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    KGMU लखनऊ में मजारों पर एक और नोटिस:4 अप्रैल तक बढ़ी समय-सीमा, रमजान और होली को देखते हुए प्रशासन ने दिया अतिरिक्त समय

    1 hour ago

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    लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रशासन ने परिसर में बनी मजारों को लेकर एक और नोटिस जारी किया गया है। पहले नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद गुरुवार, 26 फरवरी को विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोबारा नोटिस चस्पा कर दिया। इस बार रमजान और होली के मद्देनजर मजारों को हटाने की कार्रवाई की समय-सीमा बढ़ाकर 4 अप्रैल 2026 कर दी गई है। साथ ही संबंधित कमेटियों को 28 फरवरी तक कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। 22 जनवरी को जारी हुआ था पहला नोटिस KGMU प्रशासन की ओर से 22 जनवरी को परिसर में स्थित मजारों को लेकर पहला नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में मजारों की वैधता, निर्माण की तिथि और उनसे जुड़े आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी निर्माण की वैधानिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। तय समय-सीमा 7 फरवरी रखी गई थी, लेकिन इस अवधि में केवल एक मजार कमेटी ने ही प्रशासन को जवाब सौंपा। बाकी कमेटियों की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर की मजार ने दिया जवाब न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर में स्थित एक मजार की कमेटी ने प्रशासन को लिखित जवाब देते हुए दावा किया है कि संबंधित मजार वर्ष 1947 से पहले की है। कमेटी के अनुसार यह मजार ऐतिहासिक महत्व रखती है और इसका अस्तित्व आजादी से पहले का है। प्रशासन ने इस दावे को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मजार के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पांच मजार कमेटियों की चुप्पी पर प्रशासन सख्त KGMU परिसर में स्थित अन्य पांच मजारों की कमेटियों ने पहले नोटिस पर कोई जवाब नहीं दिया। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक संस्थान की भूमि पर स्थित किसी भी ढांचे के संबंध में स्पष्ट और वैध दस्तावेज होना जरूरी है। इसी कारण गुरुवार को दोबारा नोटिस चस्पा कर सभी संबंधित कमेटियों को अंतिम अवसर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय तक जवाब नहीं दिया गया तो इसे असहयोग माना जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। त्योहारों को देखते हुए बढ़ाई गई समय-सीमा विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि रमजान और होली जैसे प्रमुख त्योहारों को देखते हुए कार्रवाई की समय-सीमा बढ़ाकर 4 अप्रैल 2026 कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले सभी पक्षों को पर्याप्त अवसर देना आवश्यक है, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें।
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