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    एथनॉल बनने से ₹65 पहुंची चीनी, त्योहारी मिठास हुई फीकी:पेट्रोल में ​गन्ने का इस्तेमाल बढ़ने से उछले दाम; व्यापारी बोले- ₹70 के पार पहुंचेगी

    1 hour ago

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    देशभर में चीनी के दामों में अचानक आए बेतहाशा उछाल ने आम जनता और व्यापारियों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार का दावा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। महज कुछ ही दिनों में फुटकर बाजार में 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। त्योहारों के सीजन में बढ़ी इन कीमतों से रसोई का बजट बिगड़ गया है। गन्ने से एथनॉल उत्पादन बना महंगाई की मुख्य वजह बाजार के व्यापारियों के अनुसार, चीनी के दाम बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण गन्ने से एथनॉल का बड़े पैमाने पर उत्पादन है। थोक और फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति के चलते गन्ने की एक बड़ी खेप एथनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रही है। सप्लाई चेन में बदलाव और निर्यात नीति के कारण मिलों से चीनी की आवक प्रभावित हुई है, जिससे थोक भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं और आगे कीमतें 70 रुपये प्रति किलो तक जाने की आशंका जताई जा रही है। त्योहारी सीजन में बिक्री घटकर हुई आधी श्यामगंज मार्केट के व्यापारी नरेंद्र और संजय आहूजा ने बताया कि दामों में बढ़ोतरी का सीधा असर ग्राहकों की खरीद क्षमता पर पड़ा है। बारावफात, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे प्रमुख त्योहार होने के बावजूद दुकानों पर पहले जैसी रौनक नहीं है। दुकानों पर चीनी खरीदने पहुंचे ग्राहक वरुण कुमार प्रजापति ने बताया कि जरूरतें तो वही हैं लेकिन महंगाई के चलते जो परिवार पहले 5 किलो चीनी ले जाते थे, वे अब 1 से 2 किलो में ही काम चला रहे हैं। बिक्री आधी रह जाने के कारण व्यापारी भी नुकसान के डर से अतिरिक्त स्टॉक रखने से बच रहे हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रशासन सख्त चीनी की बढ़ती कीमतों और कृत्रिम कमी की आशंका को देखते हुए डीएम अविनाश सिंह ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर रखा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के मौके पर किसी भी सूरत में कालाबाजारी और मुनाफाखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। थोक और फुटकर विक्रेताओं के स्टॉक पर नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि तय दरों से अधिक वसूली करने वालों पर सख्त विधिक कार्रवाई की जा सके।
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