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    हकीम अजमल खान जयंती पर नेशनल यूनानी डे:देवरिया में यूनानी चिकित्सा के महत्व पर हुई चर्चा

    21 hours ago

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    देवरिया में महान यूनानी चिकित्सक, समाजसेवी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हकीम अजमल खान की जयंती पर नेशनल यूनानी डे मनाया गया। इस अवसर पर यूनानी चिकित्सा पद्धति के महत्व, इतिहास और आधुनिक उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा हुई। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जय राम यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. यादव ने बताया कि हकीम अजमल खान ने भारत में यूनानी चिकित्सा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसी कारण भारत सरकार ने उनके जन्मदिन को प्रतिवर्ष "नेशनल यूनानी दिवस" के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम में वर्ष 2026 के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा स्वीकृत थीम "यूनानी पद्धति में नवाचार और साक्ष्य" पर विशेष चर्चा की गई। डिप्टी सीएमओ डॉ. अश्वनी पांडे ने यूनानी चिकित्सा को प्राचीन, पारंपरिक और प्रभावी पद्धति बताते हुए चिकित्सकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पद्धति आज भी लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। डॉ. जफर अनीस ने जानकारी दी कि यूनानी चिकित्सा विश्व की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है, जिसकी शुरुआत हकीम बुकरात (हिपोक्रेट्स) ने की थी, जिन्हें "फादर ऑफ मेडिसिन" कहा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि हकीम अजमल खान जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापकों में से थे और उन्होंने चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान को नई दिशा प्रदान की। डॉ. एस.बी. मणि त्रिपाठी ने यूनानी पद्धति को पुरानी और जटिल बीमारियों के उपचार में सहायक बताया। वहीं, डॉ. इरशाद खान ने कहा कि भारत में यूनानी चिकित्सा को आधुनिक स्वरूप देने का श्रेय हकीम अजमल खान को ही जाता है। चिकित्सकों ने यूनानी चिकित्सा की ह्यूमरल थ्योरी—दम, बलगम, सफ़रा और सौदा—तथा "उमूर-ए-तबीय्या" सिद्धांत पर प्रकाश डाला। उपचार की प्रमुख विधियों में इलाज बिल गीज़ा, इलाज बिल तदबीर, इलाज बिल दवा और इलाज बिल यद को प्रभावी बताया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अनेक चिकित्सकों ने यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार तथा शोध को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। अंत में डॉ. जफर अनीस ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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