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    मायावती ने ममता पर साधा निशाना:कहा राष्ट्रपति एक महिला के साथ आदिवासी भी हैं, उनका पद दलगत राजनीति से ऊपर

    1 hour ago

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    बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया उत्तर बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल में कथित चूक और विरोध जैसी कार्रवाई पर मायावती ने इसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संवैधानिक पदों का सम्मान न करने का गंभीर मामला बताया। मायावती ने कहा, पश्चिम बंगाल में उनके दौरे पर जो कुछ हुआ, वह अति दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज से आती हैं। संवैधानिक पद दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं। लोकसभा में स्पीकर के अपमान से भी बाज आएं दल मायावती ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला (जो दलित समाज से हैं) के खिलाफ संसद में हो रहे विरोध पर भी कटाक्ष किया। कहा कि संविधान के आदर्शों के मुताबिक सभी को राष्ट्रपति और अन्य संवैधानिक पदों का सम्मान करना चाहिए। उनका प्रोटोकॉल रखना चाहिए। किसी भी रूप में इन पदों का राजनीतिकरण ठीक नहीं है। सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इन पदों की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। 9 मार्च से शुरू हो रहे सत्र को सुचारू रूप से चलाने की अपील मायावती ने 9 मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण को लेकर अपील की कि यह सत्र देश और जनहित में सुचारू रूप से चले, यही लोगों की अपेक्षा और समय की मांग है। बजट सत्र में जिस तरीके से सत्ता पक्ष और विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा की बजाय हंगामा कर रहे हैं, ये उचित नहीं है। अब पढ़ें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे क्या हुआ था? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने 7 मार्च को उत्तर बंगाल (सिलीगुड़ी के पास) गईं थीं। कार्यक्रम की जगह आखिरी समय में बदली गई। इसे बिधाननगर से गोशाईपुर कर दिया गया। कार्यक्रम स्थल भी छोटा रखा गया। इसकी वजह से बड़ी संख्या में आदिवासी नहीं पहुंचे। राष्ट्रपति की अगुवानी के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या कोई राज्य मंत्री भी नहीं पहुंचा। जबकि ये परंपरा रही है कि राष्ट्रपति का स्वागत अमूमन राज्य के सीएम करते हैं। उनकी गैर मौजूदगी में कैबिनेट के सबसे सीनियर मंत्री जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर नाराजगी जताई कि तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें रिसीव करने के लिए राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री या कोई मंत्री मौजूद नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन परंपरा और मर्यादा के लिहाज से ऐसा होना चाहिए था। राष्ट्रपति ने सम्मेलन के आयोजन स्थल को लेकर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के लिए जो जगह चुनी गई थी, वह काफी छोटी थी। इसकी वजह से बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल ही नहीं हो पाए। उनके मुताबिक उस जगह पर करीब पांच हजार लोगों के लिए भी ठीक से व्यवस्था नहीं थी। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि ममता उनके लिए छोटी बहन की तरह हैं और वह उन्हें उसी तरह स्नेह देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ममता उनसे नाराज हैं, लेकिन फिर भी आयोजन स्थल को लेकर उठे सवालों का जवाब मिलना चाहिए। राष्ट्रपति के अपमान पर राजनीति गरमाई, पीएम का हमला राष्ट्रपति मुर्मू के अपमान पर राजनीति गरमा गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर पहला बड़ा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उन्होंने कहा कि TMC सरकार "सभी हदें पार कर गई। उन्होंने पूरे वाकये को राष्ट्रपति का "अपमान" बताया। प्रधानमंत्री की तीखी टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं की ओर से कई हमले कि गए। भाजपा नेताओं ने इसे शर्मनाक बताया। इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रतिक्रिया दी। कोलकाता में एक धरना कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के आयोजन से राज्य सरकार का कोई लेना-देना नहीं था। उनके मुताबिक राज्य सरकार को न तो कार्यक्रम की जानकारी थी और न ही आयोजकों या फंडिंग के बारे में कोई सूचना दी गई थी। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति को इस कार्यक्रम के जरिए भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या वापस जाती हैं, तभी सरकार को आधिकारिक सूचना मिलती है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें- अविमुक्तेश्वरानंद बोले- किसी की औकात नहीं मुझे शंकराचार्य न माने:'जिंदा हिंदू लखनऊ चलें'- लिखे पोस्टर बांटे; गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा करेंगे ‘हमारे शंकराचार्यों पर सवाल उठाने का अधिकार किसी को नहीं है। हमारे धर्म में 4 शंकराचार्य हैं। जब सर्वोच्च शंकराचार्यों ने मेरा अभिषेक कर दिया, तो फिर किसी की क्या औकात है कि वह कहे, हम इन्हें नहीं मानते। उन्होंने कहा कि जो शंकराचार्य बनाता है, उसी को हटाने का भी अधिकार है।’ पढ़ें पूरी खबर…
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