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    'लोगों के दिमाग पर कब्जा जरूरी है':लेफ्टीनेंट जनरल अनिंद्य सेन बोले, अब सिर्फ सैन्य नहीं खबरों की भी जंग है

    6 hours ago

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    भारतीय सेना की मध्य कमान की ओर से आज लखनऊ छावनी स्थित सूर्य सभागार में उभरते सूचना क्षेत्र में सामरिक संचार विषय पर पहला स्ट्रेटिजिक कम्युनिकेशन कॉनक्लेव आयोजित किया जा रहा है। 4 सत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से सामरिक संचार की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पहले चरण में लेफ्टीनेंट जनरल अनिंद्य सेन गुप्ता ने कहा- रणनीतिक संचार करने वाले लोग हमेशा सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाले नहीं रह सकते हैं। यह कभी-कभी का काम नहीं होना चाहिए, किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं होना चाहिए। इसे संगठन में स्थापित करना होगा। सिद्धांतों पर आधारित रखना होगा। क्षमताओं से चलाना होगा। कहानियां देशों की सीमाएं पार कर जाती हैं अनिंद्य सेन गुप्ता ने कहा- हमें इस विषय पर फिर सोचना चाहिए। सूचना का क्षेत्र सिर्फ मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं है। यह एक जीवंत व्यवस्था है, जिसमें सरकारें, गैर-सरकारी लोग, AI सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, दुश्मन बॉट्स और डिजिटल प्रभाव शामिल हैं। कहानियां सभी देशों की सीमाओं को तेजी से पार कर जाती हैं, चाहे घटना हो रही हो या न हो। इसलिए लोग तथ्यों की जांच से पहले ही अपनी राय बना लेते हैं। ऐसे माहौल में रणनीतिक संचार को कुछ जरूरी काम करने हैं। जैसे- संदेश देना, कहानी को एकजुट रखना, संकट में बातचीत संभालना, गलत जानकारी का मुकाबला करना और भरोसे को बचाना। ये काम एक-दूसरे से टकरा सकते हैं। इसलिए संचार को मीडिया से आगे बढ़ाकर एक मजबूत कहानी प्रणाली बनाना होगा। इसके लिए संगठन, प्रशिक्षित लोग, योजनाओं में शामिल करना जरूरी है। लक्ष्य स्पष्ट होना सबसे जरूरी है अनिंद्य सेन गुप्ता ने कहा- हमें AI, खुली खुफिया जानकारी, भावनाओं का नक्शा, भविष्य की भविष्यवाणी जैसी तकनीकें चाहिए। सबसे जरूरी है स्पष्ट लक्ष्य। हम साफ कहते हैं कि यह प्रचार नहीं, झूठ फैलाना या सच्चाई छिपाना नहीं, बल्कि सच्ची बात को देश के लक्ष्यों से जोड़ना है। हमें पुराने युद्धों को देखना चाहिए। वहां जीत साफ दिखती थी। जमीन हासिल कर ली, दुश्मन को हरा दिया, फिर जीत की घोषणा कर दी। आज के युद्धों में जीत साफ नहीं होती अगर हमारी कहानी (नैरेटिव) हार जाए। गलत खबर सफलता को कमजोर कर सकती है लेफ्टीनेंट जनरल अनिंद्य सेन गुप्ता ने कहा- आज थोड़ी-सी गलत खबर से हमारी सफलता कमजोर हो सकती है। दुश्मन इसे हमारी कमजोरी बता सकता है। हमारा मानवीय काम भी दुश्मन के प्रोपेगैंडा से ढक सकता है।इसलिए लोगों के दिमाग पर कब्जा जरूरी है। हमें साफ, सही और भरोसेमंद तरीके से काम करना चाहिए। आज खबरों का जमाना है, जल्दबाजी में गलत खबर भरोसा तोड़ देती है। चुप्पी रहने से दुश्मन जगह भर लेता है। अगर योजना टूटी-फूटी हो तो मैसेज भी बिखरा होगा। इससे भ्रम फैलेगा और गलत खबरें फैलेंगी। इसलिए हमें सबको एक साथ लाना है, पूरी सरकार और पूरा देश। रणनीतिक मैसेजिंग में एकजुट रहें। लोकतंत्र बचाएं, संस्थाओं को आजाद रखें। लेकिन साफ पता हो कि हम क्या हासिल करना चाहते हैं? रणनीतिक कम्युनिकेशन को मजबूत बनाएं, बस प्रतिक्रिया न दें, बल्कि सोच-समझकर देश की ताकत बनाएं। संकट आने का इंतजार नहीं करना चाहिए कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट नितिन गोखले ने कहा- मैं सिर्फ दो-तीन मुख्य बातें बताता हूं। संकट आने से पहले ही संदेश और थीम तैयार करने चाहिए, न कि संकट के समय। ये एक लगातार प्रक्रिया होनी चाहिए, रोजाना चलनी चाहिए चाहे शांति हो या तनाव। हम लोग अभी संकट आने पर ही जागते हैं और 'क्राइसिस कम्युनिकेशन' करते हैं, जबकि 'स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन' अलग चीज है। इसलिए, क्या हम ये कर सकते हैं? लेखक और कंटेंट राइटर्स को बढ़ावा देना चाहिए। जैसे पेंटागॉन ने हॉलीवुड में अफसर भेजे हैं जो अमेरिकी सेना की तारीफ वाली फिल्में ब्लैक हॉक डाउन, आर्गो, टॉप गन आदि बनवाते हैं। अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स बढ़ गए हैं। क्या हमारी सेना या सरकार की असली कहानियों पर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री बन रही हैं। बॉलीवुड में कुछ कोशिश शुरू हुई है, लेकिन ये छोटा हिस्सा है। हमने नैरेटिव बनाने का सबक लिया कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट नितिन गोखले ने कहा- रूट कार्ड एयरबेस पहले पाकिस्तान का एयरबेस था। मैं पहली बार 1 जनवरी 1994 को विदेश सचिव की मीटिंग के लिए वहां गया था। बाद में 4-5 बार और गया। वहां मेरा इस्लामाबाद में मकान मालिक भी रह चुका था। हमने उनके कमांड सेंटर को भारी नुकसान पहुंचाया। सिर्फ वही नहीं, सरगोधा, रहिम यार खान, जैकोबाबाद जैसे कई बेसों को भी। इस बार सैटेलाइट फोटो सबने देखे, दुनिया को सब पता चल गया। यह 10-11 मई के बाद की बात है। पहले जब हमारे कुछ प्लेन गिरे, तो हम चुप रहे। पाकिस्तान ने झूठी खबरें फैलाईं। वे बॉट्स, तुर्की-चीन जैसे दोस्तों के जरिए ऐसा करते हैं। हमने सीखा। वायुसेना की महिला अफसरों, विदेश सचिव ने मीडिया से बात की। फिर डीजीएमओ ने। यह सही था, क्योंकि अफसरों को जमीन का हाल पता होता है। रक्षा सचिव ने गलती की, लेकिन जनरल किंग ने अच्छा काम किया। ऑपरेशन सिंदूर से हमने नरेटिव बनाने का सबक लिया। आज सूर्या कमांड में इसकी चर्चा हो रही है। वरिष्ठ राजनयिक, सैन्य अधिकारी और मीडिया विशेषज्ञ शामिल इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, सरकारी संचार विशेषज्ञ, वरिष्ठ राजनयिक और मीडिया जगत के रक्षा व विदेश नीति से जुड़े विशेषज्ञ ने भाग लिया। सामरिक संचार को राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत और संस्थागत हिस्सा बनाए जाने को लेकर चर्चा हुई। तकनीक, मीडिया और कूटनीति की भूमिका पर मंथन कॉनक्लेव में कई अहम विषयों पर चर्चा होगी। इनमें तकनीक आधारित रणनीतिक संचार, मीडिया की भूमिका, कूटनीति-मीडिया-सेना के समन्वय, भारत की वैश्विक छवि प्रबंधन और विरोधी प्रचार अभियानों से निपटने की रणनीति जैसे मुद्दे शामिल हैं। चार सत्रों में होगी चर्चा, सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण सम्मेलन की शुरुआत उद्घाटन सत्र और मुख्य भाषण से होगी। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थागत पहलुओं पर नीति स्तर की चर्चा होगी। दो अलग-अलग पैनल में मीडिया की भूमिका, धारणा प्रबंधन और सूचना शक्ति पर विचार रखा जाएगा। कार्यक्रम के सभी चार सत्रों का मध्य कमान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव प्रसारण भी किया जाएगा। रणनीतिक संचार को मजबूत करने पर रहेगा फोकस इस कॉनक्लेव का मुख्य उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में स्ट्रेटिजिक कम्युनिकेशन को एक मजबूत और संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित करना है। साथ ही बदलते सूचना माहौल में रणनीति, संरचना और प्रक्रियाओं को लेकर नए सुझाव और व्यावहारिक समाधान भी सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
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