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    इंजीनियर अशोक गवांडे हत्याकांड का खुलासा अबतक नहीं:10 महीने बाद भी हत्या की गुत्थी अनसुलझी, न हत्यारे मिले न हत्या की वजह

    5 hours ago

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    देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में महाराष्ट्र निवासी इंजीनियर अशोक गवांडे की हत्या को करीब 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक न तो हत्यारों तक पहुंच सकी है और न ही हत्या की वजह सामने आ पाई है। मेडिकल कॉलेज के ओपीडी भवन की पांचवीं मंजिल पर बनी पानी की टंकी में शव मिलने के बाद से ही यह मामला रहस्य बना हुआ है। 6 अक्टूबर 2025 को मेडिकल कॉलेज के ओपीडी भवन की पांचवीं मंजिल स्थित पानी की टंकी से अशोक गवांडे (61) का शव बरामद हुआ था। वह महाराष्ट्र के ठाणे के रहने वाले और पेशे से इंजीनियर थे। किसी काम से देवरिया आए थे। इतनी ऊंचाई पर बनी पानी की टंकी में शव मिलने से शुरुआत से ही मामला संदिग्ध माना गया। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में मौत को संदिग्ध माना गया और शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आने के बाद जांच हत्या के एंगल से शुरू हुई। अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुई थी हत्या की FIR मृतक के साले प्रफुल्ल की तहरीर पर सदर कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस और एसओजी ने मेडिकल कॉलेज के अलावा देवरिया और महाराष्ट्र तक जांच का दायरा बढ़ाया। मृतक के परिजनों से पूछताछ के साथ मेडिकल कॉलेज में घटना के समय मौजूद डॉक्टरों, नर्सों, कर्मचारियों और अन्य लोगों से भी जानकारी जुटाई गई। कई बार घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, लेकिन जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। सबसे बड़ा सवाल- अशोक मेडिकल कॉलेज पहुंचे कैसे और टंकी तक कौन ले गया? जांच में सबसे अहम सवाल यही बना हुआ है कि अशोक गवांडे मेडिकल कॉलेज कैसे पहुंचे और उनके साथ कौन था। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि शव को पांचवीं मंजिल पर बनी पानी की टंकी तक कैसे पहुंचाया गया। अशोक के गोरखपुर रेलवे स्टेशन से देवरिया आने की गतिविधियों की भी पड़ताल की गई। ई-रिक्शा से मेडिकल कॉलेज पहुंचने की संभावना को लेकर भी जानकारी जुटाई गई, लेकिन उनकी पूरी गतिविधियों की कड़ी अब तक नहीं जुड़ सकी है। मोबाइल गायब, डिजिटल सुराग भी नहीं मिला घटना के बाद अशोक गवांडे का मोबाइल फोन भी गायब मिला। पुलिस के लिए मोबाइल की बरामदगी अहम मानी जा रही थी, क्योंकि कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल जानकारी से उनकी अंतिम गतिविधियों और संपर्कों का पता चल सकता था। लेकिन मोबाइल न मिलने से जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी अब भी अधूरी है। पुलिस यह भी पता नहीं लगा सकी है कि अशोक मेडिकल कॉलेज में किससे मिलने आए थे और उनके साथ कितने लोग थे। शव को टंकी तक पहुंचाने में कौन शामिल था, यह सवाल भी अनसुलझा है। CCTV की कमी ने जांच को मुश्किल बनाया हत्याकांड की जांच में मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था और पर्याप्त सीसीटीवी कैमरों का अभाव बड़ी चुनौती बनकर सामने आया। पुलिस ने परिसर में उपलब्ध कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन कई महत्वपूर्ण स्थानों पर कैमरे नहीं होने के कारण घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ सकी। पुलिस ने गोरखपुर तक जाकर सीसीटीवी फुटेज खंगाली, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस सुराग नहीं मिला, जिससे हत्याकांड की कड़ी जुड़ सके। तीन महीने तक कर्मचारियों से पूछताछ, नर्सों ने जताई थी नाराजगी जांच के दौरान मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और अन्य कर्मचारियों से अलग-अलग चरणों में पूछताछ की गई। करीब तीन महीने तक पूछताछ का सिलसिला चलने पर कुछ नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि पूछताछ के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है और कई बार घंटों थाने में बैठाया जाता है। शुक्रवार को दर्जनों नर्स और कर्मचारी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रजनी पटेल और सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा से मिले और अपनी परेशानी बताई। प्राचार्य ने उनकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया था। पत्नी और साले से भी पूछताछ, फिर भी हत्या की वजह साफ नहीं पुलिस ने मृतक की पत्नी तनु उर्फ अनिता और साले प्रफुल्ल से भी पूछताछ की। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना था कि अशोक देवरिया किस काम से आए थे और मेडिकल कॉलेज जाने की वजह क्या थी। उनकी अंतिम गतिविधियों, संपर्कों और मेडिकल कॉलेज में मौजूद लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई। अस्पताल में उन्हें किस स्टाफ ने देखा और किन लोगों से उनकी बातचीत हुई, इन बिंदुओं पर भी पूछताछ हुई। इसके बावजूद हत्या की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी। घटना के बाद तत्कालीन प्रिंसिपल भी हटाए गए थे मेडिकल कॉलेज परिसर में पानी की टंकी से शव मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठे थे। सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही को देखते हुए तत्कालीन प्रिंसिपल को पद से हटा दिया गया था। उस समय मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही थी। 10 महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली हत्याकांड को करीब 10 महीने हो चुके हैं। पुलिस और एसओजी की जांच, पूछताछ और CCTV फुटेज खंगालने के बावजूद अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। हत्या की वजह भी स्पष्ट नहीं हो सकी है और यह सवाल भी अनुत्तरित है कि अशोक गवांडे का शव पानी की टंकी तक कैसे पहुंचा। मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील परिसर में हुई इस सनसनीखेज घटना का अब तक खुलासा नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम किया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 10 महीने बाद इस हत्याकांड की गुत्थी कब सुलझेगी।
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