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    हरदोई के फर्दापुर ब्रह्मदेव आश्रम में एक माह भंडारा:114 साल पुराने आश्रम में हिंदू-मुस्लिम समाज की जुड़ी श्रद्धा

    12 hours ago

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    हरदोई शहर से लगभग 8 किलोमीटर दूर बिलग्राम रोड पर स्थित फर्दापुरब्रम्हदेव आश्रम श्रावण मास में आस्था और सेवा का प्रमुख केंद्र बन जाता है, करीब 114 साल पुराने इस आश्रम में पिछले 14 वर्षों से लगातार पूरे श्रावण मास के दौरान भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। यह भंडारा एक महीने तक दिन-रात चलता है,जहां श्रद्धालुओं की सेवा की जाती है।श्रावण मास शुरू होते ही आश्रम में भक्तों और कांवड़ियों की भीड़ बढ़ जाती है। भगवान शिव के धाम की ओर जाने वाले कांवड़ यात्री यहां रुककर प्रसाद ग्रहण करते हैं। स्थानीय लोग भी इस सेवा कार्य में सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। वे भंडारे की व्यवस्था संभालते हैं और आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में लगे रहते हैं। आश्रम में पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। कांवड़िये बिलग्राम थाना क्षेत्र के राजघाट गंगाजी से गंगाजल भरकर अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं। इसके बाद वे थाना बेहटागोकुल क्षेत्र में स्थित सुप्रसिद्ध शिव संकट सकाहा मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस धार्मिक यात्रा के दौरान फर्दापुर का ब्रह्मदेव आश्रम कांवड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा और विश्राम स्थल के रूप में कार्य करता है। फर्दापुर ब्रह्मदेव आश्रम की एक अनूठी विशेषता यह है कि यहां हिंदू समाज के साथ-साथ मुस्लिम समाज के लोगों की भी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं और मान्यता पूरी होने पर दोबारा आकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। आश्रम में मुंडन संस्कार भी आयोजित किए जाते हैं। आश्रम के पास से गुजरने वाले राहगीर भी अपने वाहन रोककर ब्रह्मदेव बाबा के दरबार में मत्था टेकते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां माथा टेकने से यात्रा निर्विघ्न रहती है और किसी भी अनहोनी की आशंका नहीं रहती। श्रावण मास में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी व्यवस्थाओं को लेकर सतर्क रहता है। इस प्रकार, फर्दापुर का यह प्राचीन आश्रम श्रावण मास में केवल भंडारे का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा, विश्वास और सामाजिक सद्भाव की एक ऐसी परंपरा बन जाता है, जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।
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