Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    जिनपिंग बोले- दुनिया फिर जंगलराज की तरफ बढ़ रही:बीजिंग में पुतिन के साथ बैठक की, कहा- ईरान जंग को रोकना जरूरी

    1 day ago

    1

    0

    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को लेकर चेतावनी दी है। रॉयटर्स के मुताबिक, बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि दुनिया फिर जंगलराज की तरफ बढ़ रही है। जिनपिंग ने चेतावनी दी कि अगर लड़ाई नहीं रुकी तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाला युद्ध दुनिया को ऐसे दौर में ले जा सकता है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ जाएं। उन्होंने कहा कि लड़ाई रोकना बेहद जरूरी है। जिनपिंग ने यह बयान बुधवार को बीजिंग में पुतिन के औपचारिक स्वागत के बाद दिया। बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल के बाहर दोनों नेता रेड कार्पेट पर साथ चले और सैन्य बैंड ने रूस और चीन के राष्ट्रगान बजाए। पुतिन और जिनपिंग की मुलाकात की तस्वीरें… पुतिन के बीजिंग पहुंचने 3 की तस्वीरें… पुतिन और जिनपिंग बोले- दुनिया में दबदबे की राजनीति खत्म हो पुतिन और जिनपिंग ने बीजिंग में मुलाकात के दौरान दुनिया में दबदबे की राजनीति खत्म करने की बात कही। दोनों नेताओं ने कहा कि रूस और चीन मिलकर ज्यादा न्यायपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करेंगे। बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक राजनीति, मिडिल ईस्ट युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और BRICS जैसे मुद्दों पर चर्चा की। पुतिन ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में रूस-चीन रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं और दोनों देश लगातार साझा परियोजनाओं पर साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी का मकसद दोनों देशों के लोगों की समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करना है। वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और रूस को मिलकर ज्यादा संतुलित और न्यायपूर्ण वैश्विक शासन व्यवस्था बनाने के लिए काम करना चाहिए। चीन और रूस में 40 समझौते साइन होंगे अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन इस दौरे में बड़े कारोबारी और सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे हैं। क्रेमलिन ने कहा है कि दोनों देश करीब 40 समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। इनमें अर्थव्यवस्था, पर्यटन, शिक्षा और ऊर्जा से जुड़े समझौते शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में रूस की गैस बिक्री लगभग बंद हो गई है। ऐसे में रूस के लिए चीन के साथ ऊर्जा सहयोग बेहद अहम हो गया है। बैठक से पहले जारी वीडियो संदेश में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता जैसे “मुख्य हितों” की रक्षा के लिए साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मॉस्को और बीजिंग के बीच करीबी रणनीतिक संबंध वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पुतिन बोले- रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर चीन पहुंचने से पहले जारी वीडियो संदेश में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा, आपसी समझ और बराबरी के सहयोग का रिश्ता है। पुतिन ने कहा कि दोनों देश संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, रूस और चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। अमेरिका-रूस के बीच संतुलन बना रहा चीन ट्रम्प के बाद अब पुतिन के दौरे को लेकर जानकारों का कहना है कि लगातार हो रहे ये बड़े दौरे दिखाते हैं कि चीन एकसाथ अमेरिका और रूस दोनों के साथ रिश्ते संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब यूक्रेन और ईरान से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक तनाव बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन के पास यह मौका है कि वह एकसाथ अमेरिका और रूस दोनों के साथ बातचीत करके अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूत दिखाए। पुतिन 40 से ज्यादा बार जिनपिंग से मिल चुके पुतिन और शी जिनपिंग अब तक 40 से ज्यादा बार मुलाकात कर चुके हैं। पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती दुनिया की सबसे मजबूत राजनीतिक साझेदारियों में मानी जाती है। 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग अपनी पहली विदेश यात्रा पर रूस गए थे। वहीं पुतिन भी कई बार चीन को अपनी शुरुआती विदेशी यात्राओं में प्राथमिकता देते रहे हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे को करीबी दोस्त और रणनीतिक साझेदार बता चुके हैं। क्रेमलिन के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि लगातार निजी संवाद भी होता रहा है। फरवरी 2026 में हुई वीडियो बैठक में शी जिनपिंग ने पुतिन को चीन आने का न्योता दिया था, जिसे पुतिन ने तुरंत स्वीकार कर लिया। दोनों नेता BRICS, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और एशिया-प्रशांत मंचों पर भी अक्सर साथ नजर आते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के मुकाबले रूस और चीन खुद को मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर के समर्थक के रूप में पेश करते रहे हैं। मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर यानी ऐसी दुनिया, जहां ताकत सिर्फ एक देश नहीं बल्कि कई बड़े देशों में बंटी हो। चीन-रूस के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हुए अमेरिकी प्रभाव को लेकर साझा चिंता के चलते चीन और रूस ने पिछले कुछ सालों में अपने रिश्ते काफी मजबूत किए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, विदेश नीति, कानून व्यवस्था और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर लगातार उच्चस्तरीय बैठकें होती रही हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद चीन और रूस के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। चीन ने रूस से तेल, कोयला और गैस की खरीद बढ़ाई है। वहीं, चीन रूस को कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी बड़ी वस्तुओं का निर्यात कर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल दोनों देशों के बीच व्यापार 228.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। रूस को इसमें 21.49 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला, जो 2024 के मुकाबले 55% ज्यादा है। हालांकि, पश्चिमी देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को आर्थिक सहारा दे रहा है। पावर ऑफ साइबेरिया-2 पाइपलाइन पर भी नजर रूस लंबे समय से ‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि पुतिन और जिनपिंग की बैठक में इस प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हो सकती है। यह एक बहुत बड़ा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट है, जिसे रूस और चीन मिलकर बना रहे हैं। इसका मकसद रूस की गैस सीधे चीन तक पहुंचाना है, ताकि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पाइपलाइन के जरिए रूस के यामाल प्रायद्वीप से हर साल करीब 50 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस मंगोलिया के रास्ते उत्तरी चीन भेजी जा सकेगी। इतनी गैस से 15 से 20 करोड़ घरों की एक साल की जरूरत पूरी हो सकती है। दोनों देशों के बीच पहले से एक पाइपलाइन चल रही है, जिसका नाम पावर ऑफ साइबेरिया-1 है। यह रूस के पूर्वी हिस्से से चीन को गैस देती है, जो दिसंबर 2019 में शुरू हुई थी। दूसरी पाइपलाइन रूस के पश्चिमी हिस्से से गैस लाएगी। ईरान संकट और तेल कीमतों से रूस को राहत अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट के लगभग बंद होने जैसी स्थिति से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे दुनियाभर में आर्थिक मंदी का खतरा भी गहराया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से फिलहाल रूस को कुछ फायदा मिला है। रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल और प्राकृतिक गैस भंडार वाले देशों में शामिल है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध के कारण रूस अब भी अमेरिका और यूरोपीय देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इन प्रतिबंधों का असर रूसी अर्थव्यवस्था पर लगातार बना हुआ है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- चीन के साथ शानदार ट्रेड डील हुई: दोनों देशों को फायदा होगा; जिनपिंग के साथ बैठक की; बीजिंग से रवाना हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तीन दिन का चीन दौरा पूरा कर वापस रवाना हो गए। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अंतिम दौर की बातचीत की। दोनों नेताओं की यह बैठक बीजिंग के झोंगनानहाई परिसर में हुई। इसे चीन के शीर्ष नेतृत्व का सबसे सुरक्षित और गोपनीय सत्ता केंद्र माना जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    मीन राशि
    Next Article
    मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की:इटली में एक ही कार में घूमे, 2000 साल पुराने कोलोजियम में सेल्फी ली; 15 PHOTOS

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment