Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    डेरा ब्यास मुखी ने पंजाब के नेताओं को चौंकाया:पहले मजीठिया को क्लीन चिट, फिर सीक्रेट मीटिंग; अचानक एक्टिव क्यों हुए, चुनाव पर क्या इंपैक्ट पड़ेगा

    4 hours ago

    1

    0

    पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले डेरा ब्यास के मुखी बाबा गुरिंदर ढिल्लों की सक्रियता ने सबको चौंका दिया है। सीनियर अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से नाभा जेल में उनकी मुलाकात की टाइमिंग चर्चित रही। सुबह वह मजीठिया से मिले, बाहर आकर आरोप गलत बताए। दिन चढ़ते ही मजीठिया को जमानत मिल गई। अगले दिन वह रिहा भी हो गए। यह देख AAP सरकार के CM भगवंत मान ने बिना नाम लिए तंज कस दिया। इसके बाद वह अचानक फिरोजपुर में गवर्नर गुलाब चंद कटारिया की पदयात्रा में शामिल हुए। यहां यात्रा से ज्यादा चर्चा उनकी गवर्नर के साथ बंद कमरे में BJP नेताओं की मौजूदगी वाली सीक्रेट मीटिंग रही। कांग्रेसियों ने सीधे तो कुछ नहीं कहा, लेकिन गवर्नर के बहाने उन्हें भी लपेट लिया कि यात्रा में समझौता एक्सप्रेस यानी अकाली-BJP गठबंधन की नींव रखी जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी कहा कि गवर्नर की यात्रा से उन्हें पॉलिटिकल स्मैल आ रही है। साफ है कि कांग्रेस और AAP चुनाव में अकाली दल और BJP के गठजोड़ से खुश नहीं हैं। आखिर डेरा ब्यास मुखी के अचानक एक्टिव होने की वजह क्या? चुनाव में उनकी भूमिका का क्या इंपैक्ट? डेरों को लेकर क्या कर रही पार्टियां? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मजीठिया को क्लीन चिट से AAP का नैरेटिव तोड़ा डेरा ब्यास मुखी बाबा गुरिंदर ढिल्लों ने मजीठिया से जेल में मुलाकात के बाद उनके खिलाफ ड्रग्स के आरोपों को गलत करार दे दिया। इससे सबसे बड़ा झटका AAP को लगा। AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल लगातार इस बात को वोटर्स के मन में डाल रहे थे कि हमने नशे का सबसे बड़ा स्मगलर पकड़ा। जाहिर तौर पर इसे 2027 के चुनाव में भी भुनाया जाना था। मगर, इससे पहले ही डेरा ब्यास मुखी की क्लीन चिट और फिर मजीठिया को जमानत से AAP के दावों पर अब सवाल खड़े होंगे। वैसे भी AAP सरकार ने मजीठिया पर ड्रग्स का नहीं, बल्कि आय से अधिक संपत्ति का केस बनाया था, लेकिन इसे ड्रग मनी से जरूर जोड़ा था। यही वजह है कि डेरा ब्यास का बयान आते ही CM भगवंत मान ने तंज कसते हुए कहा- कल बन जाण, भांवें आज बन जाण, अदालतां दा ओथे रब्ब राखा, जिथे मुलाकाती ही जज बन जाण। यानी जहां जेल में मिलने जाने वाले लोग ही खुद जज बनकर फैसले सुनाने लगें, वहां की अदालतों का भगवान ही मालिक है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि किसी भी धार्मिक गुरु को कानूनी मामलों में क्लीन चिट देने से बचना चाहिए। पदयात्रा से संदेश, पंजाब में नशा खत्म नहीं हुआ नशे के खिलाफ गवर्नर गुलाब चंद कटारिया की पदयात्रा में डेरा प्रमुख की भागीदारी बड़ा सामाजिक-राजनीतिक संदेश है। डेरा ब्यास मुखी के इसमें शामिल होने से उनके श्रद्धालुओं के लिए सीधा संदेश है कि पंजाब में अभी नशा खत्म नहीं हुआ है। AAP सरकार चुनावी वादे के बावजूद 4 साल में नशे को खत्म नहीं कर पाई। AAP सरकार भले ही 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' चलाकर डेली आंकड़े दे रही हो, लेकिन ग्राउंड पर इसका इंपैक्ट नहीं है। हालांकि, अकाली-भाजपा और कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि इसे राजनीति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। कपूरथला से कांग्रेस MLA राणा गुरजीत सिंह कहते हैं कि गवर्नर ने सभी को पद यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। डेरा ब्यास को भी निमंत्रण मिला था। डेरा मुखी के शामिल होने से पॉलिटिकल तौर पर AAP की मुश्किलें ही बढ़ेंगी। अकाली दल के 10 साल से सरकार में न होने के बावजूद पंजाब में नशा खत्म नहीं हुआ। ऐसे में 2022 की तरह यह फिर चुनावी मुद्दा बनेगा। कांग्रेस के लिए भी यह झटका होगा, क्योंकि 2017 से 2022 की सरकार में वह भी नशा खत्म करने के वादे के साथ आए थे। डेरा मुखी के आने और अकाली दल व भाजपा के गठबंधन से श्रद्धालुओं में भी इसे लेकर सांकेतिक संदेश जरूर जा सकता है। चुनाव में डेरा ब्यास इतना अहम क्यों? डेरा ब्यास का पंजाब के माझा-मालवा और दोआबा तीनों इलाकों में प्रभाव है। डेरे से जुड़े अनुयायी माझा और दोआबा की लगभग 35 से 40 सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखते हैं। पंजाब की राजनीति में डेरा अनुयायी सबसे शांत और चुपचाप रहकर काम करने वाले वोट बैंक के तौर पर जाने जाते हैं। हालांकि, डेरा राजनीति से दूर रहता है, लेकिन राजनीति के माहिर इस बात से इनकार नहीं करते कि किसी भी डेरे के प्रमुख एक इशारा भी कर दें तो हार-जीत का अंतर बदल जाता है। पॉलिटिकल इतिहास में यूं तो डेरे ने कभी सीधे तौर पर राजनीति में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन डेरा ब्यास मुखी के अकाली दल और BJP के प्रति दिख रही नजदीकी जरूर उनके श्रद्धालुओं को इन पार्टियों के पक्ष में प्रेरित करेगी। माना जा रहा है कि पिछले 4 सालों में AAP सरकार के कामकाज को लेकर डेरा ब्यास मुखी संतुष्ट नहीं हैं। यही वजह है कि उनकी गतिविधि से पॉलीटिकल समीकरण में हलचल हो रही है। अब जानिए, पंजाब में 12 बड़े डेरे कैसे 70 सीटों पर असरदार पंजाब में एक अनुमान के अनुसार लगभग 9 हजार डेरे हैं। इनमें से 12 डेरे ऐसे हैं जिनके अनुयायी सूबे की 117 में से करीब 70 सीटों पर सीधा प्रभाव रखते हैं। 2027 की जंग में कोई भी पार्टी डेरों को नाराज नहीं करना चाहती। इसके संकेत AAP, BJP, कांग्रेस और अकाली दल दे चुके हैं। PM नरेंद्र मोदी के जालंधर के डेरा सचखंड बल्लां के 1 फरवरी के दौरे से पहले ही AAP सरकार ने गुरु रविदास जी की वाणी पर जालंधर के ही नौगज्जा में रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाने की घोषणा कर दी। सरकार घोषणा तक ही नहीं रुकी, रातों-रात नौगज्जा में जमीन खरीदकर रिसर्च सेंटर की नींव भी रख दी। हालांकि, नरेंद्र मोदी आजाद भारत के इतिहास में पहले PM बने, जो रविदासिया समाज के सबसे बड़े डेरे सचखंड बल्लां में आए। उन्होंने डेरा मुखी संत निरंजन दास जी के पैर भी छुए। नवांशहर के धार्मिक स्थल राजा नाभ कमल की नाराजगी के बाद AAP सरकार ने बैकफुट पर आते हुए तुरंत फाइनेंस मिनिस्टर को भेजकर चोरी हुए स्वरूपों को लेकर स्पष्टीकरण दिया था। इससे पहले CM खुद नंगे पांव श्री अकाल तख्त के सेक्रेटेरिएट में पेश हुए थे। पीएम मोदी भी डेरा राधास्वामी ब्यास बाबा गुरिंदर ढिल्लों से अचानक मिलने पहुंच चुके हैं। 3 डेरों का सबसे ज्यादा प्रभाव राजनीतिक माहिर मानते हैं कि पंजाब में 3 बड़े डेरों का ज्यादा प्रभाव है। इनमें डेरा ब्यास अमृतसर, बाबा बकाला, मजीठा, जंडियाला और टांडा जैसी 35+ सीटों पर असर डालता है। डेरा सचखंड बल्लां दोआबा की जालंधर वेस्ट, आदमपुर, करतारपुर, फिल्लौर और फगवाड़ा जैसी 19 सीटों पर रविदासिया वोट बैंक से प्रभाव डालता है। सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मालवा की बठिंडा, मानसा, संगरूर और पटियाला जैसे जिलों की 30 सीटों पर प्रभाव रखता है। डेरा राज नाभ कमल का असर भी नवांशहर, बंगा, रोपड़ जैसी सीटों पर देखा जाता है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    हरियाणवी आर्केस्ट्रा डांसर के मर्डर में खुलासा:सिरसा में पहले संबंध बनाए, छाती पर बैठकर बॉयफ्रेंड ने गला दबाया; बचने के लिए नाखून मारे
    Next Article
    भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ आज पंजाब बंद:AAP और कांग्रेस ने समर्थन दिया; PSPCL की चेतावनी- हड़ताल करने वाले कर्मियों को बर्खास्त करेंगे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment