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    कानपुर के शुक्लागंज में 500 घर डूबे, गंगा उफनाई:महिलाएं बोलीं- घरों में कैद होने को मजबूर; गलियों में चल रही नाव

    7 hours ago

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    गंगा का जलस्तर बढ़ने से कानपुर-उन्नाव के किनारे बसे इलाकों की मुसीबत बढ़ गई है। चंपा खेड़ा, नितुआ, गगनी खेड़ा और मोहम्मदनगर गोताखोर समेत कई इलाकों के 500 से ज्यादा घर बाढ़ के पानी की चपेट में हैं। हालात ऐसे हैं कि गलियों में 7 से 8 फुट तक पानी भर गया है और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। काम पर जाने से लेकर राशन लाने और बच्चों के स्कूल जाने तक के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। दैनिक भास्कर की टीम शुक्लागंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव से पहुंची तो गलियों में पानी के बीच जिंदगी चलती दिखाई दी। कहीं लोग नाव का घंटों इंतजार करते मिले तो कहीं घरों पर ताले लटके नजर आए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 15 से ज्यादा नावें खड़ी, लेकिन नाविक नहीं उन्नाव के शुक्लागंज के चंपा खेड़ा, नितुआ, गगनी खेड़ा और मोहम्मदपुर गोताखोर इलाके गंगा के बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। यहां की गलियों में डुबाऊ पानी भरा है। दैनिक दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची तो कहीं घरों के बाहर लोग बैठे नजर आए, तो कहीं दरवाजों पर ताले लटके मिले। बाढ़ के पानी से डूबी गलियों में नाव ही लोगों के आने-जाने का सहारा बनी हुई है। कोई नाव से घर का सामान लेकर लौट रहा है, तो कोई राशन लेने के लिए बाहर आ रहा है। इलाके के किनारे 15 से ज्यादा नावें खड़ी हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले नाविकों की संख्या कम है। एक नाव के जाने के बाद लोगों को दूसरी नाव के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाव समय पर मिल जाए तो वे काम पर जा पाते हैं, लेकिन नाव न मिलने पर घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। राशन लेने के लिए भी नाव का इंतजार मोहम्मदनगर की गुलनाज ने बताया कि मैं घर पर अकेली थी और राशन लेने के लिए बाहर निकलना था। काफी देर इंतजार के बाद नाव पहुंची, जिसके बाद मैं राशन लेने के लिए निकली। गुलनाज ने बताया कि पानी भरने के बाद घर के लोगों का काम पर जाना बंद हो गया है। नाव मिल जाए तो बाहर निकलना संभव होता है, लेकिन नाव नहीं मिलने पर घर में ही फंसे रहना पड़ता है। दूध जैसी जरूरी चीजों के लिए भी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। पानी घरों के आसपास जमा होने के कारण लोगों को डर रहता है कि कोई जलीय जीव घर के अंदर न आ जाए। हर साल यही परेशानी झेलते हैं लोग नूर अली ने बताया कि इलाके में हर साल गंगा का पानी इसी तरह भर जाता है। बाढ़ के दौरान काम पर जाना मुश्किल हो जाता है और नाव समय पर नहीं मिलने पर लोग घरों से निकल नहीं पाते। दिलशाद ने बताया कि काम के लिए बाहर निकलने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी लौटते समय होती है। रात में देर होने पर नाव नहीं मिलती, ऐसे में लोगों को मजबूरी में वहीं रुकना पड़ता है। तौफीक ने बताया कि इलाके में नावों की संख्या कम है। एक नाव के जाने के बाद लोगों को दोबारा उसके लौटने का इंतजार करना पड़ता है। बच्चों के स्कूल और कोचिंग जाने में भी परेशानी हो रही है। घरों में घुस रहे पानी के जलीय जीव स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी भरने के बाद कई घरों में जलीय जीव पहुंच रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वह कई घंटे से नाव का इंतजार कर रहे थे, लेकिन नाव नहीं मिल सकी। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि घरों के आसपास पानी भरा होने के कारण दिनभर आवाजाही मुश्किल रहती है और रात में खतरा और बढ़ जाता है। सुबह से रात तक नाव चला रहा आयूब नाव चालक आयूब ने बताया कि वह सुबह करीब 6 बजे से नाव चलाना शुरू करता है और रात 9 से 10 बजे तक लोगों को लाने-ले जाने का काम करता है। बाढ़ के दौरान उसकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है, क्योंकि इलाके के लोगों की आवाजाही पूरी तरह नावों पर निर्भर हो गई है। आयूब ने बताया कि प्रशासन की ओर से नाव चलाने का मेहनताना दिए जाने की बात कही जाती है, लेकिन भुगतान को लेकर दिक्कत रहती है। उसने कहा कि कई बार जो बताया जाता है, उसके मुताबिक भुगतान नहीं मिलता।
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