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    इंडो-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का प्रदर्शन:लखनऊ डीएम कार्यालय पहुंचे, बोले- कृषि-दुग्ध क्षेत्र को समझौते से बाहर रखा जाए

    6 hours ago

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    लखनऊ में सोमवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले किसानों ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध उत्पादों को शामिल किए जाने की आशंका को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट ज्ञान चंद गुप्ता के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर कृषि हितों की रक्षा की मांग की। कृषि और दुग्ध उत्पाद शामिल हुए तो नुकसान होगा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष (पूर्वी उत्तर प्रदेश) प्रताप बहादुर ने कहा कि यदि व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी सेक्टर को शामिल किया गया तो इसका सीधा असर देश के छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 87 प्रतिशत किसान सीमांत श्रेणी में आते हैं। उनकी आजीविका खेती व पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में विदेशी उत्पादों की एंट्री से उनकी आय प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी बयानों से बढ़ी आशंका ज्ञापन में कहा गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वहां की कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस के हालिया बयानों से यह संकेत मिलता है कि प्रस्तावित समझौते से अमेरिकी किसानों को लाभ पहुंच सकता है। संगठन ने आशंका जताई कि यदि अमेरिकी दुग्ध उत्पाद या मिल्क पाउडर भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर आया तो स्थानीय डेयरी व्यवसाय संकट में पड़ सकता है। दूध के दाम पहले ही कम, बढ़ सकता है आर्थिक दबाव किसान नेताओं ने कहा कि देश के कई हिस्सों में दूध पहले से ही कम कीमत पर बिक रहा है। ऐसे में विदेशी उत्पादों की आमद से बाजार दर और गिर सकती है, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। कृषि हितों की अनदेखी पर आंदोलन की चेतावनी संगठन ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि प्रस्तावित इंडो-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और पशुपालन क्षेत्र को शामिल न किया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी हुई तो देशभर में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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