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    महोबा जिला 31 साल का हुआ:नाना ने मंत्री पद ठुकराकर बनवाया था जिला, अब भी अधूरा विकास

    15 hours ago

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    महोबा जिला आज अपनी 31वीं वर्षगांठ मना रहा है। 11 फरवरी 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इसे हमीरपुर से अलग कर नया जिला घोषित किया था। हालांकि, तीन दशक बाद भी जिले में विकास की कई चुनौतियां बनी हुई हैं। जिला बनने से पहले महोबा हमीरपुर जिले की एक तहसील था। जिला मुख्यालय से अधिक दूरी, विकास कार्यों में देरी और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। इसी असंतोष के चलते महोबा को अलग जिला बनाने की मांग को लेकर एक जन आंदोलन शुरू हुआ था। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में थी। सरकार को बचाने के लिए एक विधायक के समर्थन की आवश्यकता थी। इसी राजनीतिक संकट के बीच महोबा के तत्कालीन विधायक अरिमर्दन सिंह 'नाना' की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई। मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अरिमर्दन सिंह 'नाना' को मंत्री पद की पेशकश की थी। हालांकि, 'नाना' ने व्यक्तिगत लाभ को ठुकराते हुए महोबा को जिला बनाने की शर्त रखी। जनभावनाओं और राजनीतिक आवश्यकताओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने यह मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद, 11 फरवरी 1995 को मुलायम सिंह यादव ने महोबा पहुंचकर इसे अलग जिला घोषित किया। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उमेश सिन्हा को महोबा का पहला जिलाधिकारी नियुक्त किया गया था। जिला बनने के बाद महोबा में प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ। कलेक्ट्रेट, पुलिस कार्यालय, न्यायालय और अन्य विभागों की स्थापना से लोगों को राहत मिली। हालांकि, 31 वर्षों बाद भी महोबा कई बुनियादी चुनौतियों से जूझ रहा है। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है और यह केवल एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए झांसी, बांदा और कानपुर जैसे बड़े शहरों में ले जाना पड़ता है। आज जिला स्थापना दिवस जहां संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान की याद दिलाता है, वहीं यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या 31 वर्षों में महोबा को वह सुविधाएं मिल पाईं, जिनका सपना जिला बनते समय देखा गया था।
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