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    Kim Jong Un का 'परमाणु राज्याभिषेक', फिर बने North Korea के बेताज बादशाह, दुनिया के लिए खतरे की नई घंटी!

    3 hours from now

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    उत्तर कोरिया में एक बार फिर वही हुआ जिसकी उम्मीद थी, लेकिन जिस अंदाज़ में हुआ उसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। तानाशाह किम जोंग उन को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के महासचिव पद पर फिर से निर्विरोध चुन लिया गया है। सोमवार को सरकारी मीडिया (KCNA) ने घोषणा की कि हजारों प्रतिनिधियों ने "एकमत" से किम के नाम पर मुहर लगाई है। यह चुनाव महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि किम के उस 'परमाणु शस्त्रागार' को सलाम था जिसने एशिया से लेकर अमेरिका तक दहशत फैला रखी है।गत बृहस्पतिवार से शुरू हुई पार्टी कांग्रेस में किम अगले पांच वर्षों के लिए अपने प्रमुख राजनीतिक और सैन्य लक्ष्यों की रूपरेखा पेश कर सकते हैं। संकेत मिल रहे हैं कि वह परमाणु कार्यक्रम को और तेज करने पर जोर देंगे। उत्तर कोरिया के पास पहले से ही ऐसी मिसाइल मौजूद हैं जो एशिया में अमेरिकी सहयोगियों और अमेरिकी मुख्य भूमि तक को निशाना बना सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Afghanistan में Pakistan की बड़ी कार्रवाई, Air Strike कर 70 TTP आतंकियों को मारने का दावा विश्लेषकों का मानना है कि किम पारंपरिक सैन्य बलों को मजबूत करने और उन्हें परमाणु क्षमताओं के साथ एकीकृत करने के नए लक्ष्य घोषित कर सकते हैं। साथ ही वह चीन के साथ व्यापार में सुधार और रूस को हथियार निर्यात से मिली आर्थिक बढ़त के बीच ‘‘आत्मनिर्भरता’’ अभियान पर भी पुन: जोर दे सकते हैं। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि हजारों प्रतिनिधियों की ‘‘एकमत इच्छा’’ से किम को पार्टी का महासचिव चुना गया।इसे भी पढ़ें: Maharashtra Assembly का अनोखा Budget Session: इतिहास में पहली बार दोनों सदनों में नहीं होगा नेता प्रतिपक्ष वर्ष 2016 से हर पांच वर्ष में आयोजित इस कांग्रेस में शीर्ष नेता का चुनाव होता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि किम दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कड़े रुख को और संस्थागत रूप दे सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 2019 में वार्ता विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया का अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ कूटनीतिक संवाद ठप है। किम ने दक्षिण कोरिया को 2024 में स्थायी दुश्मन घोषित कर संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था।परमाणु शक्ति को 'अजेय' बनाने का मिशनपार्टी कांग्रेस में प्रतिनिधियों ने किम को उत्तर कोरिया के क्षेत्रीय प्रभाव और घातक परमाणु हथियारों को मजबूत करने का पूरा श्रेय दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि किम का यह नया कार्यकाल दुनिया के लिए और भी खतरनाक होने वाला है:मिसाइल टारगेट: उत्तर कोरिया के पास पहले से ही ऐसी मिसाइलें हैं जो अमेरिकी मुख्य भूमि और एशिया में उसके सहयोगियों को खाक करने की ताकत रखती हैं।नया सैन्य लक्ष्य: अटकलें हैं कि किम अब पारंपरिक सेना को परमाणु क्षमताओं के साथ पूरी तरह एकीकृत (Integrate) करने का नया ब्लूप्रिंट पेश करेंगेआत्मनिर्भरता का ढोंग: रूस को हथियारों के निर्यात और चीन के साथ व्यापार से मिली आर्थिक मजबूती के दम पर किम ने फिर से 'आत्मनिर्भरता' का राग अलापा है। 
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