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    गैस सिलेंडर का ईद की सेवई पर असर:कानपुर में 2 दिन काम बंद होने से ऑर्डर रुके, दाम बढ़े; ग्राहक कम खरीद रहे

    1 hour ago

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    कानपुर में ईद की तैयारियों के बीच सेवई के कारोबार पर गैस की किल्लत का असर दिखाई देने लगा है। बाजार में सेवई की कमी हो गई है। कामर्शियल सिलेंडर न मिलने की वजह से दो से तीन दिन तक कई कारखानों में काम बंद रहा, जिससे ईद के लिए होने वाली सप्लाई प्रभावित हो गई। इसका असर कीमतों पर भी पड़ा और सेवई के रेट में बढ़ोतरी हो गई। दो से चार दिन काम बंद रहा, रेट बढ़े सेवई बनाने के 3 बड़े कारखाने हैं, जहां से आसपास के जिलों में ईद के मौके पर सप्लाई की जाती है। इसके अलावा शहर की लोकल मार्केट जैसे तलाक महल, बेकनगंज, चमनगंज और बाबूपुरवा समेत साउथ सिटी के इलाकों में भी सेवई की सप्लाई होती है। ईद के समय शहर में सूतफेनी का काम भी काफी होता है। कई दुकानदार अपनी दुकानों पर ही इसे तैयार करते हैं। लेकिन जैसे ही गैस की किल्लत शुरू हुई और कामर्शियल सिलेंडर मिलना बंद हुए तो छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े कारखानों तक सभी की तैयारियां प्रभावित हो गईं। ऐसे में लोगों ने भट्ठी और लकड़ी का इंतजाम किया, लेकिन इसमें दो दिन का समय लग गया। इस वजह से पहले से मिले कई ऑर्डर पूरे नहीं हो सके। वहीं गैस बंद होने के बाद लकड़ी और कोयले की कीमतों में भी करीब 15 रुपए किलो का इजाफा हो गया। इसका असर सेवई के रेट पर भी पड़ा और थोक बाजार में कीमत करीब 20 रुपए किलो तक बढ़ गई। बाजार में हुई कमी चमनगंज में सेवई का कारखाना चलाने वाले हाफिज अब्दुल सत्तार एंड संस के मालिक सरताज अहमद ने बताया- गैस की किल्लत शुरू होते ही प्रोडक्शन पर बड़ा असर पड़ा। काम दो दिन तक बंद रहा, क्योंकि गैस का विकल्प तैयार करने में समय लगा। ईद का समय होने की वजह से जितना स्टॉक था, उसी से काम चलाया गया। इसके कारण बाजार में सेवई की कमी हो गई। हमारे यहां बनारसी सेवई बनती है, जो यूपी के कई जिलों में सप्लाई होती है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक सेवई और देशी सेवई भी बनाई जाती है। इन सभी पर होलसेल रेट में असर पड़ा है। सूतफेनी थोक सप्लाई बंद कर दी केवल फुटकर बेचना शुरू किया तलाक महल इलाके में सूतफेनी का काम करने वाले सुमित गुप्ता ने बताया- हमारी चौथी पीढ़ी इस काम से जुड़ी है। गैस की किल्लत के कारण चार दिन तक काम बंद रहा। इसके बाद रातभर में खुद भट्ठी बनाकर काम शुरू किया गया, क्योंकि गैस खरीद पाना मुश्किल हो गया था। उन्होंने बताया कि कामर्शियल सिलेंडर 4 से 5 हजार रुपए तक में मिल रहा है, जो खरीद पाना संभव नहीं है। वहीं लकड़ी और कोयला भी महंगा हो गया है। पहले लकड़ी 900 रुपए कुंतल थी, जो अब 1400 रुपए कुंतल हो गई है। हालांकि उन्होंने सूतफेनी का रेट नहीं बढ़ाया है, लेकिन थोक का काम बंद कर सिर्फ फुटकर बिक्री कर रहे हैं। 4 किलो लेनी थी, केवल 2 किलो ली बाजार में खरीदारी करने आए ग्राहक जावेद ने बताया कि पहले सूतफेनी 120 रुपए किलो मिल जाती थी, लेकिन अब यह 160 से 170 रुपए किलो तक मिल रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें चार किलो खरीदनी थी, लेकिन बढ़े दाम की वजह से सिर्फ दो किलो ही खरीद पाए।
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