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    मदनी बोले-क्या 20 करोड़ मुसलमानों को हिंदू बना दोगे?:RSS प्रमुख के बयान पर पलटवार कर कहा-नफरत की आग में झुलसेगा देश, मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए

    7 hours ago

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    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हाल ही में लखनऊ में दिए गए बयान के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तीखा हमला बोला है। मदनी ने सवालिया लहजे में कहा-क्या 20 करोड़ मुसलमानों को हिंदू बना दोगे? क्या 6 करोड़ ईसाइयों की भी 'घर वापसी कराओगे? ऐसे बयान देश को तबाही की ओर ले जाएंगे। भागवत के बयान के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। मदनी ने कहा-देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'घर वापसी' के नाम पर 20 करोड़ मुसलमानों और 6 करोड़ ईसाइयों को धर्म बदलवाने की बात करना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि संविधान और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ भी है। मदनी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा-जो 70 साल में कहने वाले पैदा नहीं हुए, वो आज 20 करोड़ मुसलमानों की 'घर वापसी' की बात कर रहे हैं। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्होंने ही अपनी मां का दूध पिया हो। लेकिन जो आवाज देश को तबाही और दुश्मनी की तरफ ले जाए, वह वफादारी की आवाज नहीं हो सकती।' मदनी ने कहा कि मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे और किसी भी दबाव में धर्म परिवर्तन स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा-'मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे। मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा।' उन्होंने कहा कि देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है। किसी भी धर्म के नाम पर हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। सभी धर्म मानवता, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देते हैं। मदनी ने आरोप लगाया कि देश में मॉब लिंचिंग और धार्मिक हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। गाय के नाम पर बेगुनाह लोगों को मारा जा रहा है, गिरजाघरों में आग लगाई जा रही है और सरकार चुप है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन तलाक जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोग अन्य कथित अत्याचारों पर चुप क्यों रहते हैं? उनके मुताबिक, यदि नफरत की राजनीति जारी रही तो आने वाले समय में अक्सरियत और अल्पसंख्यक दोनों का खून बहेगा और गली-कूचों में हिंसा फैल सकती है। मदनी ने कहा कि देश की असली ताकत उसका संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और राजनीतिक ताकतें देश के सेक्युलर ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा-हमारे पास सत्ता की ताकत नहीं है, लेकिन हम संविधान के साथ खड़े हैं। जमीयत पहले भी नफरत की राजनीति के खिलाफ थी और आगे भी रहेगी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे बुजुर्गों ने आजादी के लिए कुर्बानियां दीं, अपमान सहा, लेकिन मोहब्बत और भाईचारे का रास्ता नहीं छोड़ा। देश नफरत से नहीं, मोहब्बत से चलता है। पढ़िए...आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू समाज के संगठित और सशक्त होने की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। वैज्ञानिकों के हवाले से उन्होंने तर्क दिया कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह भविष्य में समाप्त हो सकता है। भागवत ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या, मतांतरण और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर चिंता जताते हुए ‘घर वापसी’ के प्रयास तेज करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि समाज में भेदभाव खत्म करने के लिए सद्भाव जरूरी है और हम सभी एक ही देश और मातृभूमि की संतान हैं। घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने सख्ती की जरूरत बताते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही थी।
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