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    ‘खुद भूखे रहकर मुझे खिलाया’:12वीं के लखनऊ टॉपर सुभान बोले- सफल होकर मां को दिलाऊंगा घर; पापा के सपने को करूंगा पूरा

    1 hour ago

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    ‘मेरे पिता एक साड़ी की दुकान में काम करते हैं। महज 8 से 9 हजार सैलरी हैं। परिवार में माता-पिता के अलावा एक बड़ी बहन हैं। सीमित आमदनी के बावजूद मेरी सभी जरूरतें पूरी की गई। मेरे पेरेंट्स कई बार खुद भूखे रहे पर मुझे खिलाया। भविष्य में जब मैं सफल हो जाऊंगा तो उनकी सभी कमियों को दूर कर दूंगा।’ ये कहना हैं, यूपी बोर्ड के 12वीं के लखनऊ टॉपर, सुभान अली का। PCM से बारहवीं करने वाले सुहान को इंटरमीडिएट को 95% मार्क्स मिले हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुभान अली ने अपनी सफलता की कहानी को साझा किया। पढ़िए ये इंटरव्यू… 'खुद न खाकर मुझे खिलाया' सुभान ने बताया कि- उनके पापा रिजवान अली, अमीनाबाद में एक साड़ी की दुकान पर काम करते हैं। हम एक ‘बिलो-एवरेज’ फैमिली से आते हैं और हमारी सालाना आय काफी कम है। मेरी जरूरतों को पूरा करने के लिए मेरे माता-पिता ने अपनी कई ख्वाहिशों का त्याग किया है। उन्होंने खुद अच्छे कपड़े नहीं पहने, लेकिन मुझे दिलाए। कई बार ऐसा भी हुआ कि उन्होंने खुद भूखे रहकर मुझे खाना खिलाया। कंप्यूटर साइंस से इंजीनियर इंजीनियरिंग करने का लक्ष्य सुभान कहते हैं कि मैं आगे चलकर कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करना चाहता हूं। इसको लेकर मैंने खूब तैयारी भी की है। मेरी मम्मी अक्सर खुद के घर की बात कहती हैं। जब मैं सफल हो जाऊंगा तो सबसे पहले अपनी मां के लिए घर बनाऊंगा। मम्मी-पापा ने किया मोटिवेट सुहान कहते हैं कि एग्जाम के दौरान कई बार मैं खुद को स्ट्रेस में महसूस करता था। उस समय मेरी मम्मी ने मुझे काफी संभाला। वह हमेशा बिना किसी दबाव के पढ़ाई करने के लिए कहती थीं। सुहान ने कहा वो अपने पिता से भी मोटिवेट हुए हैं। ये कहते हुए सुहान थोड़ी देर के लिए भावुक नजर आए। सुहान ने बताया कि बीएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही बड़ी बहन ने भी उनको पढ़ाई के लिए प्रेरित किया है। टीचर को दिया सफलता का श्रेय सुभान कहते हैं कि सफलता का श्रेय मैं अपने टीचर्स को भी देना चाहता हूं। एसकेडी स्कूल के फाउंडेशन कोर्स को मैंने जॉइन किया था। यहां जो भी मेरे टीचर्स रहे उन्होंने बहुत अच्छे से कोर्स पूरा कराया। जिसकी बदौलत में ये नंबर ला सका। स्कॉलरशिप से पढ़ाई में मिली हेल्प सुभान कहते हैं कि दसवीं में उनके नंबर अच्छे आए थे।इसके बाद उनके स्कूल एसकेडी एकेडमी ने उन्हें स्कॉलरशिप दी। जिसकी बदौलत वो आसानी से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कर सके। सुभान कहते हैं कि आगे चलकर वो इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। 'सोशल मीडिया पर नहीं था एक्टिव' सुभान कहते हैं कि उन्होंने नियमित तरीके से पढ़ाई की है। रोजाना बिना किसी गैप के वो 2 से ढाई घंटे की सेल्फ स्टडी करते थे, इसके अलावा एग्जाम टाइम में करीब 8 से 9 घंटे रोज उन्होंने पढ़ाई की। बोर्ड परीक्षा के टॉपर होने के बाद क्या मैसेज देंगे सुभान कहते हैं कि मेरे हिसाब से बोर्ड में सफलता हासिल करने के लिए सबसे जरूरी है कंसिस्टेंसी के साथ पढ़ाई करना। हमेशा पॉजिटिव एटीट्यूड रखना चाहिए। मेरा मानना है कि मोटिवेशन से ज्यादा जरूरी कंसिस्टेंसी होती है। पियर प्रेशर को लेकर मैं यही कहूंगा कि यह मेरे लिए कभी मायने नहीं रखता था। मैंने हमेशा वही किया, जो मेरे टीचर्स ने बताया, और उसी पर फोकस रखा।
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