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    किसान ने 6 बीघा गेहूं की खड़ी फसल जोत डाली:बोले– रात भर पहरा दो, फिर भी फसल नहीं बचती, आवारा पशुओं ने खाकर की बर्बाद

    4 hours ago

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    हरदोई में एक किसान ने आवारा पशुओं से परेशान होकर 6 बीघे की लहलहाती फसल जोत डाली। खुद ही गेंहू के खेत पर ट्रैक्टर चला दिया। उनका कहना है कि रातभर रखवाली करने के बाद भी फसल नहीं बच पाती। इसिलए खत्म ही कर दी। किसान की रात-दिन की मेहनत और लागत सब बेकार हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा गोवंशों को जल्द आश्रय स्थलों में भेजा जाए और जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। मामला पाली थाना क्षेत्र के लौकाह गांव का है। देखें 3 तस्वीरें… अब विस्तार से जानें पूरा मामला किसान विश्वेश्वर राजपूत ने छलकती आंखों से बताया कि जब फसल बचने की कोई उम्मीद ही नहीं रही तो खड़ी रखने का क्या फायदा? जो बचा था, वह भी पशु चर जाते। इसलिए शनिवार को उन्होंने गेहूं की 6 बीघा खेत को ट्रैक्टर से जोत डाला। विश्वेश्वर ने इस सीजन में 6 बीघा जमीन पर खाद, बीज, जुताई और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए। लेकिन क्षेत्र में आवारा गोवंशों के बढ़ते झुंड ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। इसे लेकर उन्होंने गांव के प्रधान से शिकायत भी की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय किसान बताते हैं कि रात भर खेतों में पहरा देने के बावजूद पशु खेत में घुस आते हैं। एक-दो नहीं, दर्जनों की संख्या में झुंड आता है। जितना भगाओ, फिर लौट आते हैं। कुछ दिन पहले भी ऐसा ही हुआ था। गोवंशों के एक बड़े झुंड ने खेत में घुसकर अधिकांश फसल चर ली। जो थोड़ा-बहुत बचा था, वह भी रोज नुकसान झेल रहा था। आखिरकार विश्वेश्वर ने हार मान ली। उन्होंने ट्रैक्टर मंगवाया और पूरी खड़ी फसल की जुताई कर दी। लागत और आमद मिलाकर करीब 60 हजार रुपए तक का नुकसान हुआ है। विश्वेश्वर का कहना है- “जब खेत में कुछ बचा ही नहीं, तो खड़ा रखने से क्या फायदा? आवारा पशुओं की समस्या से किसान कर्ज में डूब रहे हैं। लागत निकलना तो दूर, बीज और खाद के पैसे भी नहीं बचते।” उनका यह कदम इलाके के अन्य किसानों के लिए भी बेबस किसान का प्रतीक बन गया है। लौकाह ही नहीं, आसपास के गांवों में भी यही हाल है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में आवारा गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि कई बार ग्राम प्रधान और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई गई कि गोवंशों को पकड़कर गौशाला भेजा जाए। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशालाओं की कमी और अव्यवस्था के कारण पशु खुले में घूम रहे हैं और किसानों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं। कृषि लागत बढ़ने और फसल बर्बाद होने से किसान आर्थिक संकट में हैं। रात भर खेतों में पहरा देने से न तो पूरी नींद मिलती है, न ही फसल की गारंटी। एक अन्य किसान ने कहा, “दिन में खेत संभालो, रात में पहरा दो। फिर भी अगर फसल नहीं बचे तो किसान क्या करे?” फसल बचाए या खुद को ग्रामीणों का कहना है कि लौकाह गांव का यह दृश्य सिर्फ एक खेत की कहानी नहीं, बल्कि उस बड़े संकट की तस्वीर है जिससे प्रदेश के कई किसान जूझ रहे हैं। जब किसान अपनी ही लहलहाती फसल पर ट्रैक्टर चला दे, तो समझा जा सकता है कि दर्द कितना गहरा है। --------------------------- यह खबर भी पढ़िए- यूपी में शिक्षा मित्रों को अब 18 हजार रुपए मिलेंगे:अनुदेशकों की भी सैलरी बढ़ाई यूपी में पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले 1.70 लाख शिक्षा मित्र और अनुदेशकों को योगी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। शिक्षा मित्रों को अब 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। अभी तक शिक्षा मित्रों को 10 और अनुदेशकों को 9 हजार रुपए ही मिल रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…
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