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    ISBT से मन:कामेश्वर के बीच मेट्रो ट्रैक तैयार:6 किमी लंबे इस ट्रैक की डाउन लाइन का सिर्फ 600 मीटर हिस्से में काम शेष

    3 hours ago

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    आगरा में मन:कामेश्वर स्टेशन से ISBT तक मेट्रो का ट्रैक लगभग पूरा हो गया है। 6 किमी लंबे इस ट्रैक की डाउन लाइन का सिर्फ 600 मीटर हिस्से में काम शेष रह गया है। यह भी होली के बाद तक पूरा हो जाएगा। मार्च आखिर में मन:कामेश्वर से ISBT के बीच अप और डाउन लाइन पर ट्रायल शुरू हो जाएगा। अप्रैल आखिर या मई शुरुआत में आगरावासी फतेहाबाद रोड से ISBT तक मेट्रो में सफर कर सकेंगे। फिलहाल मन:कामेश्वर स्टेशन से ISBT के बीच अप लाइन पर ट्रायल चल रहा है। वर्तमान में फतेहाबाद रोड स्थित ताज ईस्ट स्टेशन से मन:कामेश्वर स्टेशन के बीच मेट्रो का संचालन हो रहा है। अब विस्तार से पढ़िये... उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) द्वारा आगरा मेट्रो के पहले कॉरिडोर के शेष अंडर ग्राउंड (मन:कामेश्वर से आरबीएस कॉलेज ) में अप लाइन का काम पूरा होने के बाद सफल ट्रायल किया जा चुका है। इसके बाद अब डाउन लाइन में ट्रैक बिछाने का काम अंतिम चरण में है। अप लाइन के बाद जल्द ही ट्रायल रन किया जाएगा। ISBT से मन:कामेश्वर के बीच में अप और डाउन मिलाकर लगभग 12 किमी ट्रैक बिछाने का काम किया जा रहा है। जिसके अप लाइन में ट्रैक बिछाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है। जबकि डाउन लाइन में महज 600 मीटर ट्रैक बिछाने का शेष बचा है। ट्रैक के साथ ही काम थर्ड रेल, सिग्नलिंग आदि का काम भी किया जा रहा है। ISBT से सिकंदरा तक शेष खंड के एलिवेटेड खंड पर सिविल कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी प्रकार, दूसरे कॉरिडोर (आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक) का निर्माण कार्य भी तेजी से किया जा रहा है ताकि परियोजना को समय पर पूरा किया जा सके और आगरा के लोगों को समयबद्ध तरीके से विश्व स्तरीय मेट्रो प्रणाली प्रदान की जा सके। ऐसे होता है भूमिगत ट्रैक का निर्माण अंडर ग्राउंड मेट्रो निर्माण के लिए सबसे पहले स्टेशन का निर्माण किया जाता है। स्टेशन का ढांचा तैयार होने के बाद लॉन्चिंग शाफ्ट का निर्माण कर टनल बोरिंग मशीन लॉन्च की जाती है। टीबीएम मशीन के जरिए गोलाकार टनल बनकर तैयार होती है। टनल का आकार गोल होने के कारण सीधे ट्रैक बिछाना संभव नहीं है, इसलिए यहां ट्रैक स्लैब की कास्टिंग की जाती है। इसके बाद इसी समतल ट्रैक स्लैब बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जाता है। बैलास्टलैस ट्रैक निर्माण के दौरान कॉन्क्रीट बीम (प्लिंथ बीम) पर पटरियों को बिछाया जाता है। पारंपरिक तौर पर प्रयोग होने वाले ट्रैक की तुलना बैलास्टलैस ट्रैक अधिक मजबूत होता है एवं इसका मेन्टिनेंस भी काफी कम है। हेड हार्डेंड रेल से ट्रेन को मिलती ट्रैक को मजबूती बता दें कि रेलवे की तुलना में मेट्रो प्रणाली में पटरियों पर गाड़ियों का आवागमन अधिक होता है, यहां मेट्रो रेल औसतन पांच मिनट के अंतर पर चलती हैं। ऐसे में तेजी से ट्रेन की स्पीड पकड़ने और ब्रेक लगाने की स्थिति में ट्रेन के पहिये और पटरी के बीच अधिक घर्षण होता है। जिसके कारण सामान्य रेल जल्दी घिस सकती है जिससे पटरी टूटने, क्रेक आदि समस्या आ सकती है, लेकिन हेड हार्डेंड रेल के अधिक मजबूत होने के कारण ऐसी कोई समस्या नहीं आती है। ऑटोमैटिक ट्रैक वेल्डिंग मशीन से बनती है लॉन्ग वेल्डेड रेल अंडर ग्राउंड भाग में ट्रैक बिछाने के लिए सबसे पहले क्रेन की मदद से ऑटोमेटिक ट्रैक वेल्डिंग मशीन को शाफ़्ट में पहुंचाया जाता है। इसके बाद पटरी के भागों को वेल्डिंग के जरिए जोड़कर लॉन्ग वेल्डिड रेल बनाई जाती है। इसके बाद टनल में ट्रैक स्लैब की कास्टिंग कर उस पर लॉन्ग वेल्डिड रेल बिछाई जाती है। वहीं, बैलास्टिड ट्रैक के लिए समतल भूमि पर गिट्टी एवं कॉन्क्रीट के स्लीपरों पर पटरी बिछाई जाती हैं।
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