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    कोडीन केस में लखनऊ से आरोपी प्रभात खरे अरेस्ट:'श्रीराम' नाम से फर्म बनाकर UP समेत कई राज्यों में कोडीनयुक्त सिरफ-नशीली दवाओं की सप्लाई

    18 hours ago

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    कानपुर क्राइमब्रांच ने कोडीनयुक्त कफ सीरप व नशीली दवाएं बेचने के मामले में शुक्रवार को एक और आरोपी लखनऊ के प्रभात खरे को अरेस्ट कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि कोडीनयुक्त कफ सिरप केस में कानपुर कलक्टरगंज से जेल भेजा गया सरगना विनोद अग्रवाल और उसके बेटे शिवम अग्रवाल के साथ काम करता था। दोनों के कहने पर ही श्री राम नाम से फर्जी कंपनी बनाई और इसी नाम से यूपी के साथ ही कई राज्यों में अवैध रूप से कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई की है। जेल में बंद विनोद अग्रवाल कोडीनयुक्त सिरप करवा रहा था सप्लाई डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि कोडीनयुक्त सिरप केस में पकड़ा गया लखनऊ के ऐशबाग निवासी अभियुक्त प्रभात खरे से अरेस्टिंग के बाद पांच घंटे पूछताछ की गई। इस दौरान उसने बताया कि उसकी मुलाकात कानपुर स्थित अग्रवाल ब्रदर्स के मालिक विनोद अग्रवाल और उसके बेटे शिवम अग्रवाल से हुई थी। दोनों के कहने पर ही मोटी कमाई के लालच में कोडीनयुक्त कफ सिरप और नशीली दवाओं को अवैध रूप से बेचने के धंधे में शामिल हुआ। प्रभात खरे की मानें तो विनोद और शिवम अग्रवाल ने ही उसकी पत्नी के नाम से ध्रुव फार्मास्युटिकल्स नामक फर्म खुलवाई गई, जिसके माध्यम से वैध दवाओं की आपूर्ति की आड़ में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी की जाती थी। फर्जी फर्म श्री राम मेडिकल एजेंसी के नाम से फर्जी बिल तैयार कर दवाओं को ट्रांसपोर्ट के माध्यम से विभिन्न जनपदों में भेजा जाता था। पुलिस की मानें तो करीब डेढ़ लाख कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई के तो साक्ष्य मिले हैं, लेकिन अग्रवाल बदर्स और पकड़े गए प्रभात ने साक्ष्य मिटा दिया है। प्रभात को एक शीशी पर 4 से 6 रुपए का मुनाफा मिलता था। रातो-रात करोड़पति बनने के चक्कर में प्रभात भी इस धंधे में शामिल हुआ और यूपी के साथ ही कई राज्यों में कोडीनयुक्त कफ सिरप और नशीली दवाओं की सप्लाई शुरू कर दी थी। ट्रांसपोर्ट से यूपी समेत कई राज्यों में कर रहे थे सप्लाई प्रभात ने बताया कि कोडीन युक्त सिरप को कार्टन में पैक कर सरना ट्रांसपोर्ट सहित अन्य ट्रांसपोर्ट माध्यमों से सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच आदि जनपदों में भेजा जाता था, जहां स्थानीय मेडिकल एजेंसियों के नाम पर माल भेजकर बाद उसे अभियुक्त प्रभात खरे द्वारा स्वंय रिसीव करके उसे नशे के रूप में उपयोग करने वाले व्यक्तियों को ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। इस अवैध व्यापार से प्राप्त धनराशि का वितरण अभियुक्तों के बीच नकद रूप में किया जाता था। प्रभात खरे के कब्जे से प्राप्त मोबाइल फोन में भी फर्जी बिलों से संबंधित डिजिटल साक्ष्य प्राप्त मिले हैं।
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