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    कानपुर RTO में सीनियर क्लर्क समेत 15 पर FIR:11 एजेंट अरेस्ट, 12 घंटे से रेकी कर रही थी क्राइम ब्रांच, कच्चे पर्चें पर लाखों का हिसाब

    3 hours ago

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    कानपुर आरटीओ में छापेमारी के दौरान बहुत सी विसंगतियों का खेल सामने आ गया। जिला प्रशासन और क्राइम ब्रांच टीम के संयुक्त आपरेशन में वाहनों के नीलामी टेंडर में एक बड़ा घपला सामने आया। छापेमारी के दौरान पुलिस को नीलामी में हिस्सा लेने वालों का लेखा–जोखा कच्चे पर्चे में लिखा मिला। सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा के चालान सेक्शन में जब टीम पहुंची तो वहां जमा रकम में 15 हजार रुपए कम मिले। एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके ने 15 हजार रुपए कम होने के बारे में पूछा, तो मधुर मिश्रा ने बताया कि काउंटर पर किसी ने चालान फार्म फेंक दिया, और बिना पैसे जमा किए चला गया, भूलवश उसके पैसे जमा हो गए। सीनियर क्लर्क का यह जवाब टीम के गले नही उतरा। कच्चे कागज पर लेखा जोखा करने के बारे में पूछने पर जिम्मेदार अधिकारी बगले झांकने लगे। कैश बाबू नहीं दे सके 7.50 हजार का ब्योरा वहीं कैश डिपार्टमेंट में छापेमारी के दौरान बाबू विपिन कुमार के पास 7.50 हजार रुपए का ब्योरा नहीं दे सके, जिसके बाद वह भी शक के घेरे में आ गए। देर रात काकादेव थाने में सर्वोदय नगर चौकी प्रभारी डालचंद्र और ट्रक चालक कामता प्रसाद की तहरीर बाबू विपिन कुमार, सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। 11 एजेंटों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जबकि बाबू, सीनियर क्लर्क और दो एजेंट फरार हैं। एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि मंगलवार शाम तक पूरी रिपोर्ट एसडीएम अनुभव सिंह डीएम को सौंपेंगे, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुछ इस तरह से हुई छापेमारी की शुरुआत भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे आरटीओ विभाग की शिकायत लंबे समय से प्रशासनिक अधिकारियों को मिल रही थीं। हमीरपुर के ट्रक ड्राइवर कामता प्रसाद की शिकायत के बाद विभाग में छापेमारी की पूरी भूमिका निर्धारित की गई। आम दिनों की तरह ही सोमवार को आरटीओ कार्यालय के बाहर सुबह से ही दलालों की चहल-पहल रही। कोई वाहन स्वामी को कागज पूरे कराने का भरोसा दिला रहा था तो कोई काम जल्दी कराने का दावा करता नजर आया। दोपहर तक रेकी करती रहीं क्राइम ब्रांच की टीमें क्राइम ब्रांच की टीम ने सोमवार सुबह 10 बजे से ही सादी वर्दी में सिपाहियों को परिसर में भेज दिया था। इस दौरान टीम दलालों और बाबुओं की रेकी कर रही थी। सारथी भवन के पीछे रेलवे लाइन बिछी है, बाउंड्री फांदकर उस रास्ते पर कोई दलाल न भाग पाए इसके लिए टीम ने बाउंड्री के पास पहले से ही पुलिस लगा दी थी। वहीं बाहर रेलवे लाइन की तरफ भी सिपाही तैनात कर दिए गए थे। एजेंट और बाबू चिन्हित होने और आरटीओ कार्यालय की स्थितियों से अच्छी तरह से वाकिफ होने के बाद दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर क्राइम ब्रांच और प्रसाशन की टीम ने छापेमारी की। अचानक पुलिस की दो गाड़ियां पहुंचते ही आरटीओ परिसर का पूरा माहौल बदल गया। मिनटों में आरटीओ कार्यालय और बाहर मंडराने वाले दलालों में अफरा-तफरी मच गई। सड़क किनारे लगने वाली दुकानों के कंप्यूटर और फोटो कापी मशीनें जमीन पर बिखरी पड़ी थीं। पुलिस के दोनों मुख्य गेट बंद करते ही हर कोई जहां का तहां फंसकर रह गया। सड़क पर बने डिवाइडर पर लोग खड़े होकर अंदर का नजारा देखते रहे। भागने वाले रास्तों पर खड़ी मिली पुलिस जहां से दलालों के भागने के रास्ते थे, वहां पर पहले से सादी वर्दी में सिपाही तैनात था। ड्रोन सर्वे करने के बाद टीम जब पुलिस फोर्स के साथ अंदर पहुंची तो सिपाही चारो तरफ परिसर में फैल गए। इस दौरान जो दलाल प्रशासनिक बिल्डिंग में और सारथी भवन पसिर में अड्डा बनाकर बैठते थे वो भागने में फेल हो गए। पुलिस ने उनसे बिना कुछ पूछताछ किए उन्हें पकड़कर सीधा गाड़ी के अंदर बैठा दिया। इसके बाद कई दलाल हाथ में जो कागज लिए थे वो वहीं पर फेंककर चुपचाप आम आदमी बनकर निकल गए। पुलिस ने घेराबंदी की बाहर बैठे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। आरटीओ के बाहर अचानक सन्नाटा पसर गया। पुलिस का पहरा दिखाई देने लगा। आने-जाने वालों को रोक दिया गया। बाहर की हलचल के बीच कार्यालय के अंदर भी माहौल तनावपूर्ण हो गया। भारी पुलिस बल के बीच कर्मचारियों से पूछताछ शुरू हुई। प्रशासनिक बिल्डिंग में पुलिस और कमरे में बैठे बाबू ही नजर आ रहे थे। जिस गैलरी में सुबह से शाम तक हलचल होती थी उसमें पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। कमरे में बाबू किसी से बात नहीं कर रहे थे। हर किसी के चेहरे पर कार्रवाई का डर था।
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