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    गोरखपुर में सावन के दूसरे सोमवार पर उमड़े भक्त:महिला बोली- मेरी हर मुराद पूरी हुई, भोर की आरती के बाद शुरू हुआ जलाभिषेक

    3 hours ago

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    गोरखपुर में सावन के दूसरे सोमवार को भगवान शिव के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भोर से ही शहर के प्रमुख शिवालयों पर भक्तों का आना शुरू हो गया। दूसरे सोमवार पर मुक्तेश्वरनाथ मंदिर, महादेव झारखंडी मंदिर, मानसरोवर मंदिर, मुंजेश्वरनाथ मंदिर व अन्य स्थानों पर लंबी लंबी लाइन देखने को मिली। मंदिर परिसर पूरे दिन "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयकारों से गूंजता रहा। इस दौरान परिवार के लोग पहुंचकर अपने बच्चों के लिए मन्नत मांगे। पति के साथ दर्शन करने पहुंची नैंसी ने बताया की मैं 9 साल से इस मंदिर में आ रही थी बाबा से मांगे गई हर मुराद मेरी पूरी हुई है आज सावन का दूसरा सोमवार है। बाबा का दर्शन बहुत अच्छे से मिला। मैने भगवान से अपने परिवार, पति और बच्चों के सुख समृद्धि के लिए मन्नत मांगी है। सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है। महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए भगवान शिव का जलाभिषेक किया। वहीं युवाओं ने बेहतर भविष्य, सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल और फल अर्पित कर विधि-विधान से अभिषेक किया। मंदिर में पूरे दिन भक्ति का माहौल बना रहा और शिव भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए उत्साह के साथ पहुंचते रहे। मंदिर प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम मुक्तेश्वरनाथ मंदिर के महंत रामानंद उपाध्याय ने बताया कि सावन का सोमावर शिवभक्तों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। मंदिर प्रशासन ने दर्शन की व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए विशेष प्रबंध किए थे। उनका कहना है कि सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने वालों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। मंदिर परिसर में राजघाट थाने की पुलिस के द्वारा अस्थायी चौकी का निर्माण किया गया। इसके अलावा मंदिर प्रांगड़ में बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन मिल सकें। सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। गोरखपुर के प्रमुख शिवालय और उनसे जुड़ी मान्यताएं मुक्तेश्वरनाथ मंदिर: जहां शेरों से बचाए भगवान शिव गोरखपुर शहर में राप्ती नदी के किनारे बसा मुक्तेश्वरनाथ मंदिर करीब 400 साल पुराना है। ऐसा कहा जाता है कि बांसी के राजा एक बार शिकार के लिए यहां आए थे। तभी अचानक शेरों ने उन्हें घेर लिया। जान बचाने के लिए राजा ने भगवान शिव से प्रार्थना की, और चमत्कार हुआ-शेर वहां से चले गए। इस अनुभव से भावुक होकर राजा ने वहां शिव मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। राजा के आदेश पर महाराष्ट्र से आए बाबा काशीनाथ ने मंदिर की स्थापना कराई। मंदिर के पास ही "मुक्तिधाम" नाम की जगह है, इसी कारण इस मंदिर का नाम मुक्तेश्वरनाथ पड़ा। सावन और शिवरात्रि के मौके पर यहां बड़ी संख्या में शिव भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं। महादेव झारखंडी मंदिरः एक सपना, और फिर प्रकट हुआ शिवलिंग गोरखपुर का महादेव झारखंडी मंदिर भी काफी पुराना और प्रसिद्ध है। सावन के पहले दिन यहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, इस मंदिर की मान्यताएँ है यहाँ की गई सभी मुरादें भगवान शिव पुरी कर देते हैं। यहां पहले घना जंगल हुआ करता था। एक दिन जमींदार गब्बू दास को सपने में भगवान शिव ने दर्शन दिए और बताया कि उनकी जमीन में एक खास जगह पर शिवलिंग छिपा है। जब खोदाई की गई, तो सच में वहां से शिवलिंग निकला। इसके बाद वहां मंदिर बनवाया गया। आज भी यहां नियमित पूजा-अर्चना होती है। लोगों की मान्यता है कि यहां जलाभिषेक करने से दुख और परेशानियों से छुटकारा मिलता है। शिवरात्रि के दिन यहां भव्य मेला भी लगता है। मानसरोवर मंदिरः राजा मानसिंह के सपने से शुरू हुई भक्ति की गाथा मानसरोवर मंदिर का इतिहास भी बहुत दिलचस्प है। कहा जाता है कि राजा मानसिंह को एक रात सपने में भगवान शिव ने दर्शन दिए और जंगल के बीच एक मंदिर बनाने का आदेश दिया। राजा ने उसी स्थान पर मंदिर और एक बड़ा तालाब (पोखरा) भी बनवाया। इस मंदिर का गहरा संबंध गोरक्षपीठ से है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे नया और सुंदर रूप दिया है। विजयादशमी के दिन गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर यहीं से विजय जुलूस की शुरुआत करते हैं और भगवान राम का तिलक भी यहीं से किया जाता है। मुंजेश्वरनाथ मंदिर: जहां दूध की धारा बह निकली थी गोरखपुर जिले के भौवापार गांव में स्थित मुंजेश्वरनाथ मंदिर भी भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है। माना जाता है कि यहां कभी सतासी नरेश की राजधानी थी। एक बार मजदूर झाड़ियों की सफाई कर रहे थे, तभी उनकी कुदाल एक पत्थर से टकराई और वहां से दूध की धारा बह निकली। यह देख मजदूर घबरा गए और राजा को सूचना दी। राजा ने खुद वहां आकर खुदाई करवाई, तो वहां शिवलिंग निकला। रात को भगवान शिव ने राजा को सपने में दर्शन देकर वहां मंदिर बनवाने को कहा। झाड़ियों (जिसे मूंज कहते हैं) से शिवलिंग निकलने की वजह से इसका नाम पड़ा मुंजेश्वरनाथ मंदिर। सावन में ऐसे करें भगवान शिव की पूजा सावन के महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और फल अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। श्रद्धा और शांत मन से की गई पूजा को भगवान शिव विशेष रूप से स्वीकार करते हैं। इन बातों का रखें ध्यान
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