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    KGMU- पथरी मरीजों को कागजों पर दी कैंसर की दवा:एक मरीज को डाले 5 स्टेंट, यूरोलॉजी के बाद अब 7 विभागों में कराया जाएगा ऑडिट

    6 hours ago

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    बीमारी पेशाब या गुर्दे की पथरी की और इलाज कैंसर का। जी हां, यह पढ़कर भले ही आपको अपनी आंखों पर भरोसा न हो रहा हो, लेकिन यह सच हुआ है। केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के बजट से करोड़ों के दवा घोटाले की जांच में यह चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। विभाग में साधारण पेशाब संबंधी दिक्कतों से पीड़ित मरीजों को कागजों पर लाखों रुपए कीमत की कैंसर की दवाएं लगा दी गईं। इसके साथ ही लारी में एक ही मरीज को 5 स्टेंट डाले गए। इसी तरह की तमाम गड़बड़ियों पर यूरोलॉजी के बाद अब 7 अन्य विभागों में भी ऑडिट कराया जाएगा। यूरोलॉजी के दवा घोटाले की जांच STF कर सकती है। बता दें कि यूरोलॉजी विभाग में करीब ढाई करोड़ रुपए की दवा के घपले का मामला है। पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने मामले की जांच की। करीब 700 पेज की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया है कि कई मरीजों को पेशाब व गुर्दे में पथरी आदि की बीमारी थी। उनके यूएचआईडी (ओपीडी पंजीकरण) नंबर और असाध्य योजना कार्ड का बेजा इस्तेमाल किया गया। मरीजों के नाम पर महंगी-महंगी दवाएं हॉस्पिटल रिवॉल्विडंग फंड (एचआरएफ) के स्टोर से खरीदी गईं। करोड़ों का भुगतान करा दिया गया। फिर दवाओं की कालाबाजारी की गई। निजी मेडिकल स्टोर में बेचीं दवाएं सरकारी धन की बंदरबांट में घोटालेबाजों ने मरीजों की बीमारी को भी ध्यान नहीं रखा। कैंसर की महंगी-महंगी दवाएं पेशाब, किडनी, प्रोस्टेट, पथरी आदि से पीड़ितों के नाम पर मंगा दी। कागजों पर मरीजों को दवाएं लगाई। उसके बाद निजी मेडिकल स्टोर में दवाओं की बिक्री कर डाली। मृत मरीज के नाम पर दवा घोटाला हरदोई निवासी मरीज गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। मरीज की दोनों किडनी फेल हो चुकी थी। केजीएमयू में मरीज की डायलिसिस चल रही थी। घोटालेबाजों ने गुर्दे के मरीज को कैंसर की दवाएं लिखी। यही नहीं मरीज की मौत के बाद महीनों दवा मंगाते रहे। मृतक के असाध्य कार्ड व ओपीडी पंजीकरण नम्बर का बेजा इस्तेमाल किया। जांच में चौकाने वाले तथ्य आने के बाद कमेटी ने दवाएं कहां खपाई गईं, इस दिशा में जांच शुरू कर दी है। केजीएमयू की करोड़ों की दवाएं कौन खरीद रहा है? इसका मास्टर माइंड कौन है? कमेटी पुलिस की मदद से इस दिशा में जांच कर रही है। मरीजों के रिकॉर्ड की होगी पड़ताल लखनऊ में KGMU के यूरोलॉजी विभाग में सामने आए करोड़ों रुपए के दवा घोटाले के बाद सभी विभागों का विशेष ऑडिट कराने का फैसला किया है, जहां कैंसर मरीजों का इलाज किया जाता है और कीमोथेरेपी की महंगी दवाएं दी जाती हैं। जांच के दौरान पांच हजार से अधिक कीमत की दवाओं के बिल, वाउचर और मरीजों के रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। इन 7 विभागों के 5 महीने के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे KGMU में रेडियोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, गायनी ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और इंडोक्राइन सर्जरी विभाग में कैंसर मरीजों का इलाज किया जाता है। प्रशासन ने इन सभी विभागों के पिछले पांच माह के रिकॉर्ड की जांच कराने का निर्णय लिया है। मरीजों के दस्तावेजों का होगा सत्यापन ऑडिट के दौरान असाध्य, बीपीएल, विपन्न और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत इलाज पाने वाले मरीजों का पूरा ब्योरा खंगाला जाएगा। मरीजों के नाम, पते, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, राशन कार्ड, डॉक्टर की सलाह और भर्ती संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। महंगी कीमो और इम्यूनोथेरेपी दवाएं जांच के दायरे में KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि पांच सदस्यीय जांच समिति सभी सात विभागों की जांच करेगी। विशेष रूप से महंगी कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी दवाओं के उपयोग और खरीद की अलग से समीक्षा की जाएगी। तीन कर्मचारी बर्खास्त, वसूली की तैयारी यूरोलॉजी विभाग में सामने आए करीब ढाई करोड़ रुपए के दवा घोटाले में कार्रवाई शुरू हो गई है। डॉ. केके सिंह के मुताबिक तीन आरोपी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं सेवा प्रदाता एजेंसी को नोटिस जारी कर घोटाले की रकम की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। घोटाले के बाद बढ़ी निगरानी यूरोलॉजी विभाग में मरीजों के नाम पर महंगी कैंसर दवाएं खरीदकर उनके दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद KGMU प्रशासन अब कैंसर उपचार से जुड़े सभी विभागों में दवाओं की खरीद और वितरण प्रक्रिया की गहन जांच कर रहा है। इससे भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है। बार-बार स्टेंट डालने के करीब 15 मामले मिले इस बीच लारी कार्डियोलॉजी विभाग में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिकायत मिलने के बाद KGMU प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती पड़ताल में ऐसे करीब 15 मरीजों के मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ दिनों के अंतराल पर बार-बार स्टेंट डालने की प्रक्रिया अपनाई गई। इससे आयुष्मान योजना के बजट के दुरुपयोग की आशंका गहरा गई है। जांच के दौरान ऐसे मरीजों की फाइलें खंगाली जा रही हैं, जिन्हें कम समय के अंतराल में दोबारा भर्ती कर स्टेंट डाले गए। कुछ मामलों में एक ही मरीज को पांच-पांच स्टेंट लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि मरीज को दोबारा भर्ती किया गया तो उस दौरान उसकी स्वास्थ्य स्थिति क्या थी? कौन-कौन से लक्षण उभरे थे? दोबारा हस्तक्षेप की चिकित्सीय आवश्यकता क्यों पड़ी ? जांच के बाद सच्चाई आएगी सामने प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद आरोपों की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इलाज संबंधी दस्तावेज तलब किए हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या सभी प्रक्रियाएं स्थापित चिकित्सीय मानकों के अनुरूप की गईं या फिर आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाले भुगतान का लाभ लेने के लिए अनावश्यक हस्तक्षेप किए गए। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।
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