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    लखनऊ में दिखा शिक्षा-संस्कार का संगम:मुन्नी देवी वाल्मीकि विद्यालय के वार्षिकोत्सव में बच्चों ने मन मोहा

    2 hours ago

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    लखनऊ के गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में मुन्नी देवी वाल्मीकि स्मारक विद्यालय का वार्षिकोत्सव आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा और संस्कार की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली, जहाँ लवकुश नगर, इंदिरा नगर स्थित इस विद्यालय के बच्चों ने अपनी प्रतिभा से सभी का मन मोह लिया। वार्षिकोत्सव की शुरुआत पारंपरिक सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद एकल गायन, समूह गायन, एकल नृत्य और समूह नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। छोटे बच्चों ने वेलकम सॉन्ग से अतिथियों का स्वागत किया। मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास और ऊर्जा देखते ही बन रही थी, जिसमें नाटक और होली विशेष कार्यक्रमों की भी प्रस्तुतियां शामिल थीं। विद्यालय का शुभारंभ मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने किया था विद्यालय के प्रबंधक वाल्मीकि अंकित गाभरी ने बताया कि इस विद्यालय का शुभारंभ वर्ष 2003 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय एन. डी. तिवारी द्वारा किया गया था। यह विद्यालय गरीब तबके के बच्चों को नाममात्र शुल्क पर शिक्षा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि विद्यालय का नाम उनकी दादी मुन्नी देवी के नाम पर रखा गया है। मुन्नी देवी स्वयं शिक्षित नहीं थीं, लेकिन उनका सपना था कि समाज के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ें। इस सपने को उनके पुत्र नरेश वाल्मीकि ने साकार किया और विद्यालय की स्थापना की। प्रधानाचार्य प्रदीप गौड़ भी विद्यालय को आगे बढ़ाने में निरंतर प्रयासरत हैं। शिक्षा से ही बदलेगी तकदीर अंकित गाभरी ने ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े लोगों को संदेश दिया कि वे बच्चों को पढ़ाने से न डरें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही बच्चे आगे चलकर आईएएस, पीसीएस या देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि मजबूत नेतृत्व शिक्षा और आत्मविश्वास से ही तैयार होता है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को शिक्षा से दूर न रखें, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। वार्षिकोत्सव का शुभारंभ मुन्नी देवी वाल्मीकि समाज व परिवारजनों अवंतिका गावरी, मीना देवी, नरेश वाल्मीकि, आशीष गावरी, शैलेंद्र गावरी, अतुल गावरी और आनंद देव गावरी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
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