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    हमसे न हो पाएगा, तालिबान से निपटने में लगे हैं, आप अपना खुद देख लो...मुनीर ने सऊदी-पाक के NATO वाले समझौते से झाड़ लिया पल्ला?

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    ऑपरेशन सिंदूर के 132 दिन बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 17 सितंबर 2025 को एक डिफेंस डील साइन की थी। डिफेंस अग्रीमेंट ये भी कहता है कि अगर एक देश पर हमला हुआ तो दूसरा देश उसे खुद पर भी हमला मानेगा। उसी दिन समझ आ गया था कि इस पूरे खेल में एक अनकहा नाम ईरान भी शामिल है। इस समझौते के साथ रावलपिंडी-इस्लामाबाद की सत्ता मिडिल ईस्ट की जटिल भूलभुलैया में फंस गई, जिसकी कीमत अब 400 अफगानों की जान देकर चुकानी पड़ी, जबकि शुरू से साफ था कि सऊदी अरब पाकिस्तान की किसी भी जंग में सीधे नहीं कूदेगा, बल्कि उसकी असली दिलचस्पी पाकिस्तानी सेना  एक तरह की किराए की ताकत और उसके परमाणु सुरक्षा कवच में है और अरबों डॉलर के कर्ज के सहारे अब वही पाकिस्तान की शर्तें भी तय कर रहा है। 17 सितंबर, 2025 को पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते की सटीक शर्तें कभी सार्वजनिक नहीं की गईं, लेकिन व्यापक रूप से कहें तो, एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। परमाणु हथियार रखने वाला एकमात्र इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान, आवश्यकता पड़ने पर सऊदी अरब के लिए अपने हथियारों का इस्तेमाल करेगा। लेकिन इजरायल अमेरिका और ईरान युद्ध में तेहरान की तरफ से लगातार खाड़ी देशों को निशाना बनाया जा रहा है। सऊदी भी इसकी चपेट में आया, लेकिन इस पूरे परिदृश्य से उसे सुरक्षा कवच का वादा देने वाला पाकिस्तान अदृश्य नजर आ रहा है। इसे भी पढ़ें: Kabul Attack पर भड़का भारत, Pakistan के 'बर्बर और कायरतापूर्ण' कृत्य की कड़ी निंदातालिबान के बहाने पाकिस्तान ने झाड़ा पल्लाघरेलू स्तर पर, इसका इस्तेमाल एक बात साबित करने के लिए किया जा सकता था। पाकिस्तान एक ऐसे देश को अपने परमाणु हथियारों की सुरक्षा का आश्वासन दे रहा था जहाँ इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थल - मक्का और मदीना स्थित हैं। हालाँकि, इस सुरक्षा गारंटी ने पाकिस्तान को मध्य पूर्व के परिदृश्य में ला खड़ा किया। सुन्नी बहुल सऊदी अरब, ईरान का कट्टर प्रतिद्वंद्वी है, जो इस क्षेत्र में शिया ताकतों का गढ़ है। दक्षिण एशिया की विशेषज्ञ इतालवी पत्रकार फ्रांसेस्का मारिनो ने 16 मार्च को एक्स पर लिखा कि सूत्रों के हवाले से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मोहम्मद बिन सलमान को बताया है कि पाकिस्तानी सेनाएँ अफ़गानिस्तान क्षेत्र में भारी व्यस्तता से जूझ रही हैं, इसलिए उनके पास सऊदी अरब को संसाधन भेजने के लिए समय नहीं है। इन्हीं सूत्रों का यह भी कहना है कि एमबीएस को पाकिस्तान की उन चालाक योजनाओं का आभास हो गया है, जिनके तहत वह अफ़गानिस्तान के साथ अपनी सीमा को सक्रिय करके वहाँ रक्षा संसाधन भेजने से बचना चाहता है।मैरिनो ने कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस ने "वास्तव में आसिम मुनीर और शहजाद शरीफ को दो-तीन बार फोन करके इस संबंध में अपनी निराशा व्यक्त की थी। 28 फरवरी को, जिस दिन ईरान पर हमला हुआ और उसने जवाबी हमला किया, उसी दिन सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बात की।इसे भी पढ़ें: Pakistan की खैबर पख्तूनख्वा में बड़ी कार्रवाई! लक्की मरवत में मुठभेड़ के दौरान 6 आतंकवादी ढेरपाकिस्तान हमेशा गोल-मोल जवाब देकर बचता रहा हैईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस, जहां अमेरिका का सैन्य अड्डा है, रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास, तेल क्षेत्रों और ऊर्जा अवसंरचना पर हमला किया। 7 मार्च को सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने रियाद में पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख सैयद आसिम मुनीर से मुलाकात की। 12 मार्च को शरीफ और मुनीर ने जेद्दा में बिन सलमान से मुलाकात की। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के मद्देनजर हुई इस बैठक में शरीफ ने रियाद को "पूर्ण एकजुटता और समर्थन" देने का आश्वासन दिया। स्थिति बेहद गंभीर थी। सऊदी अरब को आश्वासन और अन्य सहायता की आवश्यकता थी। सलमान-शरीफ की मुलाकात के बाद सऊदी अरब में पाकिस्तान के राजदूत अहमद फारूक ने अरब न्यूज को बताया, पाकिस्तान की विदेश नीति में हमेशा से यह सैद्धांतिक रुख रहा है। जब भी सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में होगी, पाकिस्तान हमेशा उसकी सहायता के लिए आगे आएगा। फारूक से जब पूछा गया कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब में सेना या रक्षा उपकरण तैनात करेगा, तो उन्होंने कहा कि ये मूल रूप से तकनीकी चर्चाएं हैं, जो दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच होती हैं।एसएमडीए को लेकर पाक से नाराज एमबीएस ये बैठकें और पाकिस्तान द्वारा सैनिकों और हथियारों की तैनाती का सवाल ईरान द्वारा सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोन से किए गए हमलों की पृष्ठभूमि में सामने आए। यह वह समय है जब रियाद को मुनीर और शरीफ से कथनी और करनी में समानता की उम्मीद है। लेकिन ऐसा करने से दोनों के लिए घरेलू स्तर पर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। जर्मनी में अफगानिस्तान के पूर्व राजदूत हमाद सिदिग ने 15 मार्च को एक्स पर लिखा शाहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर दोनों को सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस ने कई बार तलब किया है और पाकिस्तान से सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते (एसएमडीए) का पालन करने का अनुरोध किया है... सऊदी क्राउन प्रिंस एसएमडीए का बार-बार पालन न करने से बेहद नाराज़ हैं। रमजान के पवित्र महीने के दौरान ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों, शियाओं के आध्यात्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, शीर्ष ईरानी नेताओं और 160 से अधिक स्कूली छात्राओं की हत्या ने इस्लामी देशों में शिया-सुन्नी विभाजन को और गहरा कर दिया है। हालांकि राजनीतिक नेता वास्तविक राजनीति में लिप्त हो सकते हैं, लेकिन जनता ने यह मान लिया है कि एक शीर्ष इस्लामी नेता की हत्या अमेरिका और इजरायल द्वारा की गई है।सऊदी-पाकिस्तान पर NATO की तरह समझौतासऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ डिफेंस अग्रीमेंट ये भी कहता है कि अगर एक देश पर हमला हुआ तो दूसरा देश उसे खुद पर भी हमला मानेगा। कुछ वैसा ही समझौता जैसा नाटो के सदस्य देशों के बीच है। भले कहा जा रहा है कि ये समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे ऐतिहासिक रिश्तों का परिणाम है। पाक और सऊदी अरब का कहना है कि पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच इस सैन्य करार के बारे में गहन विमर्श चल रहा था। अब डील को फाइनल किया गया है। पाक और सऊदी अरब का कहना है कि ये करार किसी भी तीसरे देश को मद्देनजर रखते हुए नहीं किया गया है।
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