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    मोदी ने मुस्लिम देश में लहराई ये भगवा किताब, अंदर क्या निकला?

    3 hours from now

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    सेंट्रल एशियाई देश उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक सबके सामने भगवा किताब उठाई और बड़ा खेल कर दिया। जानकारी के मुताबिक यह भगवा किताब उज़्बेकिस्तान ने ही पीएम मोदी के सामने रखी थी। कई लोग तो इस फाइल का रंग देखकर ही बेचैन हो गए। आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर हैं। किर्गिस्तान में एसईओ समिट शुरू हो चुका है। इस समिट में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। लेकिन किर्गिस्तान में हो रहे एसइओ समिट में आने से पहले पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में एक जबरदस्त डील कर आए। पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति मिर्व के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पीएम मोदी ने इस भगवा किताब को उठाया। पीएम मोदी ने उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति से कहा कि मैंने यह आपकी बुक देखी। इसमें आपने उज़्बेकिस्तान और भारत के रिश्तों को लेकर जो कहा है वह शानदार है। मगर इसी बुक में एक ऐसी बात कही गई है जिसे सुनकर भारत के दुश्मन देश बौखला जाएंगे। इसे भी पढ़ें: भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर सहमति, यूरेनियम आपूर्ति की बनेगी व्यवस्थादरअसल भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच दुनिया के सबसे कीमती पदार्थ यानी यूरेनियम को लेकर एक बहुत बड़ी डील साइन हुई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह एक लॉन्ग टर्म डील है। यानी यह डील आने वाले कई सालों तक चलेगी। उज्बेकिस्तान अब कई सालों तक लगातार भारत को परमाणु ऊर्जा के लिए जरूरी यूरेनियम सप्लाई करेगा। पूरे देश को याद होगा कि यह वही ताशकंद है जहां एक समय पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री रहस्यपूर्ण तरीके से मारे गए थे। यह माना जाता है कि उस समय कई ऐसी शक्तियां थी, जो भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं बनने देना चाहती थी। इसी की शुरुआत लाल बहादुर शास्त्री जी ने की थी। लेकिन आज करीब 60 वर्ष बाद उसी ताशकंद में बैठकर पीएम मोदी ने परमाणु ऊर्जा को लेकर ऐतिहासिक डील साइन कर ली है।इसे भी पढ़ें: उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से नवाजे गए पीएम मोदी, भाजपा ने बताया गर्व का क्षणआपको बता दें कि भारत को अपने न्यूक्लियर विस्तार के लिए जरूरी यूरेनियम चाहिए क्योंकि भारत 2047 तक 100 गीगावाट की न्यूक्लियर क्षमता हासिल करना चाहता है। लेकिन देश में होने वाला यूरेनियम उत्पाद भारत की मौजूदा जरूरत का सिर्फ 30% हिस्सा ही पूरा करता है। ऐसे में भारत को एक भरोसेमंद विदेशी यूरेनियम सप्लायर की जरूरत थी और अब उज़्बेकिस्तान ने भारत के साथ डील कर ली है। आपको बता दें कि सेंट्रल एशियाई देश उज़्बेकिस्तान और कजाकिस्तान यूरेनियम के भंडार पर बैठे हैं। कजाकिस्तान तो दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम प्रोड्यूसर है। कुछ महीनों पहले भारत ने कजाकिस्तान के साथ यूरेनियम डील कर ली थी। लेकिन भारत को उज़्बेकिस्तान की भी जरूरत थी।
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