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    कागजों में 27 साल पहले मर चुका आरोपी:स्कूटी चलाते देखा तो खुला राज, कोर्ट ने भेजा जेल

    1 hour ago

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    999 से चल रहे मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने खुद को ही कागजों में मृत साबित कर दिया। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर कोर्ट से केस भी बंद करा लिया, लेकिन स्कूटी चलाते पकड़ा गया। 27 साल से खुद को मुर्दा बता रहा आरोपी सोमवार को जिंदा कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। मामला विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता की अदालत का है। राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि के बीच कूटरचित दस्तावेज के आरोप में 1999 से मुकदमा लंबित है। इस केस में विद्या देवी, चुन्नी लाल गोयल और रोशन लाल वर्मा की मौत हो चुकी है, जिस पर कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई खत्म कर दी थी। इसी केस में गांधी नगर निवासी ताराचंद शर्मा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुए थे। फर्जी प्रमाणपत्र से बंद कराई कार्रवाई गिरफ्तारी से बचने के लिए ताराचंद ने 2013 में नगर निगम का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र कोर्ट में पेश कर दिया। इसमें उसे 1998 में मृत दिखाया गया था। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी 13 अगस्त 2013 को आख्या देकर इसकी पुष्टि कर दी। दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट को सही मानते हुए कोर्ट ने 20 सितंबर 2013 को आरोपी के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दी थी। स्कूटी चलाते दिखा तो खुला भेद थाना हरीपर्वत के घटिया आजम खां निवासी वादी राजकुमार वर्मा ने 5 नवंबर 2025 को ताराचंद को गांधी नगर में स्कूटी चलाते देख लिया। उन्होंने फोटो खींच ली और स्कूटी नंबर से RTO से दस्तावेज निकलवाए। जांच में सामने आया कि जिसे कोर्ट ने 1998 में मृत मान लिया था, उसने जुलाई 2016 में अपने ही नाम से नई स्कूटी रजिस्टर्ड कराई थी। वह बैंक खातों में मोबाइल बैंकिंग भी इस्तेमाल कर रहा था। राजकुमार ने कोर्ट में साक्ष्य के साथ प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट के आदेश पर थाना न्यू आगरा के दरोगा मधुर कुशवाह ने जांच की तो ताराचंद अपने घर पर जिंदा मिला। उसकी और उसके बेटे की फोटो भी कोर्ट में पेश की गईं। इसके बाद कोर्ट ने वारंट जारी किया।सोमवार को ताराचंद ने कोर्ट में सरेंडर किया। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर उसे जेल भेज दिया।
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