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    ज्ञानवापी के 35 साल पुराने केस में सुनवाई आज:मूलवाद में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की कार्यवाही ना करने की अपील, नए पीठासीन सुनेंगे रिट

    17 hours ago

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    वाराणसी के ज्ञानवापी में लंबित कई मुकदमों का मूलवाद सुनवाई में पीछे हैं। 35 साल पुराने केस में मुख्य अपील के पहले कई याचिकाओं ने केस की रफ्तार घटा दी है। अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिका के निस्तारण तक ज्ञानवापी के मुकदमे में कोई कार्यवाही न करने की सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने की है। वाराणसी में ज्ञानवापी में नए मंदिर बनाने और हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने को लेकर वर्ष 1991 में दाखिल मुकदमे में आज सुनवाई होगी। सुन्नी पक्ष इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गया है और वहीं से बड़े निस्तारण की उम्मीद लगाए है। मुकदमे में अग्रिम कार्रवाई न करने की सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की लंबित प्रार्थना पत्र पर सुनवाई आज भी होगी। बता दें कि एक जनवरी 2026 को अग्रिम कार्रवाई न करने की सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील ने 35 साल से लंबित इस मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कोई कार्यवाही न करने की प्रार्थना पत्र दी गई है। इस प्रार्थना पत्र पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी द्वारा 20 जनवरी को लिखित आपत्ति प्रस्तुत की जा चुकी है। 12 दिसंबर 2024 के आदेश का हवाला पिछले दिनों सुनवाई के दौरान वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की आपत्ति में उठाए गए बिंदुओं पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील तौहिद खान और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकील रईस अहमद ने अपना पक्ष रखा। दलील दी गई कि वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल एक रिट याचिका 1246/2020 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 12 दिसंबर 2024 को पारित आदेश में ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों में अगले आदेश तक कोई भी प्रभावी अंतरिम अथवा अंतिम आदेश पारित न करने का अधीनस्थ न्यायालयों को आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को दृष्टिगत रखते हुए ही बीते दिनों जिला जज द्वारा ज्ञानवापी परिसर में सीलबंद ताला पर खराब हो चुके कपड़े बदलने की शासन के विशेष वकील की प्रार्थना पत्र पर कोई नया आदेश पारित नहीं किया गया। इसी तरह दूसरे एक मामले में भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। नई याचिका में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की दलील वकील अश्विनी उपाध्याय की रिट याचिका में कहा गया है कि जिस मुकदमे में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट (उपासना स्थल अधिनियम) का मामला शामिल है, उसमें अगले आदेश तक कोई प्रभावी या अंतरिम आदेश पारित न किया जाए। यह मुकदमा भी प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट से अलग नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपेक्ष्य में उनके प्रार्थना पत्र का निस्तारण किया जाए। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकीलों की बहस पूरी होने के बाद वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी द्वारा पक्ष रखा जा रहा था कि इस बीच उस पीठासीन अधिकारी का स्थानांतरण हो गया। नए पीठासीन अधिकारी के कार्यभार ग्रहण के बाद मुकदमे की सुनवाई आरंभ हो गई। सुनवाई के इस मुकदमे के पक्षकारों में से स्व. हरिहर पांडेय के स्थान पर उनकी पुत्रियों को पक्षकार बनाने की और विजय शंकर रस्तोगी की वादमित्र पद पर नियुक्ति को लेकर लंबित प्रार्थना पत्रों की वकील आशीष श्रीवास्तव ने अदालत को जानकारी दी। वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी और अधिवक्ता राजेन्द्र प्रताप पांडेय ने आशीष श्रीवास्तव के प्रार्थना पत्रों पर आपत्ति जताई। दोनों वकीलों ने दलील दी कि जब वे इस मुकदमे में पक्षकार ही नहीं हैं तो किस अधिकार से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जा रहा है। पक्षकार बनाने की अपील पहले ही इस अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी है।अदालत ने सभी प्रार्थना पत्रों पर अगली सुनवाई के लिए आज की तिथि मुकर्रर कर दी थी।
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