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    डिजिटल गुरुजी का बढ़ रहा क्रेज:CSJMU के शोध में खुलासा, ICT और कंप्यूटर की समझ रखने वाले शिक्षक क्लास में ज्यादा हिट

    2 hours ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के हालिया शोध में सामने आया है कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का ज्ञान रखने वाले शिक्षक पारंपरिक शिक्षकों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं। शिक्षा प्रशिक्षण विभाग के शोधार्थी कृष्ण कांत ने माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की तकनीकी अभिवृत्ति और कंप्यूटर ज्ञान का उनके शिक्षण कौशल पर प्रभाव का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि तकनीक के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले शिक्षकों की कक्षा नियंत्रण क्षमता और प्रस्तुतीकरण कौशल बेहतर है। ऐसे शिक्षक विषय को प्रभावी ढंग से समझाने के साथ छात्रों से मजबूत जुड़ाव भी स्थापित कर पा रहे हैं। अध्ययन के अनुसार, बदलते शैक्षिक परिवेश में तकनीक अब विकल्प नहीं, बल्कि शिक्षण दक्षता बढ़ाने का अहम माध्यम बन चुकी है। डिजिटल संसाधनों से पढ़ाई हुई आसान अध्ययन में यह पाया गया कि जिन शिक्षकों को कंप्यूटर का पर्याप्त ज्ञान है, वे डिजिटल संसाधनों, ई-कंटेंट और इंटरैक्टिव टूल्स का बेहतरीन इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे शिक्षण प्रक्रिया न केवल दिलचस्प हुई है, बल्कि समय की भी बड़ी बचत हो रही है। शोध के मुताबिक, तकनीक का सहारा लेने से मुश्किल विषयों को भी आसानी से समझाया जा सकता है, जिससे छात्रों के लर्निंग आउटकम यानी सीखने के परिणामों में बड़ा सुधार देखा गया है। यह शोध नई शिक्षा नीति (NEP) के उन उद्देश्यों की भी पुष्टि करता है, जिनमें शिक्षा के डिजिटलीकरण पर जोर दिया गया है। शिक्षकों के लिए नियमित ट्रेनिंग और आत्मविश्वास की दरकार शोधार्थी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर विशेष बल दिया है कि शिक्षकों के लिए नियमित अंतराल पर ICT ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाने चाहिए। इससे न केवल उनकी तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी इजाफा होगा। जब शिक्षक खुद को तकनीक के साथ अपडेट रखेंगे, तभी वे नवाचार यानी नए प्रयोग करने में सक्षम होंगे। हालांकि, डेटा जुटाने के दौरान कई चुनौतियां भी आईं, लेकिन निष्कर्ष भविष्य की राह दिखाने वाले हैं। भविष्य की शिक्षा के लिए मील का पत्थर है यह अध्ययन यूनिवर्सिटी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की डीन डॉ. नमिता तिवारी ने इस शोध की सराहना करते हुए इसे शिक्षा जगत के लिए एक सार्थक योगदान बताया है। उनका मानना है,कि यह शोध न केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक है, बल्कि भविष्य में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी एक सबक है। शोध के सामाजिक प्रभावों को देखें तो यह स्पष्ट है कि तकनीक समर्थित शिक्षा ही आने वाले समय में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने और शिक्षण की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का एकमात्र जरिया है।
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