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    मस्जिद नहीं नवाबों की सैरगाह थी लखनऊ की लाल बारादरी:बेगम के सुसाइड के बाद छोड़ी बिल्डिंग, नमाज विवाद से पुलिस के घेरे में

    6 hours ago

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    बारादरी। एक लाल बारादरी और एक सफेद बारादरी। लखनऊ की छोटी-बड़ी ऐतिहासिक इमारतों में ये बारादरी अपना महत्व रखती हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा लाल बारादरी में नमाज पढ़ने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस वजह से लाल बारादरी एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। हमने इसके बारे में जानने की कोशिश की तो कई इंट्रेस्टिंग चीजें निकलकर सामने आईं। यह इमारत नवाबों का मनोरंजन पार्क थी। इसे अवध के पहले नवाब गाजी उद्दीन हैदर ने बनवाया था। दूसरे नवाब नसीर उद्दीन हैदर ने भी इस इमारत का बखूबी इस्तेमाल किया। उनकी छोटी बेगम ने इसके तहखाने में सुसाइड कर लिया था। उसके बाद नवाब ने यहां आना-जाना कम कर दिया। धीरे-धीरे यह वीरान हो गई। अब यह लखनऊ यूनिवर्सिटी के अंदर है। इस रिपोर्ट में पढ़िए नया विवाद, लाल बारादरी लखनऊ यूनिवर्सिटी का हिस्सा कैसे बनी… पहले लाल बारादरी की 2 तस्वीरें- इतिहास के प्रोफेसर क्या कहते हैं- लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर पीयूष भार्गव ने कहा- लाल बारादरी की एक तरफ गोमती नदी थी और दूसरी तरफ खूबसूरत गार्डन (बादशाह बाग) बनाए गए थे। अवध के पहले नवाब गाजी उद्दीन हैदर ने गोमती नदी के उत्तरी तट पर कई एकड़ में एक आलीशान बाग बनवाया और अपनी रानी बादशाह बेगम के नाम पर उसका नाम बादशाह बाग रखा। इसके बीचोंबीच कुछ भव्य इमारतें बनवाईं। बाद में नासिरुद्दीन हैदर ने यहां मुबारक मंजिल नाम का एक भव्य महल और दो अन्य शानदार इमारतें बनवाईं। लाल बारादरी उसी मुबारक मंजिल का हिस्सा थी। वर्तमान में बारादरी लखनऊ विश्वविद्यालय के बीच में स्थित है।इसके अंदर मस्जिद जैसा कोई स्ट्रक्चर कभी नहीं था। यह केवल महिलाओं के लिए बनाया गया था। यहां महिलाएं ही रहती थीं, पुरुषों के तौर पर केवल नवाबों की एंट्री थी। लाल बारादरी की पुरानी तस्वीर- बिल्डिंग का अब तक का स्टेटस- ASI को नहीं हुआ है हैंडओवर प्रो. पीयूष भार्गव का कहना है कि फिलहाल लाल बारादरी परिसर को ASI को हैंडओवर नहीं किया गया है। ASI इसे डेवलप करेगा तो इसमें पब्लिक की एंट्री भी होगी। ये जमीन यूनिवर्सिटी कैंपस के बीच मे हैं। ऐसे में इसे ओपन फॉर ऑल नहीं किया जा सकता इसलिए इसकी पूरी जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास ही है। अभी ASI की तरफ से कोई दखलअंदाजी नहीं है। 20 करोड़ रुपए से रेनोवेशन की है तैयारी प्रो. पीयूष भार्गव कहते हैं कि कुछ साल पहले लाल बारादरी के रेनोवेशन का प्रपोजल तैयार किया गया था। इसे शासन के पास भेजा भी गया। बाद में इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ASI का इसमें कोई रोल नहीं था इसलिए इसे हेरिटेज बिल्डिंग के तौर पर संरक्षित करने की तैयारी थी। 20 करोड़ रुपए से रेनोवेशन कराया जाना है। अब पढ़िए इतिहास से जुड़े लोगों को- बादशाह बाग की खूबसूरत जगह थी लाल बारादरी प्रोफेसर पीयूष भार्गव बताते हैं- लाल बारादरी नवाबों के दौर की एक बेहद खूबसूरत इमारत थी। 1827 ईस्वी के करीब इसका निर्माण पूरा हुआ था। गाजीउद्दीन हैदर (1814-1827) के समय ये बननी शुरू हुई थी। बादशाह बाग परिसर की ये सबसे खूबसूरत जगह थी। इसका निर्माण नवाब ने अपनी बेगम के लिए कराया था। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथों में ही थी। दूसरे शब्दों में कहें तो ये नवाब की बेगम का महल था। स्विमिंग पूल के लिए इंग्लैंड से आया था स्टीम इंजन प्रो. पीयूष भार्गव कहते हैं कि लाल बारादरी में एक खूबसूरत हमाम (स्विमिंग पूल) था। लाल बारादरी परिसर के पिछले हिस्से में संगमरमर के पत्थरों से बने इस हमाम को कमल का आकार दिया गया था। इस हमाम की खूबी थी कि इसमें ठंडे के साथ गर्म पानी भी हमेशा मौजूद रहता था। इस हमाम के लिए इंग्लैंड से खास तौर पर स्टीम इंजन मंगवाया गया था। पूरी तरह से इस प्राइवेट इस जगह में नवाब अपनी बेगम से गुफ्तगू भी करते थे। अंदर से गुलाबी स्ट्रक्चर, बाहर से लाल रंग का बारादरी परिसर गुलाबी पत्थर से बनाया गया था। इसकी खूबसूरती लाजवाब थी। बारादरी का कॉन्सेप्ट नवाबों के दौर का है। यहां पर बीच में ओपन एरिया, एक हॉल और कई छोटे-छोटे कमरे हैं। एंटरटेनमेंट के लिए कई खूबियों से यह परिसर लैस है। अचानक हुए एक हादसे से नवाबों ने बनाई थी दूरी पहले नवाब गाजी उद्दीन ने इस खूबसूरत इमारत का निर्माण बड़े शौक से कराया था। दूसरे नवाब नसीर उद्दीन के समय अचानक हुए एक हादसे से इस इमारत से वह दूर हो गए। नवाब गाजीद्दीन की छोटी बेगम ने इसी लाल बारादरी के तहखाने में खुदकुशी कर ली थी। उसके बाद से नवाब ने यहां आना कम कर दिया। बाद में उनका आना धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो गया। बिल्डिंग जर्जर होने से बैंक और स्टाफ क्लब किए गए शिफ्ट प्रोफेसर पीयूष भार्गव ने बताया- करीब साढ़े चार दशक से लाल बारादरी को बेहद नजदीक से देखा है। 1981 के दौर में इस लाल बारादरी में यूको बैंक की ब्रांच थी। यहीं पर स्टाफ क्लब का भी संचालन होता था। बाद में जब बिल्डिंग जर्जर हुई तो स्टाफ क्लब के लिए नए भवन का संचालन किया गया। फिर बैंक और स्टाफ क्लब, सब नए ब्लॉक में शिफ्ट कर दिए गए। मस्जिद नहीं है लाल बारादरी, नक्शे में भी जिक्र नहीं लखनऊ विश्वविद्यालय के फैक्लटी रहे प्रो. पीके घोष ने कहा- लाल बारादरी का इतिहास में मस्जिद होने का कहीं कोई जिक्र नहीं है। इस भवन (लाल बरादरी) की बनावट और आर्किटेक्चर मस्जिद के हिसाब से नहीं बना है। इसमें किबला, लेवान भी नहीं है। मुख्य आर्च भी नहीं है। मस्जिद में होने वाला दालान भी नहीं है। इसमें खुतबा पढ़ने के लिए मिंबर नहीं है। पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे में भी लाल बारादरी के मस्जिद होने का कोई जिक्र नहीं है। मस्जिद में किबला क्यों हैं जरूरी? प्रो. पीके घोष के अनुसार, मस्जिद में एक दीवार और मुख्य-आर्च मक्का की दिशा में होती है, जिसे किबला कहते हैं। मस्जिद में किबला सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित काबा की दिशा है, जिसकी ओर दुनिया भर के मुसलमान नमाज के दौरान अपना चेहरा रखते हैं। अब नए उपजे विवाद को जानिए- नए विवाद पर प्रोफेसर ने क्या- लाल बारादरी में कभी इफ्तार नहीं हुआ प्रो. पीयूष भार्गव कहते हैं- लाल बारादरी में कभी रोजा इफ्तारी हुई हो, इसकी कोई जानकारी नहीं है। करीब साढ़े चार दशक के अनुभव के आधार पर यह कह सकते हैं कि रमजान के किसी महीने में भी ऐसे कोई आयोजन नहीं दिखे। स्टूडेंट्स ने क्या कहा… कैंपस में धार्मिक विवाद ठीक नहीं ग्रेजुएशन कर रहे हैं रोशन यादव कहते हैं की विश्वविद्यालय में आए दिन बवाल हो रहे हैं। सही मायने में ऐसे कोई विवाद है ही नहीं। कैंपस का माहौल शांत रहना चाहिए। यह पढ़ाई-लिखाई की जगह है और यहां धार्मिक विवाद ठीक नहीं है। आपसी सामंजस्य से ही सभी समस्याओं का हल निकालना चाहिए, मौजूदा समय का माहौल ठीक नहीं है। कैंपस को न बनाएं विवादित स्थल पीजी स्टूडेंट उदयवीर राज कहते हैं कि विश्वविद्यालय पढ़ाई की जगह हैं, ये परीक्षा का केंद्र हैं। इसे विवादित स्थल बनाना ठीक नहीं हैं। यहां धर्म के आधार पर लोगों को बांटना भी ठीक नहीं है। सभी लोग पढ़ाई करे और आगे बढ़े, यही विश्वविद्यालय का इतिहास रहा हैं और बेहतर होगा कि ये माहौल बना रहे। -------------------------------- संबंधित खबरें भी पढ़िए… लखनऊ विश्वविद्यालय में नमाज को लेकर छात्र आमने-सामने : एक गुट ने नमाज पढ़ी तो दूसरे ने जय भवानी-जय श्रीराम के जयकारे लगाए लखनऊ यूनिवर्सिटी कैंपस में नमाज पढ़ने का विवाद बढ़ गया है। रविवार को जिस जगह मुस्लिम छात्रों ने नमाज पढ़ी और इफ्तार किया, सोमवार को उसी जगह हिंदू छात्रों ने जय भवानी, जय श्रीराम के जयकारे लगाए। (पूरी खबर पढ़िए) लखनऊ विश्वविद्यालय में तीसरे दिन भी बवाल : नमाज के विरोध में हनुमान चालीसा पढ़ने गए छात्र हिरासत में, गंगाजल छिड़का लखनऊ विश्वविद्यालय में आज लगातार तीसरे दिन भी बवाल जारी है। कैंपस में मुस्लिम छात्रों के नमाज पढ़ने के विरोध में आज दूसरे गुट के छात्र हनुमान चालीसा पढ़ने पहुंचे थे। उनके इकट्ठा होते ही पुलिस भी पहुंच गई। छात्रों को पकड़-पकड़कर गाड़ी में ठूंस दिया। चालीसा पाठ करने गए छात्रों का कहना है कि जब यहां नमाज पढ़ी गई, इफ्तार पार्टी की गई तो कोई कार्रवाई नहीं की गई। आज हनुमान चालीसा पर कार्रवाई क्यों की जा रही है? जिन्होंने यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग पर कुदाल चलाई, उन पर देशद्रोह का मुकदमा होना चाहिए। हम जैसे उनका, उसी तरह अपने धर्म का भी सम्मान करते हैं। (पूरी खबर पढ़िए)
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