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    झांसी में नीता को जिताकर भाजपा ने चला ‘यादव’ कार्ड:नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में रितिका हारीं, सवर्णों की अनदेखी का लगाया आरोप

    9 hours ago

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    झांसी नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में भाजपा की बागी प्रत्याशी नीता विकास यादव की जीत ने पार्टी के भीतर की सियासत को चर्चा में ला दिया है। भाजपा ने कार्यकारिणी के लिए जारी अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में नीता यादव को शामिल नहीं किया था। इसके बावजूद पार्टी पार्षदों ने मतदान में उनका समर्थन किया और वह चुनाव जीत गईं। नीता यादव की जीत को अब आगामी विधानसभा चुनाव के सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक तरफ यादव, पिछड़े और दलित वर्गों को साधने की चर्चा है, तो दूसरी तरफ भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी की हार के बाद सवर्ण प्रतिनिधित्व और नाराजगी का मुद्दा भी सामने आया है। हालांकि, भाजपा ने नीता को समर्थन देने को विधानसभा चुनाव की रणनीति या यादव वोट को साधने की कवायद के तौर पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। पहले 2 तस्वीर देखिए… करीब 30 साल से भाजपा से जुड़ीं, फिर बगावत कर नामांकन किया कार्यकारिणी चुनाव के लिए भाजपा ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें नीता विकास यादव का नाम नहीं था। करीब 30 साल से भाजपा से जुड़ीं नीता यादव ने इसके बाद निर्दलीय तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया और विपक्षी पार्षदों के साथ नामांकन दाखिल किया। खास बात यह रही कि उनके नामांकन में भाजपा की पार्षद ममता सुगरपाल प्रस्तावक बनीं। इससे चुनाव निर्विरोध होने की संभावना खत्म हो गई और मुकाबले की स्थिति बन गई। मान-मनौव्वल के बाद भी नामांकन वापस नहीं लिया नीता के बगावती तेवर की जानकारी भाजपा के बड़े नेताओं तक पहुंची तो उन्हें मनाने की कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने नामांकन वापस नहीं लिया। इसके बाद कार्यकारिणी के चुनाव में मतदान तय हो गया। मतदान के दौरान सदर विधायक रवि शर्मा, एमएलसी डॉ. बाबूलाल तिवारी और एमएलसी रमा आरपी निरंजन भी नगर निगम पहुंचीं। यहां पार्टी नेताओं और पार्षदों के बीच काफी देर तक मंथन चलता रहा। इसके बाद भाजपा की रणनीति बदली नजर आई। अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी के मुकाबले पार्टी से बगावत कर मैदान में उतरीं नीता यादव को भाजपा पार्षदों का समर्थन मिला। वह चुनाव जीत गईं। उनके भाई रामजी यादव भी कार्यकारिणी में पहुंच गए। यादव वोट को लेकर सोशल इंजीनियरिंग की चर्चा नीता यादव की जीत के बाद इसे भाजपा की सामाजिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले पार्टी ने पिछड़े और एससी/एसटी वर्ग से आने वाले चेहरों को नगर निगम में नामित सभासद बनाया था। अब यादव समाज से आने वाली नीता यादव को कार्यकारिणी में जिताए जाने को भी इसी क्रम से जोड़कर चर्चा हो रही है। झांसी सदर विधानसभा क्षेत्र में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 20 हजार मानी जाती है। संख्या बहुत बड़ी नहीं होने के बावजूद करीबी चुनाव में यह वोट निर्णायक हो सकता है। इसी वजह से नीता की जीत को यादव समाज के बीच राजनीतिक संदेश के तौर पर देखने की चर्चा है। अधिकृत प्रत्याशी रितिका की हार, सवर्ण नाराजगी का मुद्दा उठा नीता यादव की जीत के साथ भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी की हार भी चर्चा में है। रितिका कार्यकारिणी चुनाव में एकमात्र सवर्ण पार्षद थीं। परिणाम के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में पार्टी के फैसले पर नाराजगी जताई। रितिका ने आरोप लगाया कि चुनाव में सवर्णों के साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने खास तौर पर ब्राह्मण समाज की अनदेखी का मुद्दा उठाया। उनके बयान के बाद भाजपा के परंपरागत सवर्ण समर्थक वर्ग में नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई। यादव को साधने के साथ सवर्णों को साथ रखना चुनौती नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव का परिणाम भाजपा के लिए दो अलग-अलग संदेश लेकर आया है। नीता यादव की जीत को जहां यादव समाज को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं रितिका तिवारी की हार ने सवर्ण प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने नए सामाजिक समूहों को जोड़ने के साथ अपने परंपरागत सवर्ण समर्थक वर्ग को साथ बनाए रखने की चुनौती भी होगी। हालांकि, यह अभी राजनीतिक विश्लेषण और चर्चा का विषय है। भाजपा की ओर से नीता यादव को समर्थन देने के पीछे विधानसभा चुनाव की सोशल इंजीनियरिंग या यादव वोट को साधने की रणनीति की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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