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    कानपुर में फोड़े के ऑपरेशन के बाद बच्ची की मौत:झटके लगकर बेहोश होने लगी, मां की गोद में तड़पकर दम तोड़ा

    19 hours ago

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    कानपुर में पैर के मामूली फोड़े के ऑपरेशन के बाद 9 साल की बच्ची की मौत हो गई। ऑपरेशन थिएटर से निकलते ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसे हिचकी आई, फिर झटके लगने लगे। मां की गोद में ही बार-बार झटके लगते और बेहोश हो जाती। परिवार इलाज के लिए गिड़गिड़ाया, तो अस्पताल स्टॉफ ने कहा कि थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी। थोड़ी देर तक ऐसे ही बेहोश होती रही, फिर मां की गोद में ही उसने दम तोड़ दिया। ऑपरेशन के करीब 4 घंटे बाद ही बच्ची की मौत हो गई। परिवार ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर लापता हो गए। हम गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे। हॉस्पिटल में कोई भी ड्यूटी डॉक्टर नहीं था। जब तक डॉक्टर पहुंचे बच्ची ने दम तोड़ दिया। उसके बाद डॉक्टर और अस्पताल स्टाॅफ वहां से भाग गया। परिजनों ने हॉस्पिटल संचालक के खिलाफ रावतपुर थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। घटना रावतपुर में नमक फैक्ट्री चौराहा पर देव ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल की है। अब विस्तार से पढ़िए मामला… बर्रा-8 के सी-ब्लॉक के मकान नंबर 289 में रहने वाले राहुल सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनके 2 बच्चे थे, बेटी आरूषी (09) और बेटा आरूष (07)। राहुल सिंह ने बताया- आरूषी के पैर में फोड़ा था। मैंने नमक फैक्ट्री चौराहा स्थित देव ऑर्थोपेडिक सेंटर हॉस्पिटल के डॉक्टर टीपी सिंह को दिखया था। डॉक्टर ने पैर में मवाद पड़ने की वजह से छोटा सा ऑपरेशन कराने की सलाह दी। 21 फरवरी की दोपहर 1.30 बजे आरूषी को एडमिट कराया। 22 फरवरी को दोपहर करीब 1.20 बजे बेटी ऑपरेशन थियेटर में गई। करीब 45 मिनट बाद उसे बाहर लाया गया। आने के कुछ ही देर बाद उसे हिचकी आई। उसके बाद उसे प्यास लगी।अस्पताल स्टॉफ ने कहा कि पानी नहीं पिलाना है। इसलिए उसे पानी नहीं पिलाया। थोड़ी देर बाद वह कांपने लगी, उसे झटका लगने लगा। वह बार-बार बेहोशी की हालत में जाने लगी। स्टाफ यही कहता रहा कि थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी। लेकिन हर थोड़ी देर में वह बेहोश होती रही। इसी तरह चार घंटा हो गया और उसकी सांस थम गई। डॉक्टर उसकी मौत के बाद आए। पिता बोले- हम स्टॉफ के आगे-पीछे दौड़ते रहे पिता राहुल ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद ही बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी। हॉस्पिटल में कोई डॉक्टर नहीं था। हम लोग गिड़गिड़ाते रहे। ऑपरेशन करने वाले डॉ. टीपी सिंह को बुलाने की मिन्नत करते रहे, लेकिन किसी ने एक नहीं सुना। बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई और करीब 4 घंटे बाद डॉ. टीपी सिंह पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची ने अपनी मां दीपिका की गोद में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। हम रोते हुए हाॅस्पिटल स्टॉफ के आगे-पीछे दौड़ते रहे, मिन्नतें करते रहे लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। मामा बोले- डॉक्टर ने ध्यान नहीं दिया बच्ची के मामा अभय सिंह ने बताया कि बच्ची के पैर में ज्वाइंट के पास पस था। डॉक्टर टीपी सिंह ने नॉर्मल ऑपरेशन करने की बात कही थी। रविवार दोपहर ऑपरेशन के बाद वह ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकली, तब ही उसकी हालत गंभीर थी। स्टाफ नर्स ने कॉल करके डॉक्टर टीपी सिंह को बताया कि बच्ची की हालत गंभीर है। इसके बाद भी डॉक्टर नहीं पहुंचे। कॉल करने के करीब आधा घंटे बाद डॉक्टर पहुंचे, लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो गई थी। हॉस्पिटल में कोई भी इंतजाम नहीं है। हॉस्पिटल में आईसीयू नहीं है। बच्ची का बीपी और पल्स चेक करने का भी कोई प्रबंध नहीं था। ऑपरेशन से पहले 61 हजार जमा कराए पिता राहुल ने बताया कि वह प्राइवेट जॉब करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हॉस्पिटल प्रबंधन ने ऑपरेशन के नाम पर पहले ही 35 हजार रुपए और दवा के नाम पर 26 हजार रुपए जमा कराए थे। 61 हजार रुपए एडवांस में जमा कराने के बाद भी हंसते-खेलते अस्पताल गई बच्ची की लाश हमें वापस मिली। इस तरह के डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। बच्ची की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल में हंगामा किया। रावतपुर पुलिस को जानकारी दी। सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। जांच के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी बोले- बच्ची की मौत की जानकारी मिली है। परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीएमओ की जांच रिपोर्ट के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… शंकराचार्य पर रविंद्र पुरी बोले-अगर आरोप सही तो दंड मिले:योगेश्वरी ने कहा- छवि खराब करने की कोशिश; बच्चों से कुकर्म पर संत समाज बंटा प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश 2 नाबालिग बच्चों के गंभीर आरोपों के आधार पर है। कोर्ट के इस आदेश के बाद मामला कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। पूरी खबर पढ़ें…
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