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    कैसे बनीं दीप्ति दुनिया की बेस्ट विमेंस ऑलराउंडर:हॉकी बॉल से छक्के लगाने की प्रैक्टिस की, टी-20 में सबसे ज्यादा 191 विकेट लिए

    7 hours ago

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    क्रिकेट में शतक लगाना किसी भी बल्लेबाज के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। लेकिन क्या हो, जब 113 रन की पारी खेलने के बाद भी कोच कहे कि बल्लेबाजी में कमी रह गई? भारतीय ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा के करियर में ऐसा ही एक वाकया हुआ। 1 अप्रैल 2021 को घरेलू वनडे टूर्नामेंट में बंगाल की ओर से खेलते हुए दीप्ति ने रेलवे के खिलाफ शतक लगाया। सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाज थे। इसके बावजूद बंगाल के कोच चरणजीत सिंह का मानना था कि दीप्ति अपनी पारी में 25-30 रन और जोड़ सकती थीं। यह आलोचना उनके शतक को कमतर दिखाने के लिए नहीं थी। कोच ने बल्लेबाजी की एक खास कमी पहचानी थी। दीप्ति ऑफ-साइड में आसानी से रन नहीं बना पा रही थीं। यहीं से शुरू हुई दीप्ति की खुद को बेहतर बनाने की कोशिश। उन्होंने अपनी कमियों को स्वीकार किया, कोच से मदद मांगी और उन शॉट्स पर मेहनत की, जिनमें वह पीछे रह रही थीं। 17 साल की उम्र में डेब्यू दीप्ति ने 17 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। 2017 में उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ 188 रन की पारी खेली। यह भारतीय महिला क्रिकेट में वनडे का रिकॉर्ड व्यक्तिगत स्कोर बना हुआ है। दीप्ति की तकनीक अच्छी थी, लेकिन उनकी बल्लेबाजी की कुछ सीमाएं भी सामने आने लगीं। वह पारी की शुरुआत धीमी करती थीं, विकेटों के बीच दौड़कर रन लेने में उतनी तेज नहीं थीं थी। इसी कारण वनडे में उन्हें नंबर-1 से लेकर नंबर-9 तक अलग-अलग क्रम पर आजमाया गया। टीम को यह तय करने में मुश्किल होती रही कि उनकी बल्लेबाजी का सबसे अच्छा इस्तेमाल कहां किया जाए। कई बार स्मृति मंधाना या शेफाली वर्मा की तेज शुरुआत के बाद रन बनाने की गति धीमी पड़ जाती थी। मध्य ओवरों में रन कम बनने से दूसरे बल्लेबाजों पर ज्यादा जोखिम लेने का दबाव आता था। इस तरह दीप्ति की बल्लेबाजी की समस्या सिर्फ उनका व्यक्तिगत मामला नहीं था। इसका असर पूरी टीम पड़ता था। कोच के पास पहुंचीं, ऑफ साइड खेलने पर ध्यान दिया जब दीप्ति को अपनी कमियों का अहसास हुआ, तो उन्होंने खुद समाधान खोजने की कोशिश की। उन्होंने चरणजीत सिंह से संपर्क किया। कोविड-19 के दौरान उन्होंने कोच के साथ बैट की स्पीड बढ़ाने, छोटी गेंदों को पुल करने और गेंद को बेहतर तरीके से उठाकर मारने पर काम किया। चरणजीत ने इसके साथ ऑफ-साइड में शॉट खेलने की क्षमता सुधारने पर भी जोर दिया। उनका लक्ष्य था कि दीप्ति कट शॉट खेल सकें और गेंद को मिड-ऑफ की दिशा में भी ताकत से मार सकें। । हॉकी बॉल और टेनिस बॉल से छक्के लगाने की प्रैक्टिस दीप्ति की ट्रेनिंग का एक तरीका सामान्य क्रिकेट अभ्यास से अलग था। चरणजीत ने उन्हें हॉकी बॉल, टेनिस बॉल और दूसरी तरह की गेंदों से शॉट लगाने का अभ्यास कराया। इसका उद्देश्य सिर्फ ताकत बढ़ाना नहीं था, बल्कि अलग-अलग गति और उछाल वाली गेंदों पर समय रहते बल्ला चलाना सीखना था। हॉकी बॉल से अभ्यास करने के पीछे खास तर्क था। कोच के मुताबिक, इस गेंद से बल्लेबाज की बैट-स्पीड और गेंद को सही समय पर हिट करने की क्षमता की परीक्षा होती है। गेंदबाजी के लिए टायर के बीच से गेंद निकालने का अभ्यास चरणजीत ने दीप्ति की गेंदबाजी सुधारने के लिए भी अलग-अलग तरीके अपनाए। उन्हें अलग आकार और वजन की गेंदों से गेंदबाजी कराई गई। अभ्यास में पत्थरों का इस्तेमाल भी किया गया। एक ड्रिल में दीप्ति को टायर के बीच बने छोटे से खाली हिस्से से गेंद निकालने की कोशिश करनी होती थी। इसका पहला मकसद गेंद पर नियंत्रण और सटीकता बढ़ाना था। जब गेंदबाज को छोटे लक्ष्य पर गेंद डालने की आदत पड़ती है, तो सामान्य गेंद से अभ्यास करते समय लाइन और लेंथ पर नियंत्रण बेहतर करने में मदद मिल सकती है। आंकड़ों में दिखा बदलाव, टी-20 में तेजी से रन बनाने लगीं जून 2022 से पहले और उसके बाद के आंकड़ों की तुलना में दीप्ति की बल्लेबाजी की गति में सुधार दिखाई देता है। स्ट्राइक रेट बताता है कि बल्लेबाज हर 100 गेंदों पर औसतन कितने रन बना रहा है। वनडे में उनका स्ट्राइक रेट 64.9 से बढ़कर 86.22 हो गया। टी-20 इंटरनेशनल में यह 90.21 से बढ़कर 121.21 पहुंचा। इसका मतलब है कि टी-20 में वह पहले के मुकाबले तेजी से रन बनाने लगीं। बारिश में भी अभ्यास, थकान को बहाना नहीं बनातीं चरणजीत के मुताबिक, दीप्ति की सबसे बड़ी ताकत लगातार सीखने और हार न मानने की आदत है। वह सिर्फ बल्लेबाजी या गेंदबाजी में ही नहीं, फील्डिंग में भी सुधार के लिए मेहनत करती हैं। बारिश होने पर भी अभ्यास जारी रखने के लिए वह जमीन पर प्लास्टिक शीट बिछा लेती थीं, ताकि फिसलने पर चोट लगने का जोखिम कम रहे। नंबर-7 पर नई भूमिका, लेकिन सुधार की गुंजाइश बाकी पांच साल तक अपनी पावर-हिटिंग और ऑफ-साइड खेल पर काम करने के बाद दीप्ति की बल्लेबाजी पहले से बेहतर हुई है। अब उन्हें आम तौर पर नंबर-7 पर उतारा जाता है, जहां उनसे पारी के आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने की उम्मीद होती है। हालांकि, कोच चरणजीत मानते हैं कि दीप्ति अभी इस भूमिका में पूरी तरह तैयार नहीं हुई हैं। उनके बड़े शॉट लगाने की क्षमता और ऑफ-साइड में विकल्प बेहतर हुए हैं, लेकिन दोनों क्षेत्रों में आगे सुधार की गुंजाइश है। महिला टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लिए महिला टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट दीप्ति शर्मा के नाम हैं। वे 191 विकेट ले चुकीं हैं। उनका बेस्ट प्रदर्शन 10 रन देकर 5 विकेट है। दूसरे नंबर पर थाईलैंड की थिपाचा पुथावोंग हैं, जिन्होंने 2019 से 2026 के बीच 111 मैचों में 173 विकेट लिए हैं।
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