुनवाई के दौरान यूपी स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (UPSIDC) की ओर से लिफ्ट स्थापना के लिए धनराशि जारी न होने की बात कही गई। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चिल्ड्रेन विंग में लिफ्ट लगाने का कार्य किसी भी स्थिति में नहीं रुकना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि भुगतान राज्य सरकार करेगी। इसके साथ ही निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने संबंधित निगम के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
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