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    कागज के टुकड़े जान नहीं बचाते...पाकिस्तान-तुर्की डील के बाद सऊदी पर दमकर दहाड़ा भारत का दोस्त

    21 hours ago

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    7 अगस्त की रात को दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी लकीर खींची गई है जिसने ना सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि भारत के रणनीतिकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मक्का में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया। इसे दुनिया के कई देश इस्लामिक नेटो की शुरुआत कह रहे हैं। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान की न्यूक्लियर पावर और तुर्की की ड्रोन टेक्नोलॉजी के एक साथ आने की खबर आई, ईरान ने ऐसी दहाड़ लगाई कि पूरी दुनिया सहम गई। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा कि सऊदी अरब सावधान रहे क्योंकि कागज के टुकड़े कभी भी जान नहीं बचाते। इस एग्रीमेंट की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी कलेक्टिव डिफेंस क्लॉज़ है। ठीक वैसे ही जैसे नाटो का आर्टिकल पांच कहता है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला हुआ तो बाकी सब मिलकर युद्ध लड़ेंगे। अब यही नियम पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की पर लागू होगा। अब आप सोचिए अगर कल को यमन की हूं विद्रोही या ईरान की सेना सऊदी अरब पर हमला करती है तो पाकिस्तान की फौज और तुर्की की वायु सेना को सऊदी के बचाव में सीधे युद्ध के मैदान में उतरना पड़ेगा। यह वेस्ट एशिया के इतिहास में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल शिफ्ट है।इसे भी पढ़ें: शहबाज-मुनीर के सऊदी पहुंचते ही टूट पड़ा ईरान, बिछा दी लाशेंसऊदी अरब ने आखिर तुर्की को क्यों चुना? इसका जवाब है तुर्की के घातक बैरख्तर ड्रोंस। आज की तारीख में तुर्की दुनिया का सबसे तेजी से उभरता हुआ डिफेंस हब है। तुर्की के पास नेटो की ट्रेनिंग है और सीरिया लीबिया जैसे देशों में लड़ने का कड़वा अनुभव है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान है। पाकिस्तान की माली हालत चाहे जो भी हो लेकिन उसके पास एक विशाल सेना और परमाणु हथियार है। सऊदी अरब को हमेशा से डर रहा है कि ईरान एक परमाणु शक्ति ना बन जाए। ऐसे में पाकिस्तान का परमाणु छाता सऊदी अरब को एक मानसिक सुरक्षा देता है। सऊदी अरब अपना पैसा लगाएगा। तुर्की अपनी टेक्नोलॉजी देगा और पाकिस्तान अपना सैन, मैन पावर और परमाणु ताकत। लेकिन इस पूरी कहानी में विलेन की एंट्री होती है ईरान के रूप में। ईरान के सांसद इब्राहिम रजई ने मक्का पैक को पेपर एग्रीमेंट कहकर इसकी धज्जियां उड़ा दी और खुद इस बात की पुष्टि की अपने एक्स अकाउंट पर की। ईरान का कहना है कि सऊदी अरब पहले अमेरिका के संरक्षण में था तब भी ईरान ने उसे नुकसान पहुंचाया।   इसे भी पढ़ें: Iran ने Saudi Arabia, पाकिस्तान और Turkey के रक्षा समझौते को बताया बेअसरतुर्की और पाकिस्तान उसका क्या भला करेंगे? ईरान का तर्क बड़ा सीधा है। क्या पाकिस्तान वाकई ईरान के खिलाफ परमाणु बम इस्तेमाल करने की हिम्मत करेगा? क्या तुर्की अपने आर्थिक हितों को दांव पर लगाकर ईरान से सीधी दुश्मनी लेगा?  ईरान इसे सिर्फ एक दिखावा बता रहा है ताकि सऊदी अरब अपनी जनता को दिखा सके कि वो सुरक्षित है। भारत का इन सब से क्या लेना देना? भारत के लिए स्थिति थोड़ी जटिल है। सऊदी अरब के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से सबसे अच्छे दौर में है। लेकिन पाकिस्तान और तुर्की का गठजोड़ हमेशा भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है। चाहे कश्मीर का मुद्दा हो या इंटरनेशनल फोरम। तुर्की ने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है। अगर पाकिस्तान इस डिफेंस पैक के बहाने तुर्की के एडवांस टेक्नोलॉजी हासिल करता है और सऊदी के फंड से अपनी सैन्य मशीनरी को आधुनिक बनाता है तो ये भारत की सुरक्षा के लिए एक चुनौती बन सकता है।  हालांकि भारत को भरोसा है कि सऊदी अरब कभी भी भारत के हितों के खिलाफ इस पैक का इस्तेमाल नहीं होने देगा क्योंकि भारत सऊदी के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बाजार है। 
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