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    कागजों में अटकी जमीन, योजनाओं से वंचित किसान:सिद्धार्थनगर में 4585 नामांतरण प्रकरण लंबित

    1 hour ago

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    सिद्धार्थनगर हजारों किसानों की जमीन अभी भी राजस्व अभिलेखों में उनके नाम दर्ज नहीं हो पाई है। नामांतरण (खारिज-दाखिल) के कुल 4585 मामले लंबित होने के कारण किसान सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और फसल बीमा जैसे आवश्यक लाभों से वंचित हो रहे हैं। जमीन का बैनामा या उत्तराधिकार होने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होने से किसानों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्हें बार-बार तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और धन दोनों का अपव्यय हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार, सर्वाधिक 1673 मामले डुमरियागंज तहसील में लंबित हैं। इसके अतिरिक्त, बांसी तहसील में 1071, नौगढ़ में 946, शोहरतगढ़ में 695 और इटवा तहसील में लगभग 200 नामांतरण प्रकरण निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। धारा 34 और 67 के तहत बड़ी संख्या में मामले तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक और नायब तहसीलदार के न्यायालयों में लंबित हैं। नामांतरण में इस देरी का सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है। कई किसान बैंक से ऋण प्राप्त करने में असमर्थ हैं, जिससे उनकी खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अद्यतन अभिलेख अनिवार्य होते हैं, लेकिन लंबित नामांतरण के कारण पात्र किसान भी इन लाभों से वंचित रह जा रहे हैं। जमीन की खरीद-फरोख्त और अन्य राजस्व कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं। राजस्व अधिकारियों ने बताया कि मामलों की अधिक संख्या और कई प्रकरणों में आपत्तियां दर्ज होने के कारण निस्तारण में समय लग रहा है। तहसीलदारों के अनुसार, नियमानुसार नामांतरण का निस्तारण 45 दिन के भीतर किया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव ने राजस्व कर्मियों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने को कहा है ताकि किसानों को जल्द राहत मिल सके। नामांतरण की धीमी प्रक्रिया ने किसानों की उम्मीदों पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। किसान अब प्रशासन से समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि उनकी जमीन कागजों में भी उनके नाम हो सके और वे बिना किसी बाधा के सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।
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