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    Delhi Voter List विवाद: SIR प्रक्रिया पर Arvind Kejriwal का तीखा हमला, कहा- चुनाव आयोग ऐसे तो आबादी घटा देगा

    3 hours from now

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    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए, क्योंकि दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47 लाख से ज़्यादा वोटरों के नाम गायब थे। ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि लगभग 1.5 करोड़ वोटरों में से 47 लाख नाम लिस्ट में नहीं हैं। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को आबादी बढ़ने की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि SIR प्रक्रिया देश की आबादी को 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर सकती है। केजरीवाल का यह बयान दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) के सामने आने के बाद आया है, जिसमें पता चला कि 1,45,10,299 रजिस्टर्ड वोटरों में से 47,56,722 वोटर लिस्ट में शामिल नहीं थे। इस ड्राफ्ट लिस्ट में दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों के कुल 97,53,577 वोटर शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: MOTN Survey: PM की रेस में Abhijeet Dipke ने Arvind Kejriwal को पछाड़ा, बढ़ी CJP की ताकतSIR प्रक्रिया के तहत, जिसमें घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किया गया, दिल्ली के लगभग 67.18 प्रतिशत वोटरों के लिए एन्यूमरेशन फ़ॉर्म (जानकारी जुटाने वाले फ़ॉर्म) मिले और उन्हें डिजिटाइज़ किया गया। यह प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई और 17 अगस्त को खत्म हुई। चुनाव आयोग ने बाकी बचे वोटरों को ASDDO कैटेगरी में "अनकलेक्टेबल" (जिनका पता न चल सके) माना है। इस कैटेगरी में वे वोटर आते हैं जिन्हें अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके, मृत, डुप्लीकेट या दूसरी कैटेगरी में रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR (स्पेशल समरी रिविजन) किया गया है, उनमें दिल्ली में नाम हटाने का प्रतिशत सबसे ज़्यादा रहा है; यहाँ ड्राफ्ट स्टेज पर ही लगभग 33 प्रतिशत वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। अगर कुल संख्या की बात करें, तो 47 लाख से ज़्यादा नाम हटाना भी सबसे ज़्यादा मामलों में से एक है।इसे भी पढ़ें: तिहाड़ जेल में ऐसा क्या हुआ कि बदल गए केजरीवाल-सिसोदिया?चुनाव अधिकारी ने नामों के बड़ी संख्या में हटाए जाने की एक वजह दिल्ली की बड़ी 'फ्लोटिंग आबादी' (आने-जाने वाली आबादी) को बताया; हो सकता है कि इसी वजह से वेरिफिकेशन के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों को 'शिफ्टेड' (दूसरी जगह चले गए) या 'अनअवेलेबल' (मौजूद नहीं) मार्क किया गया हो। दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटाइज़ेशन का स्तर अलग-अलग था। रोहिणी में यह दर सबसे ज़्यादा 83.43 प्रतिशत रही, जबकि तुगलकाबाद में सबसे कम 52.15 प्रतिशत थी।जिन वोटरों के एन्यूमरेशन फ़ॉर्म इस प्रक्रिया के दौरान नहीं मिल पाए थे, वे अब भी वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। वे 30 सितंबर तक ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ फ़ॉर्म 6 भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं।
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