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    गाजियाबाद के हरीश इच्छामृत्यु के लिए दिल्ली एम्स शिफ्ट:घर से आखिरी विदाई, ब्रह्मकुमारी ने टीका लगाया, कहा- सबको माफ करते जाओ

    6 hours ago

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    ‘सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ...ठीक है…’ यह बातें ब्रह्मकुमारी लवली ने उस हरीश राणा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी है। ब्रह्मकुमारी और परिवार के लोगों ने गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन स्थित घर से हरीश को विदाई दी। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। ब्रह्मकुमारी ने हरीश के माथे पर चंदन का टीका भी लगाया। इसके बाद हरीश अपने अंतिम सफर पर निकल पड़े। इस दौरान हरीश के परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गईं। पिता अशोक ने परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगी। बोले- न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ा है। हरीश 13 साल से कोमा में हैं। उन्हें इच्छामृत्यु के लिए शनिवार को दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया है। परिवार ने घर से एम्स तक शिफ्टिंग की पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा। पड़ोसी और सोसायटी में रहने वालों को भनक तक नहीं लगी। एक करीबी ने बताया, प्राइवेट गाड़ी से परिवार के लोग हरीश को ले गए। अब सुप्रीम कोर्ट फैसले के तहत सम्मानजनक तरीके से एम्स हरीश राणा के जीवन के अंत की व्यवस्था करेगा। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से धीरे-धीरे अलग किया जाएगा। वीडियो में क्या है? सोशल मीडिया पर एक 22 सेकेंड का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें बेड पर पड़े हरीश राणा को एक महिला चंदन का टीका लगाती हैं। वह बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ सहलाते हुए कहती हैं, 'सबको माफ करते हुए... सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ'। मां, बहन और भाई भावुक होकर रोने लगे हरीश राणा को जब गाजियाबाद स्थित फ्लैट से एम्स ले जाया गया तो उस समय हरीश की मां, छोटा भाई और बहन भावुक हो गए। मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा ने कहा, हम सबसे माफी मांगते हैं, ऊपरवाले ने यह सब हमें देखने के लिए दिया। हम यही चाहते हैं कि हमारा बेटा जहां भी रहे, जिस परलोक में रहे, हमेशा हम उसे भूल नहीं पाएंगे। पिता ने कहा- हमारे करीबियों, रिश्तेदारों, डॉक्टरों, कोर्ट में हमारी पैरवी करने वाले वकीलों और सभी ने हमारा बहुत सहयोग किया। हम सभी के इस सहयोग के आभारी रहेंगे। ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ा राणा परिवार ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़े राणा परिवार ने अपना दर्द बहन लवली से साझा किया तो उन्होंने एक वकील भेजा। राणा कहते हैं, 'हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज कर दी थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया। हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जाती, बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है। हमारा तो बच्चा है, सेवा कर रहे हैं और जब तक सामर्थ्य है करते ही रहेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद एम्स ने सभी तैयारी कर ली है। बस हमें तय करना है कि उसे आखिरी बार इस बिस्तर से उठाकर कब एम्स ले चलें। हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे है। हम उसे ऐसे अनुभवी डॉक्टरों के पास छोड़ रहे हैं जो उसे घातक इंजेक्शन नहीं देंगे। बल्कि प्राकृतिक रूप से जीवन छोड़ने का रास्ता सुगम करेंगे। एम्स में अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में सिर्फ फूड पाइप हटाएंगे। हम उसे पानी पिलाते रहेंगे, जैसे कोई व्रत करता है। जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत सम्मान से घर लाएंगे और उसे अंतिम विदाई देंगे। मां के नहीं सूख रहे आंसू, बोलीं- मेरे बेटे ने कभी अपनी पीड़ा नहीं बताई हरीश की मां के चेहरे पर सन्नाटा है। एकदम भाव शून्य चेहरा। कुछ बोलते ही फफक पड़ती हैं... कहती हैं- कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा। जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल करनी पड़ी तो उसमें मां को कष्ट कैसा। दुख तो बस इस बात का रहा कि इसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक बस इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपके, ताकि मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसी से उसके जिंदा होने का सुकून होता था। हरीश इस हाल में कैसे पहुंचे, वजह जानिए… दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे थे। साल 2013 में आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। हादसे के बाद उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। तब से न वह बोल पा रहे हैं और न ही किसी चीज को महसूस कर पा रहे हैं। डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया है। इस स्थिति में मरीज पूरी तरह फीडिंग ट्यूब (खाने-पीने की नली) और वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसमें ठीक होने की संभावना लगभग नहीं होती। पिछले 13 साल से लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव भी हो गए हैं। समय के साथ उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। ------ यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी:13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। पूरी खबर पढ़ें
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