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    कानपुर सांसद ने राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक पेश किया:रमेश अवस्थी बोले- पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की विजयी विश्व तिरंगा प्यारा... को मिले विधिक मान्यता

    3 hours ago

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    कानपुर सांसद रमेश अवस्थी ने शुक्रवार को लोकसभा में राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक-2026 पेश किया। उन्होंने ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ को राष्ट्रीय ध्वज गीत के रूप में विधिक मान्यता देने की मांग उठाई। सांसद ने कहा कि तिरंगा भारत की प्रभुसत्ता, सामूहिक संकल्प और देशवासियों के बलिदान का सर्वोच्च प्रतीक है। ‘तिरंगा हमारी धड़कन और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक’ लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए रमेश अवस्थी ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई ऐसी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां सामने आईं, जिन्होंने भाषा और भौगोलिक सीमाओं को पार कर पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। उन्होंने कहा कि कानपुर निवासी पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ द्वारा रचित ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ ऐसी ही कालजयी रचना है। एक सदी से अधिक समय से यह गीत राष्ट्रीय ध्वज के साथ देशवासियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। अब तक नहीं मिली थी कानूनी मान्यता सांसद ने कहा कि ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ लंबे समय से देश में राष्ट्रीय ध्वज गीत के रूप में प्रतिष्ठित है, लेकिन इसे अब तक औपचारिक विधिक मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इस गीत को कानूनी मान्यता देना सिर्फ एक रचना को मान्यता देना नहीं होगा, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी देश की गौरवशाली विरासत को संवैधानिक और औपचारिक स्वरूप देना होगा। नरवल में हुआ था श्यामलाल गुप्त का जन्म ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ के रचयिता श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का जन्म 9 सितंबर 1896 को कानपुर जिले के नरवल गांव में हुआ था। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ पत्रकार, समाजसेवी और शिक्षक भी थे। श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी से प्रभावित थे। बताया जाता है कि उनकी प्रेरणा से उन्होंने 3 और 4 मार्च 1924 की रात ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ गीत की रचना की थी। स्वतंत्रता आंदोलन में गीत बना था जनभावना की आवाज ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना की आवाज बन गया। तिरंगे के सम्मान और देश की आजादी की भावना से जुड़े इस गीत ने लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया।
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