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    चित्रकूट में तिलहन उत्पादन पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित:नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर आत्मनिर्भरता और किसान समृद्धि पर मंथन

    3 hours ago

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    चित्रकूट में भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की 16वीं पुण्यतिथि पर दीनदयाल परिसर में एक तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का मुख्य विषय 'तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता से कृषकों की समृद्धि' था। इस गरिमामयी आयोजन में जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष पद्मश्री डॉ. मोहन नागर, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति डॉ. बी. आर. काम्बोज, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला, दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव निखिल मुंडले और जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. टी. आर. शर्मा उपस्थित रहे। कार्यशाला में डॉ. रंजीत सिंह राजपूत, उप निदेशक नई दिल्ली (SFAC), और अनुजा ताई परचुरे, सदस्य प्रबंध समिति दीनदयाल शोध संस्थान, भी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। तकनीकी सत्र में पांच महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। इनमें भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान भरतपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत यादव ने राई-सरसों की वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि तकनीक पर जानकारी दी। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, वारासिवनी, बालाघाट की सहायक प्राध्यापिका डॉ. प्रतिभा बिसेन ने तिलहनी फसलों में जैव सुदृढ़ीकरण (बायो फोर्टिफिकेशन) के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसे पोषण सुरक्षा और किसानों की समृद्धि की दिशा में एक कदम बताया गया। अन्य व्याख्यानों में कृषि विज्ञान केंद्र, जबलपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. के. सिंह ने तिलहनी फसलों में समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन पर, कृषि विज्ञान केंद्र, सिवनी के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह ठाकुर ने तिलहन प्रसंस्करण से ग्रामीण महिलाओं की स्वरोजगार में आत्मनिर्भरता पर, और इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड, सतना के राजेश मौर्य ने तिलहन फसलों में नैनो उर्वरकों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। मंच का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार शर्मा ने किया। इस कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां के पुष्पेंद्र सिंह गुर्जर, डॉ. अजय चौरसिया और इंजीनियर हरेंद्र कुमार भी उपस्थित थे। कार्यशाला में जिले के विभिन्न ग्रामों से कुल 176 कृषकों और महिला कृषकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
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