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    मुरादाबाद में रमज़ान की तैयारियां तेज:इबादत, सहरी-इफ्तार और बाजारों में रौनक शुरू

    13 hours ago

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    मुस्लिम समुदाय के लिए पवित्र रमज़ानुल मुबारक महीने की तैयारियां मुरादाबाद में ज़ोरों पर हैं। इस विशेष माह में मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की इबादत में लीन रहते हैं और रहमत, मग़फ़िरत तथा जहन्नुम की आग से निजात की दुआएं मांगते हैं। रमज़ान का महीना तीन अशरों में बंटा होता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशेष महत्व है। ये अशरे रहमत (अल्लाह की मेहरबानी), मग़फ़िरत (गुनाहों की माफी) और निजात (जहन्नम से छुटकारा) के दौर कहलाते हैं। रमज़ान के शुरुआती दस दिन रहमत के होते हैं। इस दौरान बंदे ज़्यादा से ज़्यादा इबादत, क़ुरआन की तिलावत और दुआओं में मशगूल रहते हैं। माना जाता है कि इन दिनों में अल्लाह की रहमत बंदों पर ख़ूब बरसती है, जिससे दिलों में सुकून और नूर पैदा होता है। रमज़ान के बीच के दस दिन मग़फ़िरत के लिए समर्पित हैं। इस अशरे में मुसलमान सच्चे दिल से तौबा-इस्तिग़फ़ार करते हैं और नेकियों के ज़रिए अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। यह दौर आत्म-चिंतन और ख़ुद को बेहतर बनाने का संदेश देता है। रमज़ान के आख़िरी दस दिन निजात के होते हैं, जिसका अर्थ है जहन्नम से छुटकारा। इसी अशरे में शब-ए-क़द्र की मुबारक रात भी आती है, जिसे हज़ार महीनों से अफ़ज़ल बताया गया है। इन दिनों में लोग ज़्यादा इबादत, एतिकाफ़, दुआ और सदक़ा-खैरात में लगे रहते हैं, ताकि अल्लाह की रज़ा और निजात हासिल हो सके। पवित्र रमज़ान की आमद से पहले ही मुरादाबाद शहर का माहौल बदल गया है। गलियों और बाज़ारों में हलचल तेज़ हो गई है, और शाम ढलते ही मुस्लिम बहुल इलाकों में ख़ास चहल-पहल दिखाई देने लगी है। महानगर से लेकर देहात तक की मस्जिदों में साफ़-सफ़ाई, रंगाई-पुताई और रोशनी की तैयारियां ज़ोर पकड़ चुकी हैं। बाज़ारों में खजला, फेनी, खजूर, शरबत, सूखे मेवे और इफ़्तार से जुड़े अन्य सामान की दुकानें सजने लगी हैं। कपड़ों, टोपी-इत्र और सजावटी लाइटों की ख़रीदारी भी धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ रही है, जो रमज़ान की रौनक को बढ़ा रही है।
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