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    मंदिर पहुंचते ही ''कुत्ते'' की तरह भौंकने लगा किशोर, VIDEO:मिर्जापुर में वैक्सीन कोर्स न पूरा होने के कारण रेबीज की आशंका, वाराणसी रेफर

    3 hours ago

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    मिर्जापुर के श्रीराम-जानकी और हनुमान मंदिर परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक पिता अपने 17 साल के बेटे को गोद में लेकर झाड़-फूंक कराने पहुंचा। बेटा कुत्ते की तरह भौंक रहा था। बार-बार 'भूत-भूत' कहकर डरने की बात कह रहा था। उसके मुंह से लगातार लार बह रही थी और वह पानी देखकर बहुत डर रहा था। बच्चे की इस हालत को देखकर लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों ने रेबीज के लक्षण बताते हुए झाड़-फूंक कराने की बजाय इलाज कराने को कहा। 108 हेल्पलाइन पर कॉल करके एंबुलेंस मंगाई। किशोर को तत्काल नजदीकी सीएचसी भेजा गया, जहां से वाराणसी के मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया- किशोर को 4 साल पहले कुत्ते ने काट लिया था। उसे रेबीज के दो इंजेक्शन लगे थे, पर तीसरा इंजेक्शन परिवार वालों ने नहीं लगवाया था। एंटी रेबीज कोर्स पूरा न होने के कारण किशोर अब पूरी तरह से रेबीज का शिकार हो चुका है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में किशोर का इलाज जारी है। घटना जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर कछवां थाना क्षेत्र के जोगीपुरवा गांव की है। पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए... अब सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला जानिए... कछवां थाना क्षेत्र के जमुआ चौराहे स्थित श्रीराम‑जानकी मंदिर और हनुमान मंदिर परिसर में शनिवार शाम जोगीपुरवा निवासी गुरू नानक अपने छोटे भाई बेटे करण (17) को गोद में लेकर मदद की गुहार लगाते पहुंचे। किशोर अचानक कुत्ते की तरह भौंकने लगा और “भूत-भूत” कहकर डरने की बात करने लगा। यह दृश्य देखकर मौके पर भारी भीड़ जुट गई और लोग दहशत में आ गए। लोगों ने रेबीज के लक्षण बताते हुए नानक को झाड़-फूंक कराने की बजाय करण का इलाज कराने को कहा। नानक ने बताया- करीब चार महीने करण अपने ननिहाल हरौवा गया था, जहां उसे कुत्ते ने काट लिया था। उस समय एक इंजेक्शन निजी क्लिनिक में और दूसरा सीएचसी कछवां में लगवाया गया, लेकिन तीसरा इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध न होने के कारण नहीं लग पाया था। दिव्यांग पिता भाईलाल ने बताया- शुक्रवार को अचानक करण के सिर में तेज दर्द शुरू हुआ, जिसके बाद वह डरने लगा और अजीब हरकतें करने लगा। भौंकने लगा। पानी देखकर डरने लगा। वह बार-बार डर रहा था। भूत-भूत कह रहा था। हमें लगा किसी ने जादू-टोना कर दिया है तो हम झाड़-फूंक कराने मंदिर ले आए। मंदिर आकर भीड़ देखकर उसकी हालत और बिगड़ गई। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा, कुत्ते जैसी आवाजें निकालने लगा और लोगों से बचने की कोशिश करने लगा। यह देखकर मंदिर परिसर में मौजूद लोग घबरा गए और अफरा-तफरी मच गई। 108 एंबुलेंस से सीएचसी भेजा गया स्थानीय निवासी बद्री सिंह ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। कुछ ही देर में एंबुलेंस मौके पर पहुंची और किशोर को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछवां भेजा गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया और स्थिति गंभीर देखते हुए भर्ती कर लिया। डॉक्टरों ने जताई रेबीज (हाइड्रोफोबिया) की आशंका मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन किशोर के अनुसार मरीज को दो वैक्सीन लगी थीं, लेकिन तीसरी खुराक नहीं लग सकी। उन्होंने बताया कि रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद मरीज की जान बचाना बेहद कठिन हो जाता है, इसलिए उसे भर्ती कर पीड़ा कम करने की कोशिश की जाती है। डॉक्टरों ने इसे हाइड्रोफोबिया यानी रेबीज के उन्नत लक्षण होने की आशंका बताया है, जिसमें मरीज को पानी से डर लगना, सांस में दिक्कत और असामान्य आवाजें निकलना शामिल है। 6 भाई-बहनों में सबसे छोटा है करण, मां की पहले ही मौत पिता भाईलाल ने बताया- वे पैरालिलिस अटैक के कारण 4 साल से लकवाग्रस्त हैं। बड़ा बेटा नानक मोबाइल रिपेयरिंग और टाइल्स लगाकर परिवार को पालता है। करण 3 भाई और 3 बहनों में सबसे छोटा है। मंझला भाई पागल है और कूडा़ बीनता रहता है। तीनों बहनों की शादी हो चुकी है। भाईलाल ने बताया- करण की मां की कुछ साल पहले ही पहले ही बीमारी से मौत हो गई थी। करण गांव के ही सरकारी स्कूल में 7वीं कक्षा का छात्र था, पर पिछले साल उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। फिलहाल वह गांव की एक चाय दुकान में काम करता था। अब रेबीज के बारे में जानिए… रेबीज एक खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। यह लाइसावायरस नामक वायरस से होता है और आमतौर पर संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर या अन्य जानवर के काटने या खरोंच से फैलता है। दुर्लभ मामलों में अंग प्रत्यारोपण से भी संक्रमण हो सकता है। समय पर टीकाकरण न होने पर वायरस शरीर में फैलकर दिमाग पर हमला करता है, जिससे व्यवहार में बदलाव, डर, बेचैनी, पानी से घबराहट और झटके जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, मनुष्यों में लक्षण प्रकट होने के बाद रेबीज लगभग हमेशा घातक साबित होता है, इसलिए जानवर के काटते ही तुरंत वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी है। सही समय पर उपचार शुरू कर दिया जाए तो संक्रमण को रोका जा सकता है। दुनिया के कुछ देशों में रेबीज नहीं पाया जाता, लेकिन कई जगह चमगादड़ों में इससे संबंधित वायरस मिलते हैं, जो इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए किसी भी जानवर के काटने को हल्के में न लेकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है। ------------------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… खाना नहीं दिया तो सौतेली मां को मार डाला:सिर पर हथौड़े से किए ताबड़तोड़ वार, आरोपी बेटा गिरफ्तार संभल में युवक ने अपनी सौतेली मां के सिर पर हथौड़े से ताबड़तोड़ वार कर मार डाला। वह खाना देर से मिलने से नाराज था। चीखने की आवाज सुनकर जब पिता किचन में पहुंचे तो महिला जमीन पर पड़ी तड़प रही थी। चारों ओर खून बिखरा पड़ा था। पास ही हथौड़ा पड़ा हुआ था। अस्पताल ले जाने के पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी बेटे को हिरासत में ले लिया। पढ़ें पूरी खबर…
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