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    लखनऊ इस्कॉन मंदिर में गौर पूर्णिमा महोत्सव:सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भक्ति में लीन होकर मनाया उत्सव

    3 hours ago

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    लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर (इस्कॉन) में मंगलवार शाम गौर पूर्णिमा का महा महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।शाम 7 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर के अध्यक्ष अपरिमेय श्याम प्रभु ने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के अभिषेक और पूजन-अर्चन से किया। इसके बाद गौर कथा, भजन, संकीर्तन और नृत्य का क्रम चला। 'हरे कृष्ण' महामंत्र के गूंजते स्वरों और मृदंग-करताल की ताल पर पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। श्री चैतन्य महाप्रभु 15वीं शताब्दी के महान गौर कथा के दौरान बताया गया कि श्री चैतन्य महाप्रभु 15वीं शताब्दी के महान संत और गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रवर्तक थे। उनका जन्म 18 फरवरी 1486 को पश्चिम बंगाल के मायापुर (नादिया) में हुआ था। बचपन में उन्हें 'निमाई' और 'गौरांग' नाम से जाना जाता था। उन्होंने हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से प्रेम, समानता और भक्ति का संदेश दिया। 24 वर्ष की आयु में संन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होंने 'हरे कृष्ण' महामंत्र का सामूहिक संकीर्तन प्रारंभ किया और समाज को जाति-पांति से ऊपर उठकर भक्ति का मार्ग दिखाया। महामंत्र का जप करने का आह्वान कथा में यह भी उल्लेख किया गया कि महाप्रभु ने अपने छह प्रमुख शिष्यों के माध्यम से वृंदावन धाम में भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थलियों और मंदिरों का पुनरोद्धार कराया। इन सप्त देवालयों में गोविंद देव जी, गोपीनाथ जी, मदन मोहन जी, राधा रमण जी, राधा दामोदर जी, राधा श्यामसुंदर जी और गोकुलानंद जी प्रमुख हैं। महाप्रभु के जीवन पर आधारित प्रमुख ग्रंथों में चैतन्य चरितामृत और चैतन्य भागवत शामिल हैं। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष पुरी धाम (ओडिशा) में बिताए, जहाँ उनका महाप्रयाण हुआ।कार्यक्रम के समापन पर सभी भक्तों ने एकादशी प्रसादम (भंडारा) ग्रहण किया। मंदिर अध्यक्ष ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक 'हरे कृष्ण' महामंत्र का जप करने और श्रीमद्भगवद्गीता का स्वाध्याय करने का आह्वान किया।
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