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    खिलाड़ियों और कोच में डिसिप्लिन का होना बहुत जरूरी:BFI के महासचिव पहुंचे वाराणसी, बोले - कॉमनवेल्थ में पदक के लिए तीन महीने पहले ही आश्वस्त था

    5 hours ago

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    हमारे यहां फोकस की कमी है। सिर्फ खिलाड़ियों ही नहीं बल्कि कोच में भी और अन्य लोगों में भी। कोच एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखकर कानाफूसी कर रहे हैं। यहां किसी को कहीं खड़ा कीजिये तो वो दो मिनट बाद दूसरी जगह दिखाई देगा। इसपर ध्यान देना होगा।' ये कहना है बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव प्रमोद कुमार का; प्रमोद कुमार मंगलवार को वाराणसी पहुंचे और यहां सिगरा स्टेडियम के SAI NCOE के रिंग में चल रही राज्य स्तरीय जूनियर बालिका बॉक्सिंग में शिरकत किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया की वो कॉमनवेल्थ गेम्स में 14 में से 14 खिलाड़ियों के पदक के लिए तीन महीने पहले ही आश्वस्त थे। इस दौरान उन्होंने कहा - गोल और फोकस दोनों को अलग-अलग समझना होगा। खिलाड़ियों और कोच दोनों को, लेकिन यहां कोच एक दूसरे के कंधे पर हाथ रख के खड़े हुए हैं। एक-दूसरे के साथ कानाफूसी कर रहे हैं। ये नहीं है अपने काम में फोकस। कॉमनवेल्थ में जहां हमें रुके थे वहां वालेंटियर्स लगे थे। जहां मै रुका था वहां से दो किलोमीटर दूर ग्राउंड था। हम वॉक करके सुबह जाते थे और शाम में जब वापस आते थे तो वो वहीं मिलता था। हमारे यहां क्या है की उसे नीचे खड़ा करोगे तो वह यहां नजर आएगा। ये चीजें हैं। इसमें सुधार की जरूरत है और डिसिप्लिन होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा उन्होंने कई प्रश्नों के जवाब दिए और मुक्केबाजी के भविष्य को लेकर दैनिक भास्कर से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… वाराणसी जैसी फेसिलिटी मिली तो यूपी होगा बॉक्सिंग में नंबर वन महसचिव बॉक्सिंग संघ प्रमोद कुमार ने बताया - बनारस में NCOE जो खुला है इससे बॉक्सिंग को बढ़ावा मिल रहा है। वाराणसी के इस सेंटर पर 6 रिंग लगे हुए हैं। पूरे हिन्दुस्तान में ऐसे रिंग कहीं पर नहीं हैं। जिस तरह का यहां लगे हैं। ऐसी फेसिलिटी अगर हमें बॉक्सिंग में मिलती गयी तो आने वाले दिनों में यूपी बॉक्सिंग नंबर वन हो जाएगा। लगातार प्रतियोगिताओं ने कॉमनवेल्थ की बनाई रूपरेखा उन्होंने आगे कहा - जिस तरह से कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल लेकर लड़कियां आयी हैं। उससे सिर्फ बॉक्सिंग ही नहीं हर खेल में लड़कियों का मान बढ़ा है और उनका झुकाव खेलों की तरफ होगा। हम लोगों ने पिछले तीन साल में उत्तर प्रदेश के नोएडा के अंदर हमने कम से कम 11 नेशनल कराए। कंटीन्यू प्रतियोगिता करवाने से हमें यह लाभ मिला है। बॉक्सरों ने कॉमनवेल्थ में सिर ऊंचा किया प्रमोद कुमार ने कहा - हमारे शुरू के बाउट बहुत ज्यादा टफ थे लेकिन सेमीफाइनल और फाइनल हमें ईजी मिले। लेकिन जो शुरू के मुकाबले थे वो बहुत स्ट्रांग खिलाड़ियों से थे। जिन्हे जीतने के लिए हमें संघर्ष करना पड़ा। लेकिन हम जीते और रिजल्ट सबके सामने है। और हमारे 14 में से 10 बॉक्सर ने 7 गोल्ड और तीन सिल्वर पदक जीतकर देश का और हमारा नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। तीन महीने पहले ही कह दिया था की आएगा गोल्ड प्रमोद कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों और पदक पर कहा - तीन महीने पहले एक आइओ मीटिंग करता है। इसमें हर सेक्रेटरी से पूछा जाता है की आप की तैयारी क्या है। कितने मेडल आएंगे उस मीटिंग में भी मैंने कहा था की हमारे 14 बॉक्सर जाएंगे और 14 के 14 मेडल जीतकर लाएंगे। हमारा यूपी का लड़का क्वार्टर फाइनल में हार गया सिर्फ 3-2 से; क्योंकि उसके साथ होस्ट कंट्री की बाऊट थी। पूरे के पूरे मेडल की उम्मीद थी हमें। एशियन गेम्स के लिए हम तैयार BFI के महसचिव प्रमोद कुमार ने आगे कहा - 17 सितंबर से एशियन गेम्स शुरू होने वाले हैं। उसमें हमें उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान का सामना करना पड़ेगा। हमारी लड़कियां पूरी तरह से तैयार हैं और हमारे लड़के भी तैयार हैं। हमारा पूरा चांस है कि हमें कई गोल्ड बॉक्सिंग में मिलेंगे। प्रधानमंत्री के बुलावे से खिलाड़ी गदगद प्रधानमंत्री द्वारा कॉमनवेल्थ के पदकवीरों को घर बुलाने पर प्रमोद मिश्रा ने कहा - नेचुरली किसी देश का हेड अगर खिलाड़ियों को बुलाएगा और सम्मान करेगा तो खिलाड़ी गदगद होंगे ही। हमारे खिलाड़ी भी गदगद हैं। जिस तरह उन्होंने खिलाड़ियों से बात की वह काफी सराहनीय है। इससे खिलाड़ी काफी उत्साहित हैं और आने वाले खिलाड़ी भी काफी रोमांचित हैं।
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