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    JDU से निकाले गए अनंत सिंह का सियासी खेल खत्म?:क्या मोकामा का किला ढहेगा, CM से ललन सिंह क्यों मिले? 4 सवालों में पूरा खेल

    9 hours ago

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    मोकामा विधायक अनंत सिंह को JDU ने पार्टी से निकाल दिया है। साथ ही उनकी विधायकी खत्म करने की सिफारिश की है। अनंत सिंह पर कार्रवाई के बाद इस वक्त 4 बड़े सवाल पूछे जा रहे हैं... इन्हीं सवालों का जवाब जानेंगे; आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में...। सवाल-1ः अनंत सिंह आगे क्या करेंगे? जवाबः फिलहाल अनंत सिंह के पास 3 विकल्प हैं। 1. खुद की पार्टी बनाकर राजनीति करें पहला ऑप्शन है कि वह खुद की पार्टी बनाकर राजनीति करें। 25 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा, ‘आगे अपनी पार्टी बनाएंगे। जनता मालिक है। जनता ही हमारी पार्टी है।’ हालांकि, सूत्रों के मुताबिक अनंत सिंह खुद की पार्टी नहीं बनाएंगे। वह इसके पक्ष में नहीं है। 2. दूसरी पार्टी के साथ राजनीति शुरू करें नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अनंत सिंह ने ऐलान किया था कि अब हम भी अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने बेटे अभिषेक के चुनाव लड़ने की तरफ इशारा किया था। अब JDU ने उनको पार्टी से निकाल दिया है तो उनके पास किसी भी दल में शामिल होने का ऑप्शन खुल गया है। ज्यादा संभव है कि अनंत सिंह खुद किसी दल में शामिल नहीं होंगे। वह अपने बेटे को किसी भी पार्टी में शामिल करा सकते हैं। 3. निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते और ताकत दिखाएं अगर JDU की सिफारिश पर विधानसभा अध्यक्ष ने अनंत सिंह की विधानसभा की सदस्यता खत्म की तो मोकामा में उपचुनाव हो सकता है। ऐसे में अनंत सिंह के पास तीसरा विकल्प है कि खुद या अपने बेटे को मोकामा से निर्दलीय चुनाव लड़ाएं और जिताएं। 2015 में भी JDU ने जब मोकामा से उनको टिकट नहीं दिया था तो अनंत सिंह जेल से निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। और तब JDU प्रत्याशी नीरज कुमार को हराया था। अनंत सिंह का बैकअप प्लान सूत्रों के मुताबिक, अनंत सिंह को पहले से अंदाजा था कि पार्टी कुछ कड़ा एक्शन ले सकती है। ऐसे में उन्होंने अपना बैकअप प्लान तैयार कर लिया था। उसी रणनीति के तहत उन्होंने पार्टी से निकाले जाने के तुरंत बाद सीधा हमाला बोला। उन्होंने ऐसा करके अपने समर्थकों के बीच लड़ने वाले योद्धा का संदेश दिया। बताया जा रहा है कि अगर उपचुनाव हुआ तो वह अपने बेटे को राजनीति में लॉंच करेंगे। इस बार खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। सवाल-2ः क्या राजनीतिक रूप से खत्म हो जाएंगे अनंत सिंह? जवाबः राजनीतिक रूप से अनंत सिंह को ज्यादा नुकसान नहीं है। क्योंकि वह खुद अगला चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। ऐसे में वह पार्टी में रहे या ना रहे, ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, कानूनी पचड़ा बढ़ सकता है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, 65 वर्षीय अनंत सिंह पर 28 क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। पॉलिटिकल सर्किल में चर्चा है कि सरकार के खिलाफ जाने का असर अनंत सिंह के कानूनी मामलों पर पड़ सकता है। ऐसा 2019 में हो चुका है। सवाल-3ः क्या अनंत सिंह की विधायकी जाएगी? जवाबः जवाब के लिए अभी इंतजार करना होगा। मामला लंबा चलेगा। इसमें राजनीतिक, तकनीकी और कानूनी पेच है। इसे सिलसिलेवार तरीके से समझिए… तकनीकी पेचः प्रदेश अध्यक्ष के पास अधिकार नहीं, फिर भी सिफारिश 24 अक्टूबर की शाम बिहार JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से विधानसभा की सदस्यता रद्द करने का अनुरोध किया। इसमें 2 बड़े तकनीकी पेच हैं। पहला- JDU के संविधान के मुताबिक, विधायक पर एक्शन बिहार प्रदेश अध्यक्ष नहीं ले सकते। विधायक को पार्टी से निकालने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी नीतीश कुमार के पास है। वह प्रारंभिक सबूत के आधार पर निकाल सकते हैं। उसके बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक में उसे पास कराना होगा। दूसरा- विधानसभा की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नहीं कर सकते। उसके लिए विधायक दल के नेता या पार्टी के मुख्य सचेतक को विधानसभा अध्यक्ष को आधिकारिक पत्र लिखना होता है। उसमें निकालने के कारण और उसके समर्थन में सबूत देना होगा। उमेश कुशवाहा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। विधायक दल के नेता श्रवण कुमार और मुख्य सचेतक संजय गांधी हैं। इन दोनों ने अभी तक ऐसी कोई सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष से नहीं की है। कानूनी पेचः खत्म हुई विधायकी तो कोर्ट जाएगा मामला दल-बदल विरोधी कानून संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(1)(a) और रवि एस. नाइक बनाम भारत संघ (1994) के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक... इसी कानून को अनंत सिंह की विधानसभा की सदस्यता खत्म करने का मजबूत आधार बताया जा रहा है। JDU नेता शरद यादव केस का उदाहरण दे रहे हैं। शरद यादव केस जानिए… हालांकि, अनंत सिंह के समर्थक इस केस को शरद यादव से थोड़ा अलग बताते हैं… सूत्रों के मुताबिक, अगर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार विधानसभा की सदस्यता रद्द करते हैं तो मामला कोर्ट जा सकता है। तब अंतिम फैसला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से होगा। बालचंद्र एल जारकीहोली बनाम बीएस येदियुरप्पा केस में विधानसभा अध्यक्ष का फैसला पलटते हुए 13 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था… राजनीतिक पेचः अब गेंद BJP के पाले में, क्या रिस्क लेगी अनंत सिंह की विधायकी पर फैसला विधानसभा अध्यक्ष लेंगे, जो BJP नेता डॉ. प्रेम कुमार हैं। वह क्या फैसला लेंगे, उसके बाद राजनीति बदलेगी। क्योंकि अनंत सिंह BJP के कोर वोटर भूमिहार समाज से आते हैं। अनंत सिंह अभी सिंपैथी कार्ड खेल रहे हैं, ऐसे में तुरंत कार्रवाई की गुंजाइश कम है। 25 अक्टूबर को बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा, 'अब तक बिहार विधानसभा कार्यालय में इस संबंध में कोई पत्र नहीं आया है। पत्र आने के बाद समीक्षा की जाएगी और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।' दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष के पास पूरा अधिकार है कि वह क्या फैसला और कब लेंगे। वह चाहे तो मामले को लंबे समय तक पेंडिंग रख सकते हैं। जैसे- JDU ने मार्च 2026 में अपने बांका से सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा की सदस्यता रद्द करने की याचिका लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास लगाई। 7 महीने बाद भी अब तक लोकसभा अध्यक्ष ने फैसला नहीं सुनाया है। सवाल-4ः क्या ललन सिंह पार्टी में कमजोर पड़ रहे? जवाबः अभी कहना जल्दबाजी है। चर्चा है कि अनंत सिंह पर ललन सिंह इस तरह की कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे। उनसे माहौल बनवाकर सहमति ली गई। पार्टी के कुछ लोग 27 अक्टूबर का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि इस दिन विधान परिषद चुनाव का रिजल्ट आने वाला है। तब 2 सिनौरियो हो सकती है…
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